मुख्यपृष्ठटॉप समाचारदेश को बेवजह मुसीबत में धकेल रही है केंद्र सरकार, किसानों की...

देश को बेवजह मुसीबत में धकेल रही है केंद्र सरकार, किसानों की सुध नहीं ली तो और बढ़ेगी महंगाई!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
एक बार फिर किसान और सरकार आमने-सामने आ चुके हैं। दिल्ली कूच का एलान एक आंदोलन बन चुका है। हरियाणा से लेकर दिल्ली तक के बॉर्डर सील हो गए हैं। कल पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर किसान और सुरक्षाबलों के बीच झड़प देखने को मिली। किसानों के अंदोलन को तोड़ने के लिए केंद्र सरकार का क्रूर चेहरा भी देखने को मिला। पंजाब-हरियाणा से किसान फसलों पर एमएसपी गारंटी कानून की मांग को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। २० हजार से ज्यादा किसानों के जुटान को देखते हुए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी के बॉर्डर्स को सुरक्षा बलों ने सील कर दिया है। पंजाब से दिल्ली के लिए कूच कर चुके किसानों के कारण माल ढुलाई पर असर पड़ने लगा है। पंजाब और उसके रास्ते दिल्ली आने वाले सैकड़ों ट्रक रास्तों में फंसे हुए हैं। जालंधर से नौ फरवरी को निकले ट्रक सोमवार शाम तक भी दिल्ली नहीं पहुंच पाए। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है किसान सड़क पर आते हैं तो रोजाना ५०० करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र सरकार देश को बेवजह की मुसीबत में धकेल रही है। आशंका जताई जा रही है कि अगर किसानों की सुध नहीं ली गई तो देश में महंगाई का बढ़ना निश्चित है।
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि पंजाब से निकले किसानों के चलते पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तर हरियाणा के काफी हिस्सों से ट्रक निकल नहीं पा रहे हैं। हरियाणा में भी कुछ स्थानों पर ट्रकों को रूट बदलकर निकाला जा रहा है, लेकिन उसमें भी सिर्फ कुछ ही ट्रक निकल पा रहे हैं और अधिकांश रास्तों में फंसे हुए हैं। पुलिस फोर्स को लगता है कि अगर ट्रकों के लिए रास्तों को खोलेंगे तो फिर किसान भी अपने ट्रकों को लेकर वहां से निकल जाएंगे, इसलिए नेशनल हाईवे समते अन्य रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
कपूर के मुताबिक, उनके कुछ ट्रकों ने नौ फरवरी को जालंधर से सामान भरा था, जिन्हें १० फरवरी की रात तक दिल्ली आना था, लेकिन वह अभी तक नहीं पहुंचे। साथ ही, दिल्ली में रूट डायवर्ट है, जिससे वाहनों का ६०-१२५ किलोमीटर रूट बढ़ गया है। इसका सीधा मतलब है कि ६० रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से मालभाड़े का खर्च होता है, यानी साढ़े सात हजार रुपए ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया है। साथ ही, आपूर्ति करने में अब समय भी ज्यादा लग रहा है, जिसका खर्च अलग से बढ़ा है।

कीमतों पर दिखेगा असर
दिल्ली में पंजाब, उत्तर-पूर्वी हरियाणा, हिमाचल और जम्मू कश्मीर से बड़ी संख्या में फल और सब्जियों की सप्लाई होती है। आजादपुर मंडी के आढ़ती वरुण चौधरी कहते हैं कि पंजाब में किसानों के कूच के बीच फल और सब्जियों को दिल्ली पहुंचने में समय लग रहा है। ट्रकों को काफी घूमकर आना पड़ रहा है। अगर यही सिलसिला जारी रहता है तो आने वाले तीन से चार दिनों में फल और सब्जियों की कीमतों में असर देखने को मिलेगा, क्योंकि ट्रांसपोर्टर मालभाड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। जाहिर है कि जब रूट लंबा होगा तो वो मालभाड़ा ब़ढ़ेगा, जिससे कीमतें भी बढ़ेंगी।

आर्थिक नुकसान भी ज्यादा होगा
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव हेमंत गुप्ता का कहना है कि पंजाब के रास्ते बड़ी मात्रा में सामान दिल्ली और देश के बाकी हिस्सों में जाता है। किसानों के सड़कों पर आने से मोटे तौर पर अनुमान है कि प्रतिदिन करीब ५०० करोड़ रुपए का लेनदेन प्रभावित होगा, जिसमें आर्थिक नुकसान भी काफी ज्यादा होगा, क्योंकि आज के समय में किसी भी सामान की समय पर आपूर्ति सबसे जरूरी है।

इन चीजों की हो जाएगी कमी
 फल-सब्जी और सूखे मेवे, लकड़ी
 हार्डवेयर का सामान
 स्पेयर पार्ट और ऑटो पार्ट
 मशीनरी और उससे जुड़े उत्पाद
 कपड़े और खेल का सामान

अन्य समाचार