मुख्यपृष्ठसमाचार३० साल में दो वर्ष तक घाटी रही बंद! हर चौथे दिन...

३० साल में दो वर्ष तक घाटी रही बंद! हर चौथे दिन कश्मीर में रही हड़ताल

सुरेश एस. डुग्गर / जम्मू
कश्मीर में पिछले ३० सालों में हर चौथे दिन हड़ताल रही है। नतीजतन अब वादी-ए-कश्मीर को वादी-ए-हड़ताल भी कहा जाने लगा है। यह आंकड़ा अलगाववादियों के आह्नान पर होने वाली हड़तालों का है। सरकारी कफ्र्यू तथा अन्य मुद्दों पर हुए कश्मीर बंद को इसमें जोड़ा नहीं गया है। साथ ही ५ अगस्त २०१९ को धारा ३७० को हटाए जाने के बाद की परिस्थितियों व कोरोना कफ्र्यू से हुए बंद व लाकडाउन को इसमें शामिल नहीं किया गया है। कश्मीर में पिछले ३० सालों के १,०५८५ दिनों में से २,६०० दिन हड़तालों की भेंट चढ़ गए और अगर इन हड़तालों के कारण आर्थिक मोर्चे पर होने वाले नुक्सान की बात करें तो अभी तक राज्य की जनता और सरकार को १०.१८ लाख करोड़ की क्षति उठानी पड़ी है। यह अनुमान हड़ताल के कारण प्रतिदिन होने वाले १६१ करोड़ रुपए के नुक्सान की दर से है। ५ अगस्त २०१९ के बाद की बात करें तो सही मायनों में दो सालों तक कश्मीर बंद ही रहा है। पहले धारा ३७० को हटाए जाने की परिस्थितियों के कारण और फिर कोरोना के कारण बंद का नजारा दिखा। यह सच है कि पहले हड़तालों के लिए अलगाववादियों तथा आतंकियों को ही दोषी ठहराया जाता था। कश्मीर में हड़तालों के प्रति एक खास बात यह है कि इसके लिए मरहूम हड़ताली चाचा उर्फ कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सईद अली शाह गिलानी को ही अधिकतर जिम्मेदार माना जाता रहा है, जिनके एक भी आह्नान को कश्मीर में नकारा नहीं गया था।

अन्य समाचार