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मैं किसी से नहीं डरती! : फरमानी नाज

‘हर हर शंभू’ गाकर गायिका फरमानी नाज ने आफत मोल ले ली है। वे एक यूट्यूबर सिंगर हैं, जिनकी आवाज के लाखों-करोड़ों फैंस हैं पर मुस्लिम उलेमा फरमानी पर भड़के हुए हैं। उलेमाओं की बड़ी फौज इस समय उनके पीछे पड़ी हुई है, लेकिन फरमानी नाज भी डटी हुई हैं, किसी से डर नहीं रहीं, बल्कि डटकर मुकाबला कर रही हैं। पेश है डॉ. रमेश ठाकुर द्वारा उनसे की गई बातचीत के प्रमुख अंश –

  • ताज्जुब होता है, सिर्फ एक भजन गाने से ही मौलानाओं की फौज आपके पीछे पड़ गई?
    तरस आता इनकी सोच पर। सिर्फ गाना गाया है, जो मेरा पेशा है और शौक भी। इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देंगे उलेमा, इसका जरा भी इल्म नहीं था मुझे। मेरी आड़ लेकर अपने को समाज में चमकाना चाहते हैं ये लोग। किस धर्म की किताब में लिखा है कि एक गायक सिर्फ अपने धर्म के लिए ही गाए। अगर मुझे दिखा दें तो जैसा ये लोग गाने को कहेंगे मैं गाऊंगी। पर ऐसा कहीं लिखा नहीं है। कलाकार परिंदों की तरह होते हैं, उन्हें जाति, धर्म, पंथ, समुदाय से मतलब नहीं होता। आजाद पक्षियों की तरह होते हैं जिन्हें किसी सरहद की दीवारें भी नहीं रोक पातीं, फिर इनकी औकात ही क्या, जो मेरी गायकी पर फतवा निकाल सकें , मैं नहीं डरती इनसे।
  • लगता है आपने अंत तक लड़ने और मुकाबला करने का मन बनाया हुआ है?
    बात अधिकार की है, मुकाबले की कोई बात ही नहीं? मैं अपने हक के लिए लड़ रही हूं। जब मैं भूखी रहती थी, मांगने की नौबत थी। पति छोड़कर चला गया था। बिना बताए, बिना सूचना के दूसरी औरत से शादी कर ली थी, तब ये मौलाना कहां चले गए थे? तब मैं खुद इनके पास गई थी अपनी वाजिब समस्या लेकर, लेकिन समाधान तो दूर इन्होंने मेरी बात तक नहीं सुनी? आज मुझे मजहब का ज्ञान देने में लगे हैं। मैं खबरदार करना चाहती हूं, ऐसे लोगों को मेरे करियर में रोड़ा न डालें। मुझे आजादी से जीने दें, मुझे मेरा दायरा और सीमा पता है।
  • कब से गाती हैं आप?
    बचपन से गाने का शौक था। गांव की मंडली, चौपालों, शादी-ब्याहों आदि से गाने की शुरुआत हुई। बसों-रेलगाड़ियों में भी गाया। प्रोफेशनल  तौर पर स्थापित होने के लिए मेरे पास संसाधन नहीं थे। मेरा भाई भी मेरे साथ गाता है। हमारे पास सिर्फ एक ढोलक है, जिसे हमारे साथी भूरा भाई बजाते हैं। तीन लोग मिलकर ही हम अभी तक गाते-बजाते आए हैं। अब जाकर एक स्टूडियो बनाया है, जहां गाना रिकॉर्ड करते हैं। कुछ एलबम भी बनाए हैं। गायन को लेकर अब ऑफर भी मिलने लगे हैं।
  • आपकी गायकी किन-किन विधाओं में है?
    सभी किस्म की विधाओं में मैं गाती हूं। कव्वाली, गजल, कजरी, भजन आदि। कहीं से सीखा नहीं और न ही किसी से प्रशिक्षण लिया। बस कुदरती है। गांववाले भी एतराज करते थे। कहते थे, ये काम चौका-चूल्हा करनेवाली औरतों के लिए नहीं है। बड़े लोगों का शौक है। तरह-तरह की बातें करते थे। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि मैंने अभी तक क्या-क्या सहा है जिंदगी में। लोगों की गालियां खाईं। ताने सुने, मेरे मासूम बीमार बेटे को भी लोग बुरा-भला कहने से नहीं चूकते थे। पड़ोसी अपने बच्चे तक उनके पास खेलने के लिए नहीं भेजते थे।
  •  बढ़ते विवाद से कहीं डर तो नहीं जाएंगी?
    किस बात का डर? मैंने कोई गुनाह थोड़े न किया है। आज महिलाएं सशक्त हुई हैं, माहौल मिल रहा है। अपने पैरों पर खड़ी होकर अपना करियर बना रही हैं। खासकर मुस्लिम कट्टरपंथियों को यही बुरा लग रहा है। देखिए, मैं अपने हुनर के बल पर आगे बढ़ रही हूं। कभी किसी धर्म का अपमान नहीं किया और न ही ऐसी मंशा रही। जिंदगी दुखों के साए में बीती है। शादी के कुछ वर्ष बाद पति ने छोड़ दिया फिर ससुराल वालों ने छोड़ा। पति ने बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली। इस पर कभी किसी ने मेरा दुख नहीं समझा, उल्टा मुझे ही कसूरवार समझा। आज मैं कामयाब हो रही हूं, तब भी उन्हें बर्दाश्त नहीं होता।
  • इंडियन आइडल में भी आपने परफॉर्मेंस दिया है?
    सच बताऊं तो असली पहचान तो वहीं से मिली थी। वरना मुझे कोई जानता तक नहीं था। अपने गृह जिले मुजफ्फरनगर के आसपास तक ही पहचान सीमित थी। आज मेरे यूट्यूब पर लाखों की संख्या में फैन हैं। वे मेरे गाए सभी गानों को पसंद करते हैं। फरमाइश भी करते हैं। ऊपरवाले से दुआ करूंगी, अल्लाह ताला मुझे इस विवाद से जल्दी निजात दिलवाए।

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