मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं अपने दिल को बहलाता रहा!’ -आमिर खान

‘मैं अपने दिल को बहलाता रहा!’ -आमिर खान

‘थ्री इडियट्स’, ‘मंगल पांडे’, ‘दंगल’, ‘पीके’ जैसी फिल्मों में अविस्मरणीय रोल निभानेवाले आमिर खान इन दिनों पिता के रूप में सुर्खियां बटोर रहे हैं। आमिर और रीना दत्ता की बेटी इरा का विवाह हाल ही में नूपुर शिखरे के साथ संपन्न हुआ। हालांकि, आमिर अपनी पत्नी रीना दत्ता और दूसरी पत्नी किरण राव से भले ही अलग हो गए हों लेकिन उनके बीच रिश्तों की मिठास आज भी कायम है। पेश है, आमिर खान से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 दामाद के रूप में नूपुर आपको कैसे मिले?
जब बात अपनी बेटी की लव स्टोरी की हो तो पिता का भावुक होना स्वाभाविक है। कोविड के दौरान इरा मेरे साथ थी। कभी सुष्मिता सेन के फिटनेस एक्सपर्ट रह चुके नूपुर शिखरे मुझे फिटनेस एक्सरसाइज करवाते थे। मुझे उनका काम पसंद आया तो मैंने इरा से भी फिटनेस एक्सरसाइज करने के लिए कहा। इस तरह नूपुर ने इरा को ट्रेनिंग देना शुरू किया। ट्रेनिंग के दौरान नूपुर और इरा में दोस्ती हुई और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। अपने प्यार का इजहार सोशल मीडिया पर करने के बाद जब दोनों ने मिलकर तय किया कि उन्हें विवाह करना है तो मैंने और मेरे पूरे परिवार ने इस शादी का प्यार से समर्थन किया। नूपुर बहुत ही खुशमिजाज और साफ दिल युवक हैं।

 नूपुर से आपने कितनी मराठी सीखी?
पिछले ४-५ वर्षों से मैं मराठी सीख रहा हूं। सौ प्रतिशत तो नहीं लेकिन ५० प्रतिशत से अधिक मैंने मराठी सीख ली है। मैं नुपूर और उनकी मां से मराठी में बात करता हूं। मुझे लगता है सामनेवाले इंसान से उसकी भाषा में बात की जाए तो प्यार और अपनापन बढ़ता है।

 पिता की हैसियत से आपने विवाह से पहले इरा को क्या समझाया?
मैं अपने दिल की सारी बातें साझा नहीं कर सकता कि इरा के ससुराल जाने के बाद मैं क्या फील कर रहा हूं। इस भावना को एक्सप्रेस करने के लिए अल्फाजों की कमी मुझे महसूस होती है। सिंपल भाषा में कहूं तो मैं अपने दिल को बहलाता रहा।

 आपने सोशल मीडिया से दूरी क्यों बनाकर रखी है?
सोशल मीडिया का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कलाकार अपनी फिल्मों सहित अपने छोटी-बड़ी हर चीज का प्रमोशन करते हैं। एक क्षण में आप सोशल मीडिया के जरिए अपने फॉलोअर्स तक पहुंच जाते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि मेरे लिए ये वक्त की बर्बादी है और मैं अपने परिवार को वक्त देना बेहद जरूरी समझता हूं।

 अपने करियर को लेकर आपके क्या जज्बात हैं?
बॉक्स ऑफिस का तनाव लिए बिना अगर फिल्म निर्माण किया जाए तो फिल्म बनाना आसान है। मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाले विषय एक्सप्लोर किए जा सकते हैं। मेरी फिल्म ‘तारे जमीं पर’ मुझे खुद को पसंद है। ‘दंगल’, ‘लगान’, ‘गजनी’ जैसी मेरी हर फिल्म का जॉनर भिन्न था। मैं एक ही फिल्म करता हूं इसलिए हर फिल्म को मैं पर्याप्त समय देता हूं। फिल्म को सफलता मिले यह फिल्म से जुड़ा हर व्यक्ति चाहता है। फिल्म का ब्लॉकबस्टर होना मेरे लिए मायने नहीं रखता। अगर फिल्म में आत्मा हो तो वो दर्शकों को बांधकर रखने में कामयाब होती है।

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