मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं उसूल से ही काम करूंगी!’ गीतांजलि कुलकर्णी

‘मैं उसूल से ही काम करूंगी!’ गीतांजलि कुलकर्णी

फिल्म, टीवी, रंगमंच और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म हर माध्यमों में अभिनेत्री गीतांजलि कुलकर्णी छायी हुई हैं। सोनी लिव पर सराहे गए वेब शो ‘गुल्लक’ का तीसरा भाग आरंभ हो चुका है। इस शो के लिए गीतांजलि को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिल चुका है। हिंदी और मराठी फिल्मों के साथ ही रंगमंच और टीवी पर अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी गीतांजलि अभिनेता अतुल कुलकर्णी की पत्नी हैं। पेश है, गीतांजलि कुलकर्णी से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

वेब शो ‘गुल्लक’ के तीसरे सीजन को करने की क्या वजह रही?
शो ‘गुल्लक’ में मेरे किरदार की प्रशंसा हुई, जिसके चलते मैंने यह शो तीसरे सीजन में भी किया। महाराष्ट्रीयन होने के कारण मुझे मराठी किरदार ऑफर होते रहे। स्टीरियोटाइप मराठी बैक ग्राउंड वाले किरदारों को अब मैं टालती हूं। स्मिता पाटील और भारती आचरेकर जैसी मराठी भाषी अभिनेत्रियों को हिंदी में इस्टैब्लिशड अभिनेत्रियों का दर्जा मिला। मैं खुद को प्रूव करना चाहती थी इसलिए मैंने ठेठ हिंदी कल्चर वाले शो ‘गुल्लक’ को हां किया।
इस शो में आपके किरदार की क्या खासियत है?
आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि ‘गुल्लक’ के पहले दोनों सीजन एक बड़े लेवल तक पहुंच चुके हैं। मेरा किरदार एक मां का है, जिसका नाम है शांति मिश्रा, जो मध्यमवर्गीय मूल्यों के साथ अपनी पारिवारिक जिंदगी जी रही है। बिना लड़े और बिना बहस किए अपनी बात परिवार के सामने रखना कोई शांति मिश्रा से सीखे। मुझे लगता है इस कलियुग में एक स्त्री को अपना आत्मसम्मान बरकरार रखते हुए परिवार में वैâसे जीना चाहिए, इसका एक उदाहरण शांति मिश्रा हैं।
सुना है इसकी शूटिंग भोपाल में की गई, जबकि कहानी उत्तर प्रदेश की है?
भोपाल में एक ऐसा घर प्रोडक्शन को मिला जो उत्तर प्रदेश की संस्कृति से मेल खाता था। इसकी शूटिंग लॉकडाउन में की गई और उस समय ये संभव नहीं था कि कहानी के अनुसार सही लोकेशन ढूंढ़ी जाए। इसी कारण भोपाल में एक पुराने पर अच्छे से मेंटेन किए हुए घर में इसकी शूटिंग की गई। यह घर भी एक तरह से कहानी की आत्मा है।
अब तक के अपने करियर से आप कितनी संतुष्ट हैं?
अपने करियर से मैं बेहद संतुष्ट और खुश हूं। रंगमंच से लेकर टीवी, फिल्म और ओटीटी कोई भी प्लेटफॉर्म मुझसे छूटा नहीं। हर तरह के किरदार निभाने का मुझे मौका मिला, जो सभी को नसीब नहीं होता। मैंने कई मराठी और हिंदी नाटक किए। मेरे ‘बैरी पिया’ नाटक का शुभारंभ लंदन में हुआ था। इसके कई सारे शोज मैंने किए। ओटीटी पर मुझे बहुत अच्छे किरदार मिल रहे हैं। किस बात की मुझे शिकायत होगी?
क्या आपको कभी महसूस नहीं हुआ कि आप मां के किरदारों में वैâद होकर रह गई हैं?
मैंने कई तरह के किरदार निभाएं हैं। मां का किरदार मैंने भले ही ज्यादा निभाया हो लेकिन मेरे द्वारा निभाया गया मां का हर किरदार बहुत अलग है। मेरे द्वारा निभाई गई मां सिर्फ चूल्हा-चौका नहीं करती। कर्तव्य दक्ष मां में प्यार-ममता और उसका खुद का एक व्यक्तित्व भी है। सर्व साधारण मां की भूमिका मैंने कभी नहीं निभाई।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर महिला किरदारों को इंटिमेट सीन करने पड़ते हैं, क्या इस तरह के सीन करना आप उचित मानती हैं?
ऐसे मुद्दे में हर कलाकार की खुद की सेंसरशिप ही काम करती है। अगर मैं नहीं चाहती कि मुझे इस तरह का सीन करना है तो मैं अपने उसूल से ही काम करूंगी। और फिर हर कलाकार खासकर हर महिला कलाकार को यह सिक्स्थ सेंस होता ही है कि इंटिमेट सीन क्या वाकई कहानी की जरूरत है या नहीं। निर्देशक के पास भी इसका एक्सप्लेनेशन होना चाहिए कि कोई सीन लेने के पीछे उसका क्या दृष्टिकोण है, क्या कहना चाहता है निर्देशक!

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