मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है!’-नाना पाटेकर

‘मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है!’-नाना पाटेकर

नाना पाटेकर एक ऐसे स्टार हैं, जिन्होंने कभी पैसों की परवाह नहीं की। उन्होंने सिर्फ उन्हीं फिल्मों में काम किया जो उन्हें ‘लीक’ से हटकर महसूस हुर्इं। जिस नाना को मूडी अथवा सनकी कहा जाता है उसी नाना में गजब का टैलेंट है। जिस हुनर से वे सीरियस रोल करते हैं उसी हुनर से कॉमेडी में रंग भरते हैं। इस वक्त नाना पाटेकर अपनी फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ को लेकर चर्चा हैं। पेश है, नाना पाटेकर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ में डॉ. बलराम भार्गव की भूमिका स्वीकारने की क्या वजह रही?
लेखक-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के कहने पर मैंने यह फिल्म की। मुझे डॉ. बलराम भार्गव का किरदार पसंद आया। अपनी फिल्मों द्वारा विवेक अग्निहोत्री सच्चाई को सामने लाते हैं, जैसे फिल्म ‘ताशकंद फाइल’ हो, ‘कश्मीर फाइल’ हो या ‘वैक्सीन वॉर’। फिल्म इंडस्ट्री में कभी भेड़चाल होती थी। एक ने फिल्म में गैंग वॉर दिखाया तो १०-१५ फिल्में उसी तर्ज पर आ जाएंगी। यदि लव स्टोरी सफल हुई तो और ८-१० लव स्टोरी पर फिल्में बन जाएंगी। लेकिन विवेक अग्निहोत्री ने अपनी फिल्मों के जरिए कुछ नया बताने की कोशिश की। जो गलत हुआ है या हो रहा है उसे उन्होंने उजागर किया।

डॉ. बलराम भार्गव का किरदार निभाने के लिए आपने किस तरह की तैयारियां की?
यह एक सच्चाई है कि जब फिल्म की शूटिंग शुरू होनी थी, उस समय देशभर में कोरोना का साम्राज्य था। दर्दनाक मंजर था चारों ओर, ऐसे में जो असलियत में डॉ.भार्गव थे उनसे प्रत्यक्ष रूप से मिलना संभव नहीं था। हमें निर्धारित तारीखों में शूटिंग करनी थी इसलिए उनसे मिलना संभव नहीं था। खैर, शूटिंग पूरी होने पर डॉ. भार्गव के लिए एक विशेष शो आयोजित किया गया। इस मौके पर डॉ. भार्गव से मेरी मुलाकात हुई। उन्होंने बधाई देते हुए मुझसे कहा, ‘अरे, मैंने तो हू-बहू आप में खुद को देखा। मुझसे मिले बिना आपने वैâसे मुझे हू-बहू निभाया?’

आपके लिए कोविड का वो दौर कैसा रहा?
पिछले कुछ वर्ष से मैं पुणे स्थित अपने फॉर्म हाऊस पर रहता हूं। १४ एकड़ के मेरे इस फॉर्म हाऊस पर वैसे कोई भी आता-जाता नहीं है। ५ कुत्ते, १२ गाय और दो बैल वहां मेरे साथी हैं। अकेले रहनेवाले इंसान को कोरोना से डर वैâसा? कुत्ते मेरी और जानवरों की रक्षा करते हैं। कुत्तों की वजह से कोई अंदर आने की हिम्मत ही नहीं करता। तो कोरोना वैâसे आएगा मेरे पास? मैंने उसी के आसपास ‘नाम फाऊंडेशन’ का काम शुरू कर दिया था। इस फाउंडेशन के तहत हमने काफी सामाजिक काम किए। यह वक्त वैâसे बीता मैं समझ नहीं पाया। बस, अपना काम करते रहना जरूरी है।

फिल्म ‘वेलकम’ का अगला पार्ट-३ आप क्यों नहीं कर रहे हैं?
इसका सही जवाब फिल्म के मेकर्स ही दे सकते हैं। ‘वेलकम पार्ट-३’ में मैं और अनिल (कपूर) नहीं हैं। अन्य स्टार कास्ट के बारे में मैं नहीं जानता।

पिछले कुछ वर्षों से आप फिल्मों से क्यों नदारद हैं?
इसके पीछे मेरी कोई सोची-समझी स्ट्रेटेजी नहीं है। जो स्क्रिप्ट अच्छी लगती है, उन फिल्मों के लिए मैं हामी भरता हूं और जो पसंद नहीं आती उन्हें मना कर देता हूं। बॉलीवुड का माहौल, वो दौर, मेकर्स कम हैं या नहीं हैं, जिनके साथ मैंने फिल्में की। अगर दस फिल्मों की ऑफर आती है तो शायद एक को हां कहता हूं। अपनी जीवनशैली सहित मैंने अपना बहुत कुछ बदला है।

हाल फिलहाल में आपको कौन सी फिल्म अच्छी लगी?
फिल्में देखना भी मैंने बहुत कम कर दिया है। इस दौर की फिल्मों में मजा नहीं आ रहा। अगर किसी दोस्त ने बहुत आग्रह किया तो मैं फिल्म देखने जाता हूं।

क्या बायोपिक ट्रेंड से आप खुश हैं?
मैं किसी भी ट्रेंड्स पर अपनी राय नहीं रखता। हर निर्माता चाहता है कि उसकी फिल्म खूब चले और बॉक्स ऑफिस पर सफलता का परचम लहराए। खैर, बायोपिक ट्रेंड्स से पब्लिक को लेना-देना नहीं होता उसे तो बस अच्छा कॉन्टेंट चाहिए।

क्या आप अपने जीवन के संस्मरण लिखना चाहेंगे?
फिलहाल मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है। लेकिन भविष्य में ऐसा कोई खयाल मेरे मन में आए तो मैं कह नहीं सकता।

क्या आप अपनी पुरानी फिल्मों को देखना पसंद करते हैं?
यह काम भी मैं नहीं करता। मुझे आगे बढ़ना अच्छा लगता है। खुद का काम फिर क्यों बार-बार देखना? अगर उन पुरानी फिल्मों को देखता रहूं तो जेहन में वही रह जाएगा न! फिल्मों से ज्यादा मुझे किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। फुर्सत मिलते ही किताबें पढ़ना अच्छा लगता है।

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