मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मुझे कोई अफसोस नहीं!’-शेफाली शाह

‘मुझे कोई अफसोस नहीं!’-शेफाली शाह

फिल्म, वेब और टीवी की दुनिया में अपने हर रोल में प्रशंसा पानेवाली अभिनेत्री शेफाली शाह इस समय बेहद सुर्खियों में हैं। अमेजॉन प्राइम वीडियो और एबुंशिया फिल्म की प्रस्तुति फिल्म ‘जलसा’ में शेफाली ने रुखसाना का किरदार निभाया है, जो विद्या बालन अर्थात पत्रकार माया मेनन के घर खाना बनाती है। रुखसाना का एक बेहद संजीदा किरदार शेफाली ने निभाया है। पेश है, शेफाली शाह से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

विद्या बालन के साथ काम करते हुए क्या आपको असुरक्षा महसूस नहीं हुई?
विद्या बालन जितनी बड़ी अभिनेत्री हैं, उतना ही बड़ा उनका दिल है। विद्या को अपनी अभिनय क्षमता पर जितना विश्वास है, मुझे भी अपने काम पर उतना यकीन है। इसीलिए हम दोनों को एक-दूसरे के साथ काम करने में इन-सिक्योरिटी महसूस होने का सवाल ही नहीं था। आज तक अमिताभ बच्चन ने रजनीकांत से लेकर दिलीप कुमार जैसे महारथी एक्टर के साथ फिल्में कीं, तब क्या कभी अमित जी या रजनीकांत या दिलीप कुमार साहब के मन में कोई ऐसा तनाव निर्माण हुआ था? बल्कि दर्शकों के लिए ऐसी फिल्में अभिनय की जुगलबंदी देखने जैसा होता है।
आपके व्यक्तिगत जीवन और करियर में ‘जलसा’ मोमेंट कौन-सा था?
अक्सर मेरे जैसे कलाकारों के व्यक्तिगत जीवन की खुशियां और करियर में मिले सुनहरे मौके कहीं-न-कहीं कनेक्टेड होते हैं। मैं जब दो बेटों की मां बनी तो सारे जहां की वो खुशियां मेरे लिए ‘जलसा’ मोमेंट था। शादी और मातृत्व के बाद अमूमन अभिनेत्रियों के करियर को फुलस्टॉप लग जाता है। लेकिन मेरा करियर टीवी, वेब और अब फिल्मों में परवान चढ़ा है। विद्या बालन जैसी मंजी हुई अभिनेत्री के साथ फिल्म ‘जलसा’ में समांतर रोल करना भी मेरे लिए जलसा समान है।
रुखसाना के रोल के लिए आपने किस तरह का होमवर्क किया?
एक गहरी अंडरस्टैंडिंग है रुखसाना और माया के परिवार में। रुखसाना जितना अच्छा खाना बनाती है, उतना ही प्यार माया के बेटे से करती है क्योंकि रुखसाना एक ममतामयी स्त्री है। इस किरदार का यह एक अहम पहलू है। वैसे व्यक्तिगत जीवन में मुझे खाना बनाना अच्छा लगता है। अलग से कोई होमवर्क हमने नहीं किया।
 विद्या बालन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
बहुत समय पहले मैंने और विद्या बालन ने एक टीवी प्रोजेक्ट के लिए साथ काम किया था। लेकिन तब हमारे दरमियान दोस्ती नहीं थी। जब सुरेश त्रिवेणी ने हम दोनों को एक साथ इस फिल्म की मीटिंग के लिए बुलाया तो हमने एक-दूसरे को गर्मजोशी के साथ गले से लगा लिया। विद्या असाधारण अभिनेत्री होने के साथ ही बहुत मिलनसार हैं। सफलता मिलने के बाद भी उनके दिल में हर किसी के प्रति सम्मान और आदर है। उनका यही गुण उन्हें औरों से अलग कर देता है।
क्या इस समय आप टीवी की बजाय फिल्मों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं?
मुझे टीवी में भी अच्छे किरदार मिले। फिल्मों में ‘रंगीला’ के बाद मेकर्स को अंदाजा हुआ कि मैं अच्छा परफॉर्म कर सकती हूं। ‘दिल धड़कने दो’ में ‘ए’ लिस्टर स्टारकास्ट होने के बावजूद मेरी परफॉर्मेंस को नोटिस किया गया। ‘दिल्ली क्राइम्स’ वेब सीरीज ने मुझे अवॉर्ड और नाम दिया। वेब शोज ने मुझे अच्छे रोल दिए और ये सिलसिला जारी है। मेरे लिए यह बड़ी उपलब्धि है, जो भी उम्दा किरदार मुझे ऑफर होगा मैं उसे करूंगी फिर वो ओटीटी पर हो, फिल्मों में हो या टीवी के लिए हो।
पिछले कुछ समय से आप महिला प्रधान किरदारों में ही नजर आ रही हैं, क्या इसलिए कि ऐसे सशक्त किरदार पब्लिसिटी के समय होर्डिंग्स पर नजर आते हैं?
मेरे किरदार की कितनी पब्लिसिटी होनी चाहिए और कितनी नहीं, यह सोचना और उस पर स्ट्रेटेजी बनाना मेरा नहीं मेकर्स का काम है। फिल्म ‘दिल्ली क्राइम्स’ को दुनियाभर के ओटीटी दर्शकों ने पसंद किया लेकिन मैं पोस्टरों पर नहीं थी, जिसका मुझे कोई अफसोस नहीं। मुझे मतलब है ऐसे किरदारों से जिसे निभाना एक चुनौती हो।

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