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अवैध निर्माण नहीं किया जाएगा बर्दाश्त, एक भी बेगुनाह की नहीं जाने देंगे जान! उच्च न्यायालय ने सरकारी तंत्र को लगाई फटकार

सामना संवाददाता / मुंबई
सरकारी एजेंसियों के आशीर्वाद में भू-माफियाओं ने जमीन कब्जे में लेकर ठाणे में अवैध इमारतें खड़ी कर दी हैं। ये अवैध इमारतें खतरनाक हो गई हैं। इसमें हजारों की संख्या में निवासी सालों से जान हथेली में लेकर रह रहे हैं। सरकार की इस लापरवाही के चलते इस बारिश में मुंब्रा स्थित लकी कंपाउंड पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मुंबई उच्च न्यायालय ने कल राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। बारिश में इमारत गिरने से लोगों की जान जाने का क्या आप इंतजार कर रहे हैं? साल १९९८ के अर्थहीन शासनादेश का कार्यान्वयन किसलिए कर रहे हो, ऐसी फटकार लगाते हुए न्यायाधीश ने इसे लेकर सरकार से जवाब मांगा है। इतना ही नहीं, एक भी बेगुनाह व्यक्ति की जान नहीं जाएगी, न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
मुंब्रा स्थित लकी कंपाउंड के निकट नौ अवैध इमारतें खड़ी हैं। इनमें से कुछ खतरनाक स्थिति में पहुंच गई हैं। वहीं वर्ष २०१४ में लकी कंपाउंड इमारत जैसी कोई दूसरी दुर्घटना फिर से न घटित हो इसलिए मुंब्रा निवासी संतोष भोईर समेत कई लोगों ने एड. नीता कर्णिक के माध्यम से मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। कल इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता और न्यायाधीश मकरंद कर्णिक की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायालय ने अवैध निर्माण के मुद्दे पर उंगली उठाते हुए सरकार को जमकर लताड़ा। इस बीच न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि वर्ष १९९८ के शासनादेश के अनुसार बारिश में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसलिए कार्रवाई के लिए पहुंचे ठाणे मनपा के अधिकारियों को वहां के निवासियों ने शासनादेश की कॉपी दिखाकर बैरंग वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। इसमें खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेप किया। खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या बारिश में इमारत जमींदोज करना सही में खतरनाक है? यह अध्यादेश जारी करने के पीछे सरकार का वास्तविक तर्क क्या है? ऐसे सवाल करते हुए खंडपीठ ने शासन को फटकार लगाई।

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