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लड़कियों की जन्मदर में हुआ सुधार…लिंगानुपात बढ़ाने को होगा अन्य राज्यों की योजनाओं का अध्ययन

स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे की घोषणा
सामना संवाददाता / मुंबई । दुनियाभर में जहां लिंगानुपात बढ़ रहा है, वहीं महाराष्ट्र में लड़कियों की जन्मदर बढ़ने से लिंगानुपात में सुधार हो रहा है। राज्य में वर्ष २०१५ में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की जन्म दर ९०७, वर्ष २०१६ में ९०४, २०१७ में ९१३, २०१८ में ९१६ थी, जो कि वर्ष २०१९ में ९१९ पहुंच गई। इसमें और सुधार के लिए राज्य में गर्भ लिंग निदान करनेवाले केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके साथ-साथ लड़कियों की जन्मदर बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों में लागू की गई योजनाओं का अध्ययन भी किया जाएगा। जिन राज्यों में अच्छा कार्य किया जा रहा है, उस पर अमल किया जाएगा। विधानसभा में कल ऐसी घोषणा स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने की।
शिवसेना विधायक तानाजी सावंत व अन्य विधायकों ने यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान उठाया था। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री टोपे ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए गर्भावस्था और प्रसव पूर्व निदान (लिंग चयन रोकथाम) अधिनियम पीसीपीएनडीटी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिलाधिकारी के साथ-साथ राज्य पर्यवेक्षी बोर्ड प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। पीसीपीएनटीडी एक्ट के तहत २० जनवरी से २८ फरवरी के बीच प्रदेश में १०,३७२ सोनोग्राफी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। १८१ जगहों पर कानून का उल्लंघन पाया गया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। राज्य में कुल ५,९२७ गर्भपात केंद्रों (एमटीपी केंद्रों) का निरीक्षण किया गया है और ७३ केंद्रों को कानून का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। उन्होंने बताया कि १५ केंद्रों को बंद कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री टोपे ने कहा कि जिन राज्यों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की औसत दर ज्यादा है, वहां से जानकारी मंगाकर उनकी योजनाओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बेटियों के जन्म और विवाह के मौके पर आर्थिक मदद देने पर भी विचार करेगी, ताकि राज्य में इसे एक हजार लड़कों पर एक हजार लड़कियों की आदर्श स्थिति तक पहुंचाया जा सके। स्वास्थ्य मंत्री टोपे ने कहा कि पुरुष प्रधान मानसिकता और विवाह पर होनेवाले खर्च के कारण कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं। अगर हमें देश की तुलना में लड़कियों की जन्मदर को बढ़ाना है तो कानून को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। उन्होंने पहली बेटी के बाद दूसरे की चाहत पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक बच्चे के जन्म के बाद दूसरा बच्चा क्यों चाहिए? राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस की एक-एक बेटियां हैं और वे खुश हैं।
चंद्रपुर में लड़कियों की जन्मदर अधिक
महिला एवं बाल कल्याण मंत्री यशोमति ठाकुर ने अपने लिखित जवाब में जानकारी दी है कि राज्य के चंद्रपुर जिले में लड़कियों की जन्मदर अधिक है। राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक २०१९-२० में चंद्रपुर जिले में एक हजार पुरुषों के मुकाबले ९७४ महिलाएं थीं। पिछले पांच वर्ष में चंद्रपुर जिले में एक हजार लड़कों पर १,०२५ लड़कियों का जन्म हुआ है। इससे पता चलता है कि जिले में लड़कियों की जन्मदर ज्यादा है।

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