-ईमान-

धरती संकट में समंदर भी परेशान
गगनचुंबी इमारत बन गयी शान।
बुदबुदाते बदहवास से सब परेशान
मसरूफ रहे खोजे पानी की खान।
खुसर-पुसर पगडंडियों पर जवान
मध्य युग निकले पड़े सभी महान।
पुराने किवाड़ के दिख रहे निशान
जस का तस बन गयी हैं पहचान।
ऊँची ढलानों पर बन गये मकान
बारी-बारी चले गये सभी मेहमान।
बेहतर याद रहा नफा और नुकसान
भूख और प्यास का भी होता ईमान।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
ए-305 ओ.सी.आर. बिल्डिंग
विधानसभा मार्ग, लखनऊ-226001

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