मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मुझे बड़ा मजा आया!’: अनन्या पांडे

‘मुझे बड़ा मजा आया!’: अनन्या पांडे

‘धर्मा प्रोडक्शंस’ की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से डेब्यू करनेवाली अनन्या साउथ के स्टार विजय देवरकोंडा के साथ फिल्म ‘लाइगर’ में उनके अपोजिट रोमांटिक रोल में हैं। हिंदी के साथ ही अन्य पांच भाषाओं में बनी इस फिल्म की धूम मची हुई है। पेश है, अनन्या पांडे से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • फिल्म ‘लाइगर’ के हैंडसम हीरो विजय पर आपको कितना क्रश हुआ?
    विजय देवरकोंडा बेहद हैंडसम हैं और अगर उन पर क्रश हुआ भी तो क्या गलत है? खैर, वो मेरे अपोजिट हैं और एक बेहतर अंडरस्टैंडिंग के साथ मैंने फिल्म में काम किया है। वो एक भले इंसान हैं।
  • इस फिल्म को करने से पहले क्या आप विजय देवरकोंडा से मिली थीं?
    इस फिल्म को करने से पहले मैं उनसे कभी नहीं मिली। विजय देवरकोंडा तेलंगाना के मशहूर और लोकप्रिय स्टार हैं। मैंने उन्हें फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ में देखा, उन्हें गीत गोविंदम सॉन्ग में देखा और उनमें जो करिश्मा है उसका अहसास मुझे तभी हो गया था।
  • आपका किरदार कितना अलग है?
    फिल्म में मेरे किरदार का नाम है तानिया, जो मस्तीखोर, कुछ लाउड और हंगामा करनेवाली है। मुझे यह किरदार निभाते समय बड़ा मजा आया।
  • कई भाषाओं में बनी इस फिल्म के संवादों की डबिंग क्या आपने की?
    मैंने अपने संवाद सिर्फ हिंदी में बोले हैं। साउथ भाषाओं का मुझे ज्ञान नहीं है।
  • फिल्म में विजय देवरकोंडा के हिस्से बहुत एक्शन सीन आए हैं, क्या आपको भी एक्शन करने का मौका मिला है?
    नहीं। वैसे मैंने थाईलैंड में जाकर मार्शल आट्र्स की ट्रेनिंग ली है और मैं ग्रीन बेल्ट प्राप्त कर चुकी हूं। अगर मुझे एक्शन करने का मौका मिलता तो मैं यकीनन अच्छा परफॉर्म करती, जो बिलिवेबल लगता।
  •  क्या नंबर वन स्टार बनने के लिए आप भी प्रयासरत हैं?
    २०१९ में मेरी डेब्यू फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ रिलीज हुई थी, उसे ३ वर्ष पूरे हो चुके हैं। दो वर्षों तक हम सभी ने महामारी का मुकाबला किया है। इस दौर में सर्वाइव होना ही बड़ी बात है। नंबर वन बनने का मेरा कोई सपना नहीं है और न ही मैंने कभी इस दिशा में प्रयास के बारे में सोचा। मेरी किस्मत, मेरी मेहनत और मेरी फिल्मों की सफलता सब एक साथ मिले तो मैं और आगे बढ़ सकती हूं। फिर देखा जाएगा।
  • चंकी पांडे की बेटी होने का आपको कितना फायदा मिला?
    मेरी हर मुलाकात में क्यों यह सवाल मुझसे पूछा जाता है? मैं उनकी बेटी हूं ये मेरी खुशकिस्मती है। मेरे डैड ने मुझे लॉन्च नहीं किया, न मैंने कभी ऐसी उम्मीद लगाई थी। मुझे उन्होंने हमेशा अच्छी ही टिप दी बेटा एक अच्छा इंसान बनना भी उतना ही जरूरी है, जितना एक अच्छी अभिनेत्री बनना। विनम्रता एक अलंकार है और इस अलंकार के साथ काम करते रहो। कौन-सी फिल्में करनी हैं और कौन-सी नकार देनी हैं, इसका अंदाजा तुम्हें दो साल में ही लग जाएगा और अपनी गलतियों से ही सीखते जाओगी। दुनिया तुम्हारे बारे में क्या सोचती है, क्या बोलती है यह कभी नहीं सोचना। अपने मन की बात सुनो।
  • आपकी अभिनीत फिल्म ‘गहराइयां’ ओटीटी पर सबसे ज्यादा देखी गई फिल्म बन चुकी है, क्या आपको इस बात की उम्मीद थी?
    जब दीपिका पादुकोण, नसीरुद्दीन शाह, सिद्धांत चतुर्वेदी जैसे अच्छे सितारे हों तो मेरी तरफ किसका ध्यान जाएगा, ऐसा मुझे लग रहा था लेकिन शकुन बत्रा निर्देशित इस फिल्म में अच्छे परफॉर्मेंस के लिए मुझे अनगिनत कॉल्स और मैसेजेस आए, जिससे मेरा दिल बाग-बाग हो गया।

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