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मैं ही राइट चॉइस बेबी थी!– अदिति गोवित्रिकर

‘मिसेस इंडिया’ के रूप में सिलेक्ट होनेवाली अदिति गोवित्रिकर सफल मॉडल और अभिनेत्री होने के साथ ही एक कामयाब डॉक्टर भी हैं। फिल्म ‘१६ दिसंबर’, ‘धुंध द फॉग’, ‘भेजा फ्राय’, ‘दे दनादन’ जैसी फिल्मों में काम करनेवाली अदिति की परफॉर्मेंस को पिछले दिनों ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘एनआरआई वाइव्स’ में बेहद सराहा गया। पेश है, अदिति गोवित्रिकर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

• अपनी जर्नी के बारे में हमें बताएंगी?
मेरा मानना है कि जब उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिलती है तो हम टूट जाते हैं। कभी-कभार हम दोबारा जीत की उम्मीद तक छोड़ देते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। खट्टे-मीठे और कड़वे अनुभव ही हमारा विकास करते हैं। अनुभवों से ही हमारा जीवन समृद्ध होता है। हमारी मायूसी हमारे भीतर नेगेटिविटी भर देती है, हमारा काफी कुछ छीन लेती है। मैं जब एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी उस वक्त मुझे मॉडलिंग के काफी ऑफर आए। ‘ग्लैडरैग्स मेगा मॉडल’ खिताब के साथ ही मैंने ‘मिसेस इंडिया’ खिताब भी जीता। इसके बाद अभिनय के दरवाजे मेरे लिए अपने आप खुल गए।

• ‘मार्वेलस मिसेस इंडिया’ शुरू करने के पीछे क्या वजह रही?
स्त्री सशक्तीकरण आज महिलाओं के लिए बेहद जरूरी बन चुका है। मैंने इस इनिशिएटिव को स्थापित किया, ताकि महिलाएं सामने आकर बेझिझक अपने दिल की बात कह सकें। अपने दिल की बात सहित वे अपने दिल की घुटन, खुद पर हुए अन्याय और वे क्या चाहती हैं सब कुछ खुलेआम आकर कहें। उनमें बोलने का साहस निर्माण हो। बहुत सह लिया, अब उनकी बोलने की बारी है। इसी उद्देश्य के साथ मैंने ‘मार्वेलस मिसेज इंडिया’ का आयोजन किया। कई बार जिंदगी की आपाधापी, पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण विवाहित महिलाओं का आत्मविश्वास कम हो जाता है, उन्हें उनका खोया हुआ आत्मविश्वास सम्मान के साथ मिलता रहे, यह भी मेरा एक उद्देश्य है।

• एक साथ ग्लैमर और डॉक्टर जैसे सीरियस प्रोफेशन को मैनेज करना कैसे संभव हुआ?
मेडिकल की पढ़ाई के दौरान मैं अपने विषयों में अव्वल रहती थी। मैंने ग्लैडरेग्जस का फॉर्म यूं ही भर दिया था। इस क्षेत्र में भी मैं शिखर पर जा सकती हूं, ऐसा मैंने बिल्कुल भी सोचा नहीं था। शायद जजों की पैनी निगाहों में मैं ही ‘राइट चॉइस बेबी’ थी। हां, अपनी व्यस्तता के कारण मैं अभिनय को ढेर सारा वक्त नहीं दे पाई। अगर इंसान चाहे तो मल्टी डायमेंशनल हो सकता है, क्योंकि हम में से कई व्यक्ति मल्टी टैलेंटेड होते हैं। जाने-माने गायक किशोर कुमार एक अच्छे गायक के साथ ही कामयाब एक्टर, गीतकार, निर्माता-निर्देशक और उतने ही हाजिर जवाब भी थे। खैर, मेरी यही कोशिश रहती है कि मैं जो भी काम करूं उसमें श्रेष्ठता पा सकूं।

• क्या अपने सफर के यादगार पलों को शेयर करना चाहेंगी?
मैंने जब ‘मिसेज इंडिया’ का खिताब जीता, वो पल मेरे लिए बेहद यादगार क्षण था। मैं हमेशा मानती हूं कि वो क्षण मेरे लिए ही नहीं, बल्कि सभी विवाहित महिलाओं को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। कुछ महिलाएं जीवन में जो चाहती हैं वो नहीं कर पातीं क्योंकि कभी मायके वाले, कभी ससुराल वाले, कभी पति सपोर्ट नहीं करता और कभी माली हालत खस्ता होने के कारण उनके हाथ बंधे रह जाते हैं। इस तरह से कभी सामाजिक बंधन, तो कभी पारिवारिक असहयोग, कभी पैसों की कमी, कभी आत्मविश्वास की कमी से वे आगे नहीं बढ़ पातीं। इसलिए मैं अपनी ग्लोबल जीत को उनकी जीत मानती हूं। उन्हें सपोर्ट करने के लिए ही मैंने ‘मार्वेलस मिसेज इंडिया प्रतियोगिता’ की शुरुआत की है। ये जरूरी नहीं कि बहुत सारी डिग्री होल्डर स्त्री ही कामयाब कहलाती हो।

• आप महिलाओं को कैसे सिलेक्ट करेंगी?
इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए कद, सुंदरता, बॉडी मेजरमेंट्स, खूबसूरत बाल यह मापदंड नहीं होंगे। इस प्रतियोगिता में सिलेक्शन के लिए मेरा अलग मापदंड होगा उनके भीतर छुपा टैलेंट, अपने टैलेंट का वे किस तरह से उपयोग करेंगी, थोड़ा-सा उनकी जीवनी के बारे में ऐसे कई मुद्दे हैं, जिस पर पात्रता साबित होगी। महिलाओं का अपने पैरों पर खड़ा होना, आत्मनिर्भर होना आज के वक्त में बहुत जरूरी है और मैं इस सिलसिले में कोशिश कर रही हूं।

• क्या आपको लगता है कि अगर आप फिल्मों को तवज्जो देतीं तो और कामयाब होतीं?
शायद हां और शायद नहीं भी। मैं अपने हर क्षेत्र का आनंद उठाती रही हूं। एक डॉक्टर के रूप में मेरा करियर बहुत सफल रहा। एक सुपर मॉडल, एक मां, एक अभिनेत्री से मुझे कोई शिकायत नहीं। मेरे लिए यह ज्यादा मायने रखता है कि जो किरदार मैंने निभाए उसमें मैंने शत-प्रतिशत दिया है या नहीं। मैं जन्म से फिल्मी परिवेश में नहीं पली-बढ़ी हूं कि मेरे पास फिल्मों का अंबार लग जाए। जिन फिल्मों के ऑफर्स मुझे मिले उन्हें मैंने अपने वक्त और सुविधानुसार सिलेक्ट किया। नतीजा सबके सामने है। अपने किसी भी करियर के प्रति मुझे कोई मलाल नहीं है।

 

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