मुख्यपृष्ठग्लैमर`मैंने उन्हें नजरअंदाज किया!’-विकास वर्मा

`मैंने उन्हें नजरअंदाज किया!’-विकास वर्मा

अनुपम खेर के एक्टिंग इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा लेकर थिएटर से अपनी शुरुआत करनेवाले विकास वर्मा ने ‘कुमकुम भाग्यविधाता’, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’, ‘सावधान इंडिया’, ‘मेरे साई’ जैसे एक से बढ़कर एक टीवी शोज और विज्ञापन फिल्मों में काम किया है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में कई नॉमिनेशन पा चुकी फिल्म ‘चाय’ में निशांत की मुख्य भूमिका निभानेवाले विकास इन दिनों ‘जी मराठी’ के नए शो ‘तू तेव्हा तशी’ में एक नए अंदाज में नजर आ रहे हैं। पेश है, विकास वर्मा से यू.एस. मिश्रा की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

मराठी शो ‘तू तेव्हा तशी’ का ऑफर आपको कैसे मिला?
मेरा जन्म महाराष्ट्र में होने के कारण मराठी भाषा से लगाव होने के साथ ही मुझे मराठी बोलना बेहद पसंद है। एक्टर बनने की दिशा में जब मैंने कदम बढ़ाया तो उसी दिन सोच लिया था कि मुझे मराठी भाषा में भी काम करना है। इसके लिए मैं लगातार कोशिश भी करता गया। अंतत: इस शो का ऑफर मुझे मिला। इस शो के लिए मैंने ईमानदारी से अभिनय की कोशिश की, जो दर्शकों को बेहद पसंद आएगी।
‘तू तेव्हा तशी’ में आप किस तरह का किरदार निभा रहे हैं?
मेरे किरदार का नाम हितेन है, जो अपर क्लास गुजराती पैâमिली से बिलॉन्ग करता है। मेरी ही तरह हितेन के भी महाराष्ट्र में पले-बढ़े होने के कारण उसे मराठी बहुत अच्छे से आती है। इस शो में उसकी लव, पैâमिली और वर्क लाइफ यानी सब कुछ मिलाकर बहुत ही मसालेदार होनेवाला है।
हितेन के रोल के लिए आपने कैसी तैयारी की?
जैसा कि मैंने आपको बताया मुझे मराठी बोलना आता है, परंतु बोलने और अभिनय करने में बहुत फर्क होता है। मेरे लिए बेहद चैलेंजिंग था गुजराती लहजे को मराठी में लाना क्योंकि मैं मारवाड़ी परिवार से हूं। एक एक्टर होने के नाते सबसे पहले मैंने अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए अपने दोस्तों की सलाह पर रोजाना प्रयास करना शुरू कर दिया। अब तो असल जिंदगी में भी कहीं-न-कहीं वही टोन आने लग गई है।
थिएटर से टीवी और टीवी से फिल्म ‘चाय’ तक का आपका सफर कैसा रहा?
थिएटर के दिन सबसे प्यारे दिन थे। मैं बिल्कुल रॉ था और मेरे लिए सब कुछ नया था। हर रोज, हर पल मैं नई चीज सीख रहा था। लेकिन टीवी पर आने के बाद पता चला कि लाइट्स, वैâमरा, वॉइस कंट्रोल जैसी बहुत-सी बारीकियों पर भी ध्यान देना पड़ता है। स्टेज पर दूर बैठी ऑडियंस लाइव देखती है लेकिन वैâमरा आपके पलक झपकने को भी माफ नहीं करता। अभिनय में टीवी ने मुझे परिपक्व बनाया। रही बात फिल्म ‘चाय’ की तो मेरी जिंदगी में ये दौर पहली बार आया कि पूरी फिल्म का दारोमदार मेरे कंधों पर था। इस बात की फीलिंग ही कुछ अलग होती है। थिएटर से टीवी और टीवी से फिल्मों तक मेरा सफर बेहद खूबसूरत रहा।
कोई ऐसा किरदार जिसे आप निभाना चाहते हों?
इरफान खान मेरे चुनिंदा फेवरेट एक्टर्स में से एक थे। फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ के उनके किरदार ने मेरे दिमाग में गहरी छाप छोड़ी थी। मैं भी बागी का किरदार निभाना चाहता हूं।
अगर बोल्ड और इंटिमेट सीन का ऑफर मिले तो आप उसे करना चाहेंगे?
इतने सालों में मुझे बोल्ड किरदारों वाले कई ऑफर्स मिले लेकिन मैंने नहीं किए। रही बात इंटिमेट सीन की तो अगर मैं कोई ऐसी फिल्म या सीरीज करता हूं, जिसमें रियलिस्टिक जिंदगी दिखाई गई हो और ग्लैमर के लिए जबर्दस्ती सीन ठूंसा न गया हो तभी मैं ऐसे सीन कर सकता हूं।
नेपोटिज्म के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
अगर मैं एक्टर नहीं होता और मेरे पिता का बहुत बड़ा बिजनेस होता तो अपनी गद्दी पर वो मुझे ही बिठाते किसी गैर को नहीं। रही बात नेपोटिज्म की तो प्लेटफॉर्म भले ही मिल जाए लेकिन सफलता अपनी मेहनत के बलबूते ही मिलती है। खैर, ऐसी अड़चनें मेरे सामने बहुत बार आई हैं, पर मैंने उन्हें नजरअंदाज किया। इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के मैंने इतने सारे प्रोडक्ट्स देखे हैं, जिन्हें दर्शकों ने टैलेंट न होने के कारण नकार दिया और वो आज घर बैठे हैं।

 

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