मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मुझे किसी लड़की से प्यार नहीं हुआ!’-तूषार कपूर

‘मुझे किसी लड़की से प्यार नहीं हुआ!’-तूषार कपूर

अभिनेता जितेंद्र के बेटे और निर्मात्री एकता कपूर के भाई तुषार कपूर ने फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एकता कपूर के बैनर ‘बालाजी प्रोडक्शन हाउस’ के बावजूद तुषार ने फिल्म ‘लक्ष्मी’ से फिल्म निर्माण में कदम रखा। बिना ब्याह रचाए सरोगेसी के जरिए पिता बननेवाले तुषार कपूर ने ‘बैचलर डैड’ नामक किताब में अपने पितृत्व के अनुभवों का निचोड़ लिखा है, जिसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। पेश है, तुषार कपूर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 उम्र के ४० पड़ाव पार करने के बावजूद शादी न करने और पिता बनने की चाह के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
इंडस्ट्री में २० वर्ष गुजारने के बावजूद मुझे किसी लड़की से ऐसा प्यार नहीं हुआ कि मैं उसके साथ सारी जिंदगी शेयर कर सकूं। २०१४ से मेरे मन में पिता बनने का खयाल आने लगा कि शूटिंग से घर लौटने के बाद मैं अपने बच्चे के साथ वक्त बिता सकूं। फिर मैंने सरोगेसी के डॉक्टरों से परामर्श किया और २०१६ में मेरे बेटे का जन्म हुआ। लक्ष्य के जीवन में आने के बाद हम सबके जीवन में सुखद परिवर्तन हुआ।

 बॉलीवुड के अन्य दिग्गज भी सरोगेसी के जरिए पैरेंट्स बनें लेकिन ये बोल्ड कदम है?
शाहरुख खान, आमिर खान, प्रियंका चोपड़ा, शिल्पा शेट्टी, करण जौहर जैसी कई हस्तियां सरोगेसी द्वारा माता-पिता बने। ६-७ वर्ष पहले सरोगेसी का विकल्प इतना जाना-माना नहीं था। सबसे पहले मैंने अपनी बात मां, पिता और दीदी से शेयर की और सोचा क्यों न सेरोगेसी के जरिए मैं पिता बनूं। जिन पुरुषों का विवाह किसी कारणवश नहीं हुआ वे क्यों नहीं पितृत्व का आनंद ले सकते? मेरे परिवार के सभी लोग राजी हो गए और एक सपना हकीकत में बदला।

पिता बनने के अनुभवों को किताब में लिखने की प्रेरणा आपको कैसे मिली?
मेरा करियर और व्यक्तिगत जीवन पारदर्शी रहा है। बिना शादी किए मैं पिता बनना चाहता था, जो सरोगेसी के जरिए संभव हुआ। पिता बनने के बाद अपना करियर मैंने कुछ इस तरह से प्लान किया कि बेटे लक्ष्य को भी मैं अपना वक्त दे सकूं। मेरे पिता बनने का यह अद्भुत सफर बहुत रोमांचक रहा। इन अनुभवों को मैं लिखना चाहता था, ताकि आनेवाली पीढ़ी इससे प्रेरित हो सके। अपने देश में जब शादी के बाद दंपति को संतान सुख नहीं मिलता तो कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं, जब सरोगेसी को समाज बिना टीका-टिप्पणी किए अपना ले तो यह एक सामाजिक परिवर्तन कहलाएगा। मेरे किताब में पितृत्व का अनुभव, डॉक्टरों का मार्गदर्शन सारी जानकारी उपलब्ध है।

क्या लक्ष्य की परवरिश का प्रभाव आपके करियर पर नहीं पड़ेगा?
पिता बनने से पहले मैंने सारे मुद्दों पर बारीकी से सोचा। अगर इंसान चाहे तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। आज माता-पिता दोनों एक साथ जॉब करते हैं, तब भी वे अपने बच्चों की परवरिश करते हैं न! मैं खुशनसीब हूं कि मॉम, डैड, दीदी हम सब साथ रहते हैं, जो मेरी अनुपस्थिति में लक्ष्य के साथ होते हैं।

आपकी बहन एकता के बेटे रवि और आपके बेटे लक्ष्य के दरमियान वैâसा रिश्ता है?
दोनों भाइयों में गजब का प्यार और गजब की यारी है। लक्ष्य अपने छोटे भाई रवि के प्रति बहुत प्रोटेक्टिव है। दोनों एक साथ खेलते-कूदते हैं। लक्ष्य और रवि दोनों बहुत भाग्यशाली हैं।

 बतौर निर्माता आपकी अगली फिल्म कौन-सी होगी?
अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘लक्ष्मी’ का निर्माण करने के बाद अब मेरी अगली फिल्म है ‘मारीच’, जो बहुत रोमांचक-डार्क कॉमेडी है। इसका निर्माण करने के साथ ही इसमें मैंने पहली बार निगेटिव किरदार निभाया है। ग्रे शेड्स का किरदार निभाना मेरे कंफर्ट जोन से बाहर है। मेरे साथ फिल्म में नसीरुद्दीन शाह भी हैं और यह फिल्म बहुत जल्द रिलीज हो रही है।

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