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मुंबई में रहना है तो खर्च कर प्यारे! …होम लोन और महंगा हुआ

•  ८ शहरों में महंगे हुए मकान
सामना संवाददाता / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की चकाचौंध भले ही लोगों को प्रभावित करती हो लेकिन प्रवासियों के लिए रहने-खाने के लिहाज से काफी महंगा भी है। हालांकि, दुनिया के अन्य शहरों से तुलना की जाए तो मुंबई काफी किफायती भी है। एक दिन पहले नाइट प्रैंâक ने वैâलेंडर वर्ष २०२३ के पहले छह महीनों के लिए देश के आठ शहरों के लिए ‘किफायत सूचकांक’ जारी किया, जिसमें औसत परिवार के लिए मासिक किस्त (ईएमआई) के अनुपात में आय का आकलन किया गया है। सूचकांक से पता चला है कि आवास ऋण पर उच्च ब्याज दरों ने २०२३ में अब तक सभी बाजारों में घर की खरीदारी को महंगा कर दिया है। इस हिसाब से मुंबई का ५५ प्रतिशत है जो कि काफी अधिक है। यानी मुंबई आम लोगों के लिए अनअफोर्डेबल है।
आय के आधे से ज्यादा ईएमआई सही नहीं
इसमें कहा गया है कि ५० प्रतिशत से अधिक ईएमआई आय अनुपात को वहन करने योग्य नहीं माना जाता है, क्योंकि यह वह सीमा है, जिसके आगे बैंक शायद ही कभी किसी बंधक को अंडरराइट करते हैं। नाइट प्रैंâक ने कहा कि भारत के आठ शहरों में २०१० से २०२१ तक सामर्थ्य सूचकांक में लगातार सुधार देखा गया। खासकर, महामारी के दौरान जब आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती कर दशक के निचले स्तर पर ला दिया। नाइट प्रैंâक ने कहा कि बढ़ती मुद्रास्फीति को संबोधित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने तब से रेपो रेट दर में २५० बीपीएस की वृद्धि की है, जिससे शहरों में सामर्थ्य पर औसतन २.५ प्रतिशत का असर पड़ा है और ईएमआई भार में १४.४ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’

अमदाबाद सबसे ज्यादा ‘अफोर्डेबल’
शीर्ष आठ शहरों में अमदाबाद सबसे किफायती आवास बाजार है, जिसका अनुपात २३ प्रतिशत है, इसके बाद पुणे और कोलकाता २६ प्रतिशत है, बंगलुरु और चेन्नई २८-२८ प्रतिशत पर, दिल्ली-एनसीआर ३० प्रतिशत पर, हैदराबाद ३१ प्रतिशत और मुंबई ५५ प्रतिशत पर हैं। किसी शहर के लिए अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स स्तर ४० प्रतिशत का अर्थ है कि उस शहर के परिवारों को उस इकाई के लिए आवास ऋण की ईएमआई को वित्तपोषित करने के लिए औसतन अपनी आय का ४० प्रतिशत खर्च करने की आवश्यकता होती है।

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