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आरे कॉलोनी में एक भी पेड़ काटते हो तो याद रखना! …सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को लगाई फटकार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
गोरेगांव की आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड के लिए अनगिनत पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एमएमआरसीएल) को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इसके आगे अगर आरे कॉलोनी में एक भी पेड़ काटते हैं, तो याद रखना! इसके पहले दिए प्रतिज्ञा पत्र का सख्ती से पालन करें। अगर किसी नियम का उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो आपके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी चेतावनी कोर्ट ने एमएमआरसीएल को दी।
बता दें कि आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर लॉ के एक छात्र ने २०१९ में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। इस मामले में बुधवार को न्यायमूर्ति यू.यू. ललित, न्यायमूर्ति रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस बार खंडपीठ ने एक बार फिर मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को आरे में पेड़ों की कटाई के लिए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आपने जो पहले एफिडेविट दिया था, उसका पालन करें, आरे कॉलोनी में कोई भी पेड़ न काटें। अगर अब से आप एक पेड़ भी काटते हैं, तो याद रखना। आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी कोर्ट ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनीता शेनॉय ने दलील दी। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पहले एक एफिडेविट देकर कोर्ट से बताया था कि अब आगे एक भी पेड़ नहीं कटेगा, लेकिन अभी भी आरे कॉलोनी में कार शेड के लिए समतलीकरण और अन्य काम किए जाने की जानकारी शेनॉय ने कोर्ट को दी। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को अगली सुनवाई तक काम बंद रखने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के वकीलों ने कुछ दस्तावेज जुटाने के लिए और दो दिन का समय मांगा। आरे कॉलोनी में मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े करीब २९ अतिरिक्त दस्तावेज हैं। उन दस्तावेजों को इकट्ठा करने के लिए और समय की जरूरत होने का तर्क सरकार के वकीलों ने कोर्ट को दिया। इस पर कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर नाराजगी दिखाते हुए कहा कि आपके अनुरोध पर हमें कितनी बार सुनवाई स्थगित करनी चाहिए? दो बार पहले भी सुनवाई स्थगित करने पर फटकार लगाते हुए कोर्ट ने सुनवाई ३० अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

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