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कुछ मांगने से अच्छा मरना पसंद करूंगा!

सामना संवाददाता / भोपाल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भले ही बड़े मन के साथ एमपी के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव को बधाई दे दी हो लेकिन राज्य का मुख्यमंत्री न बनाए जाने का मलाल मंगलवार को `मामा’ के चेहरे पर साफतौर पर देखने को मिला। दरअसल, कल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांप्रâेंस की। हालांकि, शिवराज की ज्यादातर बातें तो इस दौरान विदाई भाषण की तरह रही लेकिन उनके दो बयान बेहद अहम रहे। शिवराज ने कहा कि मैं अपने लिए मांगने से बेहतर, मरना पसंद करूंगा। ये पूछे जाने पर कि क्या वह छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ेंगे, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे बारे में कोई पैâसला नहीं करता। मायूस `मामा’ के ये दोनों बयान उनके भीतर के दर्द को बयां कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने बाजेपी पार्टी के खिलाफ तो कुछ नहीं कहा लेकिन राजनीति जानने-समझने वालों के लिए उनके ये बयान इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह गए हैं।

मध्य प्रदेश में सोमवार को जैसे ही सीएम के नाम की घोषणा हुई, वैसे ही राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग चौंक गए। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की रेस में शिवराज चौहान, प्रह्लाद पटेल और नरेंद्र तोमर जैसे दिग्गजों के नाम पर अटकलें लगाई जी रहीं थी, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद मोहन यादव के नाम का एलान कर दिया गया। अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इतने दिग्गजों को किनारे कर मोहन यादव के नाम पर आम सहमति वैâसे बनी? जानकारों की मानें तो मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाना २०२४ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक है।

हालांकि, बीजेपी की टॉप लीडरशिप ने मोहन यादव का नाम पहले ही तय कर लिया था। लेकिन जब तक नए सीएम के नाम का एलान नहीं हो गया तब तक पार्टी के चंद नेताओं को छोड़कर किसी को इसकी हवा तक नहीं लगी थी। लेकिन लगता है इस बात की भनक `मामा’ को पहले ही लग गई थी। यही वजह है कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर `राम…राम’ कह कर सभी को इस बात के संकेत दे दिए थे कि इस बार उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा।

जीत का फैक्टर शिवराज

हालांकि, मध्य प्रदेश में बीजेपी की इस बड़ी जीत का श्रेय `मामा’ को ही जाता है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से उनका पत्ता कट होना कई सवाल खड़े कर गया है। राज्य में उनके जरिए शुरू की गई योजनाओं ने लोगों को काफी प्रभावित किया, जिनमें से एक लाडली योजना भी है। इस योजना को महिलाओं के जरिए काफी सराहा गया, जिसके अंतर्गत एमपी सरकार लड़कियों के पैदा होने से लेकर शादी तक पढ़ाई में आर्थिक मदद करती है।

‘यादव’ के जरिए ओबीसी समाज को साधने की तैयारी

हालांकि, मध्य प्रदेश में मोहन यादव को सीएम का पद देने के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी यादव पैâक्टर का सहारा लेना चाहती है और इसके साथ ही वह ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसके जरिए उन्होंने यूपी और बिहार की जनता को संदेश देने की कोशिश की है। इसके साथ ही बीजेपी चाहती है कि वह यादव पैâक्टर से एमपी और बिहार के लोगों को प्रभावित कर सके।

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