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बीमारी हुई महंगी … पांच सालों में इलाज पर दोगुना हुआ खर्च …संक्रामक रोगों के लिए ३० से ८० हजार पहुंचा मेडिक्लेम

सामना संवाददाता / मुंबई
अस्पतालों में भर्ती होने की आवश्यकता वाली सामान्य बीमारियों के इलाज की लागत पिछले पांच वर्षों में दोगुनी हो गई है। यह अचंभित करने वाली जानकारी बीमा दावों के आंकड़ों से सामने आई है। इसके अलावा संक्रामक रोगों और श्वसन संबंधी विकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा दावे तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें बताया गया है कि संक्रामक रोगों के लिए पहले मेडिक्लेम ३० हजार तक होता था, लेकिन अब वह बढ़कर ८० हजार तक पहुंच गया है।
संक्रामक रोगों के लिए औसत स्वास्थ्य बीमा दावा २०१८ में २४,५६९ रुपए था, जो २०२२ में ६४,१३५ रुपए तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी १६० फीसदी से भी ज्यादा है। यह ‘पॉलिसी बाजार’ के आंकड़ों से साफ हो रहा है। मुंबई जैसे शहरों में तो ये रकम इससे भी ज्यादा है। यहां संक्रामक रोगों का औसत दावा ३०,००० रुपए से बढ़कर ८०,००० रुपए हो गया है। श्वसन संबंधी विकारों के लिए औसत दावा ४८,४५२ रुपए से बढ़कर ९४,२४५ रुपए हो गया है। हालांकि, मुंबई में यही दावा ८०,००० से १,७०,००० तक पहुंच गया है।
खड़ी हुई बड़ी समस्या
पॉलिसी बाज़ार के मुख्य व्यवसाय अधिकारी अमित छाबड़ा का कहना है कि कोरोना के बाद उपभोक्ता वस्तुओं की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले यह आंकड़ा कुल बिल का तीन से चार फीसदी था। लेकिन अब यह १५ प्रतिशत तक पहुंच गया है। उपचार की बढ़ती लागत के कारण हर पांच साल में स्वास्थ्य बीमा कवरेज अपर्याप्त होता जा रहा है। मेडिकल खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद कॉरपोरेट कंपनियां सिर्फ तीन लाख तक का ही बीमा कवरेज देती हैं। ऐसे समय में जो लोग कॉर्पोरेट बीमा कवर पर निर्भर हैं, उनके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
चिकित्सा महंगाई में सामान्य दर से हुई अधिक वृद्धि
नई दवाओं, इलाज के तरीकों और इंटरनेट के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण उपचार महंगे होने लगे हैं। इसके कारण चिकित्सा महंगाई में सामान्य दर से अधिक की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं की मांग और उपयोग बढ़ जाता है। इसके चलते चिकित्सा खर्च भी बढ़ जाता है। नागरिकों को अक्सर विभिन्न प्रकार के परीक्षणों से गुजरने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसलिए इसकी और इसके बाद संबंधित उपचार की लागत बढ़ जाती है।
मोतियाबिंद के उपचार के खर्च में हुई कम वृद्धि
मोतियाबिंद के इलाज की लागत तेजी से नहीं बढ़ी है। यह औसत लागत ७८,३२५ से १,२०,००० हो गई है। ऐसा कहा जाता है कि आधुनिक उपचार के कारण मरीजों का अस्पताल में रहना कम होने के कारण लागत में बहुत तेजी से वृद्धि नहीं हुई है।

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