मुख्यपृष्ठनए समाचारआईआईटी-पवई करेगी, इमारत की स्ट्रक्चरल ऑडिट .... नेरुल इमारत हादसा

आईआईटी-पवई करेगी, इमारत की स्ट्रक्चरल ऑडिट …. नेरुल इमारत हादसा

सामना संवाददाता / नई मुंबई
नई मुंबई के नेरुल सेक्टर ६ के तुलसी भवन में बुधवार की रात हुए हादसे के बाद से ही शांति छाई है। तुलसी भवन, तुलसी प्रसाद के ए से लेकर ई विंग तक के सभी फ्लैट खाली कर दिए गए हैं। यहां रहने वाले हरजस सिंह कहते हैं कि रात सवा नौ के करीब तुलसी भवन में अचानक जोर से कुछ गिरने की आवाज आई और उसके बाद चीखपुकार मच गई। हम जब वहां पहुंचे तो देखा कि इस बिल्डिंग के तीन स्लैब गिर गए थे और मलबे में कुछ लोग फंसे हुए थे। चार लोगों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टर ने उनमें से दो लोगों को मृत घोषित कर दिया और दो की हालत क्रिटिकल बनी हुई थी।
नहीं हुई थी इमारत की स्ट्रक्चरल ऑडिट
नई मुंबई महानगरपालिका के एक अधिकारी गिरीश गुमास्ते स्ट्रक्चरल ऑडिट के बारे में कहते हैं कि यह बिल्डिंग इतनी पुरानी नहीं थी कि इन्हें इसकी जरूरत पड़ती। दूसरी बात कभी यहां के निवासियों ने इस बात की शिकायत भी नहीं की थी। हालांकि, वे कहते हैं कि अब महानगरपालिका आईआईटी पवई के एक पैनल के जरिए इन इमारतों की स्ट्रक्चरल ऑडिट करने जा रही है। इस बीच सूत्र बताते हैं कि हादसे के बाद सिडको ने भी आनन-फानन में एलाइड सेल्स एंड सर्विस नामक एजेंसी को इस बिल्डिंग के स्ट्रक्चरल ऑडिट करने का निर्देश दे दिया है।
जमीन मालिक और निजी बिल्डर की सांठ-गांठ 
यह इमारतें नेरुल के सेक्टर ६ के प्लॉट नंबर ३१३ पर बनाई गई है, जो गांवठण के ७-१२ के तहत है। दरअसल, नई मुंबई के गांवठण इलाकों में इस तरह की इमारतों का निर्माण जमीन मालिक और निजी बिल्डर के आपसी आर्थिक हितों को ध्यान पर रखते हुए किया जाता है। इन इमारतों में फ्लैट की कीमत सिडको या निजी बिल्डरों द्वारा बनाई गई इमारतों में फ्लैट से काफी कम होती है।
बिल्डर के खिलाफ होगी कार्रवाई 
इन इमारतों का निर्माण मुकेश भाटिया नमक बिल्डर द्वारा किया गया है। इसे सीसी १९९७- ९८ में और २००० में महानगरपालिका द्वारा ओसी दी गई है। एक महानगरपालिका अधिकारी कहते हैं कि बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई आईआईटी रिपोर्ट के बाद ही की जा सकती है। वह भी मानते हैं कि इमारत इतनी पुरानी भी नहीं है कि इस तरह का हादसा हो जाए।

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