मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं इसे ताउम्र करना चाहता हूं!’ : विवेक मुश्रान

‘मैं इसे ताउम्र करना चाहता हूं!’ : विवेक मुश्रान

फिल्म ‘सौदागर’ से अपने करियर की शुरुआत करनेवाले अभिनेता विवेक मुश्रान इन दिनों नए शो ‘डॉ. अरोड़ा’ में दिनकर बागला की भूमिका निभा रहे हैं। भले ही वे पुरानी फिल्मों के बड़े नायक रह चुके हैं लेकिन आज भी वो खुद को न्यूकमर ही मानते हैं। पेश है, विवेक मुश्रान से सोमप्रकाश ‘शिवम’ की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • इम्तियाज अली का शो ‘डॉ. अरोड़ा’ किस तरह का शो है, जो इतनी सुर्खियां बटोर रहा है?
    गुप्त रोग विशेषज्ञ डॉ. अरोड़ा और एक पेशेंट के बीच यौन समस्याओं पर आधारित ये एक कॉमेडी शो है। इस शो के माध्यम से दर्शकों को हंसाने की कोशिश की गई है, जिसे हम फैमिली  के साथ बैठकर एंजॉय कर सकते हैं, इसमें कोई फूहड़ता  नहीं है।
  • अपने किरदार के बारे में कुछ बताएंगे?
    इस शो में मैं दिनकर बागला नामक एक व्यक्ति का किरदार निभा रहा हूं। बागला चाहता है कि उसका बेटा भले ही २० साल का हो जाए लेकिन विचारों से वो हमेशा १० साल का बच्चा ही रहे।
  • दर्शकों को इस शो से क्या संदेश देने की कोशिश की गई है?
    इस शो से समाज में संदेश जरूर जाएगा। अक्सर हम सभी गुप्त रोगों से जूझते हैं लेकिन शर्मिंदगी के चलते उसे अपने घर-परिवार वालों से नहीं बताते और आगे चलकर ये रोग भयानक बीमारी बन जाती है। इस शो के माध्यम से हमने संदेश देने की कोशिश की है कि इस तरह की कोई भी समस्या होने पर उसे परिवार के साथ जरूर साझा करें। किसी भी प्रकार का संक्रमण होने पर बच्चे अक्सर उसे माता-पिता से बताने से कतराते हैं और आगे चलकर वे गंभीर समस्या के शिकार हो जाते हैं।
  • कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम करते हुए कैसा  लग रहा है?
    समय के अनुसार इंसान को ढलना पड़ता है। ये अलग बात है कि बतौर हीरो हम सभी के आकर्षण का केंद्र होते हैं। लेकिन जब हम किसी कहानी में सिर्फ एक पात्र तक सीमित हो जाते हैं तो दर्शकों का वह प्यार हमें नहीं मिल पाता, जिसके लिए कभी हम पात्र हुआ करते थे।
  • मनीषा कोइराला के साथ बतौर हीरो काम करने के बाद क्या आप उनके साथ दोबारा काम करना चाहेंगे?
    मुझे इसका हमेशा इंतजार रहेगा कि कोई ऐसा प्रस्ताव मिले, जिसमें हम दोनों फिर एक साथ काम कर सकें। वैसे हम दोनों अच्छे दोस्त हैं। अक्सर हम लोगों की बातें होती रहती हैं लेकिन कभी प्रोजेक्ट में साथ काम करें, इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई।
  • आज के सिनेमा में गाली-गलौज और अपराध काफी बढ़ चुका है। इससे आप कहां तक सहमत हैं?
    मेरे सहमत होने न होने से कोई फर्क  नहीं पड़ता। आज के फिल्मकार समय की मांग को देखते हुए कहानी गढ़ रहे हैं। आज हमारे समाज में जो कुछ भी घटित हो रहा है, फिल्मों का तरीका भी उसी पर निर्भर करता है। आज पहले की अपेक्षा फिल्मों में काफी परिवर्तन आया है, जो आज के समय की मांग है।
  • आपकी महत्वाकांक्षा क्या है?
    मैं ऐसा काम करूं कि लोग बोले कि मैं अभी भी वो सब कर सकता हूं, जो पहले करता आया हूं। सच कहूं तो मेरा करियर अब शुरू हुआ है, नए लोगों के साथ जुड़कर नई उमंग के साथ नए कंटेंट पर काम करना मेरे लिए बहुत खुशी देता है। मैं अपने काम को लेकर हमेशा सक्रिय रहता हूं और इसे मैं ताउम्र करना चाहता हूं।

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