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शिवसेना विधायकों की मांग का असर, गोराई-चारकोप में म्हाडा भवनों पर लगाया गया बाजार मूल्य कर होगा समाप्त!

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई के उपनगर गोराई-चारकोप में म्हाडा इमारतों और अवैध फ्लैटों के बाजार मूल्य पर वसूले जानेवाले ग्राउंड कर को रद्द किया जाए, ऐसी मांग शिवसेना विधायकों ने कल गृह निर्माण मंत्री अतुल सावे से की। इस पर कार्रवाई करने का निर्देश सावे ने म्हाडा के उपाध्यक्ष को दिया।
३० साल बाद नवीनीकरण करते समय २५ साल के लिए प्रीमियम का २.५ प्रतिशत ग्राउंड कर वसूलने के म्हाडा के संभावित प्रस्ताव से गोराई-चारकोप की म्हाडा कॉलोनी में रहनेवाले आम मध्यमवर्गीय परिवारों में डर पैâल गया है। इस संबंध में कल शिवसेना विधायकों ने गृह निर्माण मंत्री से मुलाकात कर निवेदन दिया।
विश्व बैंक परियोजना के तहत, गोराई-चारकोप में म्हाडा भवनों और आवासीय फ्लैटों के निर्माण के लिए ९० वर्षों के लिए ग्राउंड लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के अनुसार, म्हाडा प्राधिकरण के साथ प्रत्येक संगठन के समझौते में यह शर्त थी कि समझौते को ३० वर्षों के बाद नवीनीकृत किया जाएगा। इसके अलावा स्क्वैटिंग फ्लैटों के लिए एक रुपया का मामूली ग्राउंड कर वसूला जाता था।
अब कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करते समय ३० साल की जगह पांच साल बाद रिन्यू किया जाए और म्हाडा के २५ फीसदी शेयरों के प्रीमियम का ढाई फीसदी बाजार मूल्य के हिसाब से लिया जाए, वहीं म्हाडा ने प्रस्ताव दिया है कि यह टैक्स वर्ष २०१६ से वसूला जाना चाहिए। राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय या परिपत्र जारी नहीं किया है। इस पैâसले से म्हाडा कॉलोनी में रहनेवाले आम मध्यम वर्ग के निवासियों को ग्राउंड कर के तौर पर १ रुपया की जगह १,१५३ रुपए चुकाने होंगे। इससे क्षेत्रवासियों में चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है।

मुंबई में डॉक्टरों की हड़ताल का तुरंत समाधान निकालें!

शिवसेना की मांग

अपनी मांगों को लेकर मुंबई के केईएम, सायन और नायर अस्पताल के दुर्घटना विभाग के डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों को परेशानी हो रही है। इन अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं और साथ ही दुर्घटना के शिकार लोगों को भी भर्ती किया जाता है, इसलिए शिवसेना विधायक सुनील शिंदे ने मांग की कि सरकार को हड़ताली डॉक्टरों से तुरंत चर्चा करनी चाहिए। विधान परिषद में औचित्य के मुद्दे के माध्यम से शिंदे ने उक्त मुद्दा उपस्थित किया।

मुंबई को कम फंडिंग!

मुंबई मनपा ने मुंबई के सभी २४ विभागों के फंड में पिछले साल की तुलना में कटौती कर दी है। शिवसेना विधायक सुनील शिंदे ने विधान परिषद में स्थगन प्रस्ताव के जरिए मांग की कि यह मुंबईकरों के साथ घोर अन्याय है और इस गंभीर मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपनगरों को मुंबई शहर की तुलना में कम फंडिंग मिल रही है। प्रजा फाउंडेशन और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट से स्पष्ट है। मुंबई मनपा में प्रशासक द्वारा शासन के तहत सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच धन आवंटन में भेदभाव किया गया। अब इस रिपोर्ट से पता चला है कि फंड वितरण विभाग में भी असमानता है। रिपोर्ट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खेल के मैदानों और मैदानों, सड़कों, पुâटपाथों, बाजारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए प्रत्येक विभाग में मनपा द्वारा प्रदान की गई धनराशि का उल्लेख किया गया है। विधायक शिंदे ने सभागृह में कहा कि उपनगरों की आबादी शहर से ज्यादा बढ़ गई है और बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ते तनाव के कारण ज्यादा पंâड की जरूरत है। उपसभापति ने निर्देश दिया कि सरकार इस स्थगन प्रस्ताव पर बयान दे।

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