मुख्यपृष्ठनए समाचारवसई-विरार मनपा अंतर्गत 14 हजार 169 मूर्तियों का हुआ विसर्जन

वसई-विरार मनपा अंतर्गत 14 हजार 169 मूर्तियों का हुआ विसर्जन

– 8 हजार 937 मूर्तियों का कृत्रिम तालाब में किया गया विसर्जन

राधेश्याम सिंह / वसई

इस वर्ष भी नागरिकों ने पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव मनाने के लिए वसई-विरार शहर मनपा द्वारा क्रियान्वित कृत्रिम तालाब का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। बुधवार को शहर में कुल 14 हजार 169 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें से 8 हजार 981 मूर्तियों को कृत्रिम तालाब में विसर्जित किया गया।
इन कृत्रिम तालाबों में मूर्तियों को खदान तालाबों और समुद्र में अनुष्ठानपूर्वक विसर्जित किया गया। दिलचस्प बात यह है कि महानगरपालिका की अपील के जवाब में इस वर्ष नागरिकों ने शाडुमती की मूर्तियों को प्राथमिकता दी थी। गणेशोत्सव का त्योहार मनाते समय वसई-विरार मनपा पर्यावरण को संरक्षित करने और त्योहार की पवित्रता को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस वर्ष भी महानगरपालिका ने पर्यावरण अनुकूल गणेश उत्सव के लिए ‘इको गणेश 2023’ की अवधारणा को लागू किया है। इसके लिए मनपा आयुक्त अनिल कुमार पवार ने नागरिकों से कृत्रिम तालाब बनाने और शाडुमती मूर्तियों का उपयोग करने की अपील की थी। इसके लिए पिछले माह से ही विभिन्न माध्यमों से जनजागरूकता फैलाई जा रही थी।
महानगरपालिका की इस अपील का नागरिकों ने अच्छा प्रतिसाद दिया। बुधवार को शहर में डेढ़ दिन तक कुल 14 हजार 169 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें से 8 हजार 937 घरेलू गणेश मूर्तियों कृत्रिम तालाबों में व 44 सार्वजनिक मूर्तियों का विसर्जन किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कृत्रिम तालाबों में गणेश प्रतिमा विसर्जन की संख्या में वृद्धि हुई है। बाकी बचे 5 हजार 188 मूर्तियों को प्राकृतिक झीलों और समुद्र में विसर्जित कर दिया गया। इनमें से अधिकांश मूर्तियां शाडु मिट्टी से बनी थीं। इससे प्राकृतिक तालाब प्रदूषित नहीं हुए। कृत्रिम तालाबों का यह दूसरा वर्ष था। दूसरे वर्ष में कुल प्लास्टर ऑफ पेरिस की 64 प्रतिशत मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया गया। वसई-विरार शहर मनपा ने 58 स्थानों पर 105 कृत्रिम झीलों का निर्माण किया था। नागरिकों की सुविधा के लिए प्रत्येक कृत्रिम तालाब की जियो-टैगिंग की गई और नागरिकों को जानकारी दी गई। ताकि नागरिक आसानी से अपने घरों के पास कृत्रिम तालाबों तक पहुंच सकें।
श्रद्धालुओं को कृत्रिम तालाब के पास विधिवत आरती करने की सुविधा प्रदान की गई। आरती के बाद प्रतिमाओं को मनपा की कृत्रिम तालाब में प्रतीकात्मक रूप से विसर्जित किया गया। वसई-विरार शहर मनपा के सभी उपायुक्त, सहायक आयुक्त और कर्मचारी वार्डवार विसर्जन स्थलों पर उपस्थित हुए और विसर्जन की योजना बनाई। नागरिकों की सुविधा के लिए प्रत्येक कृत्रिम झील और विसर्जन स्थल पर टेंट, फिरते शौचालय और लैंप की व्यवस्था की गई थी। साथ ही श्रद्धालुओं की मदद के लिए मनपा के कर्मचारी और स्वयंसेवक तैनात किये गये थे। प्रत्येक कृत्रिम तालाब के पास एक निर्माल्य कलश रखा गया था। फूल-मालाओं को एकत्र करके खाद बनाया जाएगा। कृत्रिम तालाब में विसर्जित की गई मूर्तियों को बगल के मंडप में रखा गया और फिर तुरंत विसर्जन के लिए 46 महानगरपालिका के ट्रकों में भरकर पत्थर की खदान और समुद्र में लेकर गए। वसई के किलाबंदर समुद्र, विरार के नारिंगी में मारंबलपाडा खाड़ी और वलईपाड़ा और राजावली में बंद पत्थर खदानों के पानी में ले जाकर मूर्तियों को विसर्जित करने के सुविधाएं प्रदान की गईं। गुरुवार की सुबह 4:30 बजे तक खदान में सभी मूर्तियों का विसर्जन कर दिया गया। मनपा आयुक्त अनिल कुमार पवार के मार्गदर्शन में उपायुक्त नानासाहेब कामठे, उपायुक्त समीर भुमकर, प्रभारी सहायक आयुक्त विश्वनाथ तलेकर पत्थर खदान और समुद्र में विसर्जन स्थल पर मौजूद रहकर विसर्जन का जायजा लिया।
डेढ़ दिन के लिए गणपति विसर्जन- 2023
कृत्रिम तालाब –
घरेलू- 8 हजार 937
सार्वजनिक – 44
प्राकृतिक तालाब एवं घाट
घरेलू- 5 हजार 104
सार्वजनिक – 84
कुल- 14 हजार 169
प्रतिशत- 64 %

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