सामना संवाददाता / मुंबई
दुनिया का सबसे बड़ा दल होने का दावा करने वाली भाजपा अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है। इस संबंध में कई बार सवाल उठने के बाद भी चर्चा यही है कि भाजपा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कब घोषित करेगी, इसका कोई पता नहीं है। फिलहाल भाजपा नए अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों पर विचार कर रही है, उनमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का इस बारे में एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर तो मैं कुछ बोल नहीं सकता, लेकिन एक बात है कोई कुछ भी कर ले, पर मुझे पार्टी के कार्यकर्ता पद से कोई हटा नहीं सकता है। माना जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संसदीय समिति में उन्हें जगह नहीं मिलने पर उन्होंने यह अप्रत्यक्ष तंज मोदी और शाह पर कसा है।
विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे नितिन गडकरी!
गडकरी ने कहा कि मैं अपनी विचारधारा के साथ कभी समझौता नहीं करुंगा। मुझे किसी भी पद का मोह नहीं है। अपने विचार और सिद्धांतों को मैं बड़ा मानता हूं। प्रधानमंत्री बनना हो, तब भी मैं अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं करुंगा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष, मंत्री, सांसद ये सारे पद एक दिन पूर्व हो जाते हैं, लेकिन कार्यकर्ता कभी पूर्व कार्यकर्ता नहीं होता। यह पद कोई मुझसे नहीं छीन सकता। चाहे कितनी भी कोशिश कर ले इसलिए मैं पार्टी का कार्यकर्ता बनकर हमेशा काम करता रहूंगा।
बता दें जब गडकरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तब उनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ अच्छी पकड़ थी। २०१४ का लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाए, इसके लिए संघ नेताओं की इच्छा थी कि गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाया जाए। २००४ और २००९ लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद संघ के आग्रह पर गडकरी को पार्टी नेतृत्व की कमान सौंपी गई थी। भाजपा के संविधान के अनुसार, किसी भी अध्यक्ष को दोबारा मौका नहीं दिया जाता। हालांकि पार्टी के संविधान में कई बार संशोधन हुए हैं। गडकरी को दूसरी बार अध्यक्ष बनाया गया था।
