मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मुझे कोई टेंशन नहीं!’- करणवीर बोहरा

‘मुझे कोई टेंशन नहीं!’- करणवीर बोहरा

छोटे पर्दे के बड़े सितारों में शामिल करणवीर बोहरा ने जहां फिल्मों में परफॉर्म किया है, वहीं ओटीटी सहित छोटे पर्दे पर भी वे अपनी धाक जमाए हुए हैं। करणवीर का शो ‘सौभाग्यवती भव’ काफी सफल रहा। इस वक्त इसी शो का अगला सीजन ‘स्टार भारत’ पर चल रहा है। साथ में सोनी पर ‘हम रहे न रहे हम’ के कारण भी करण सुर्खियां बटोर रहे हैं। पेश है, करणवीर बोहरा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

क्या आपको हीरो का किरदार करना पसंद नहीं है?

हीरो का किरदार निभाना किसे अच्छा नहीं लगेगा? लेकिन सच्चाई यह है कि उसमें करने लायक कुछ नहीं होता। बात बड़े पर्दे की हो तो एक मर्तबा समझा भी जा सकता है कि आप हीरोइन के साथ डांस कर रहे हैं, स्विट्जरलैंड में ड्रीम सीक्वेंस हो सकता है। विलेन के साथ फाइटिंग होगी। इससे ज्यादा और क्या स्कोप होगा? दुर्भाग्य कहें या कुछ और पिछले ४-५ वर्षों से हमारी फिल्में वास्तविकता का लेबल लगाकर ही निर्माण हो रही हैं, जहां नाच-गाने क्या, फिल्मों से गाने तक गायब हो चुके हैं। कहां से स्विट्जरलैंड में आपका ड्रीम सीक्वेंस होगा? सच कहा न मैंने?

क्या नेगेटिव रोल करना एक नशे की तरह नहीं बनता जा रहा है?

यह नशा ही जुनून है। काम का नशा होता है जुनून, जिसे आज कॉमनली पैशन कहा जाता है। जाहिर-सी बात है कई बार कलाकारों को कहते हुए सुना गया है कि नेगेटिव शेड्स में कलाकारों को परफॉर्म करने के कई उम्दा मौके मिलते हैं। और मेरे लिए यह मौके सामने से आ रहे थे तो ऐसे में मैं उन्हें कैसे जाने देता? मैंने उन्हें स्वीकार किया। मेरी जगह कोई भी होता तो वह भी वही करता जो मैंने किया।

शो ‘हम रहे न रहे हम’ में आपका किरदार कैसा है?

मेरे किरदार समर ने तो कहानी में कई हैरतअंगेज ट्विस्ट लाए हैं, जिसकी वजह से हर बार कहानी एक शॉकिंग मोड़ लेते हुए कई रहस्यों को उजागर करती है। अपने मुंह से अपनी बुराई मेरा मतलब किरदार समर की मैं क्या बुराई करूं? ज्यादा खुलकर बोलना भी मना होता है। शो ‘सौभाग्यवती भव’ में भी मेरे कारनामे चलते रहते हैं। क्या करूं मेरे किरदार ही ऐसे होते हैं।

लगातार बुरे काम करनेवाला व्यक्ति समाज में तिरस्कृत होता है। इस मामले में आपका क्या अनुभव है?

किसी जमाने में के.एन. सिंह, प्राण साहब ऐसे विलेन के किरदार निभा चुके हैं कि उनकी इमेज समाज में अवश्य धूमिल हुई होगी। वो दौर ऐसा था जब कई बार लोग समझ नहीं पाते थे कि पर्दे पर बुरे किरदार निभानेवाला कलाकार असल जिंदगी में एक सज्जन पुरुष होगा। मैंने सुना है वरिष्ठ अभिनेत्री ललिता पवार को समाज की कई गलतफहमियों का शिकार होना पड़ा। लेकिन अब वो दौर नहीं रहा। अब सभी लोग बखूबी जानते हैं कि ऑनस्क्रीन बुरे काम करनेवाले कलाकार असलियत में पारिवारिक और अच्छे इंसान होते हैं।

आपके विलेन के किरदार पर आपके बच्चों की क्या राय है?

बच्चे नहीं, बच्चियां! जी हां, मैं प्यारी बेटियों का पिता हूं। शूटिंग में काफी व्यस्त रहने के बावजूद बेटियों के लिए वक्त जरूर निकालता हूं। मेरी पत्नी भी व्यस्त होती है। इसके बावजूद हम अपने करियर और व्यक्तिगत जिंदगी का संतुलन बनाए रखते हैं। बच्चियों ने अभी मेरे शो देखे नहीं हैं। अगर कल उन्होंने देख भी लिया तब भी कोई हर्ज नहीं क्योंकि उनके पापा का करियर है एक्टिंग, यह उन्हें समझ में आ जाएगा। मुझे इस बात का कोई टेंशन नहीं है।
आपकी पत्नी भी इसी फील्ड से हैं, आपके किरदारों पर उनका क्या कहना है?
वो मेरे परफॉर्मेंस की प्रशंसक और समीक्षक भी है। वो मेरी तारीफ भी करती है और कहती है कि जितना हो सके किरदारों को उतना रिपीट नहीं करना चाहिए, उनमें वैरिएशन बहुत जरूरी है।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से आपके पसंदीदा खलनायक कौन हैं?

हर दौर के अलग रहे हैं। प्राण साहब इंडस्ट्री के नंबर वन विलेन रहे हैं। फिर अमरीश पुरी, अमजद खान, डैनी डेंग्जोग्पा, प्रेम चोपड़ा। पिछले ८-१० वर्षों में विलेन की जगह कम होती गई। बॉलीवुड के हीरो ही सर्वेसर्वा यानी विलेन, हीरो और कॉमेडियन ऑल इन वन बन गए। विलेन की कैटगरी खत्म हो गई। हालांकि, आज भी कुछ विलेन के किरदारों के लिए स्कोप बाकी है।

अन्य समाचार