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ऐसे पढ़ेगा तो कैसे बढ़ेगा इंडिया! एक कमरे में ८ क्लासेज, ८ ब्लैकबोर्ड

  • यूपी के स्कूलों का है खराब हाल
  • सरकार का छात्रों की तरफ नहीं है ध्यान

सामना संवाददाता / गाजीपुर
यूपी में गाजीपुर के सैदपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय का एक कमरे में ३८८ बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। जगह न होने के कारण क्लास में १०० से डेढ़ सौ बच्चे ही आते हैं। एक से ८ तक की कक्षाओं के लिए बने इस कमरे में जब पढ़ाई शुरू होती है तो एक अलग ही माहौल दिखता है। यहां जब टीचर ८वीं क्लास के बच्चों को पढ़ाते हैं तो १ से ७ तक के बच्चे चुप हो जाते हैं। स्कूल के अंदर १८ बाई ३५ का एक कमरा है। घंटी बजने के बाद बच्चे उसी क्लास में बैठना शुरू होते हैं। लगभग ८० बच्चे किसी तरह से बैठ जाते हैं। क्लास के अंदर ८ ब्लैक बोर्ड लगे हैं। सबके ऊपर क्लास का नाम लिखा हुआ है। जो बच्चा जिस क्लास का है अपने ब्लैक बोर्ड के सामने बैठ जाता है। कुछ देर बाद एक घंटी और बजती है। क्लास के अंदर ८ टीचर आती हैं। बच्चे टीचर को नमस्ते बोलते हैं। १-१ करके टीचर बच्चों की अटेंडेंस लेती हैं। उसके बाद बच्चों से किताब निकालने के लिए कहती हैं। क्लास ७ की टीचर जमीन पर बैठकर बच्चों की कॉपी चेक करतीं हैं। क्लास ६ की टीचर बच्चों को ब्लैक बोर्ड पर बुलाकर सवाल हल करवातीं हैं। बाकी क्लास के बच्चे शांत बैठे रहते हैं। वहीं कुछ बच्चे क्लास के बाहर खड़े रहते हैं। २० मिनट पूरे होने के बाद क्लास ५, ४ और ३ की पढ़ाई शुरू होती है। तब क्लास ८, ७ और ६ के बच्चे अपना कॉपी में काम करते हैं। उनके टीचर वहीं पास में बैठी रहती हैं।
छात्रों को बैठाया जाता है बाहर
कमरे के बाहर भी एक क्लास चलती है। इसमें क्लास में ज्यादातर लड़के बैठे रहते हैं। पूछने पर पता चला कि क्लास में लड़कियां ज्यादा हैं, उनको दिक्कत न हो इसलिए लड़कों को बाहर बैठाया जाता है। यह पूरी क्लास जुगाड़ से चल रही थी। ब्लैक बोर्ड को ईंट के बीच में फंसा कर रोका गया था। बच्चे अपनी गोद में कॉपी रखकर लिख रहे थे। २० बच्चों को पढ़ाने के लिए ३ टीचर बैठे थे, क्योंकि उनके पास पढ़ाने के लिए दूसरे बच्चे नहीं थे।

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