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५ वर्षों में अमेठी की हो गई दुर्दशा …सड़क नहीं बनी, तो बारातें थम गईं!

ग्रामीणों ने खुद उठाया क्षेत्र के विकास का जिम्मा
योगेंद्र सिंह ठाकुर / अमेठी
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के ग्रामीण, सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए तरसते दिखाई दे रहे हैं। पिछले ५ वर्षों में अमेठी की जबरदस्त दुर्दशा हो गई है। यहां के कई गांवों में सड़क नहीं होने के कारण बारातें थम गई हैं। लोग उन गांवों में अपने बच्चों की शादी नहीं करना चाहते। शासन-प्रशासन कोई नहीं सुन रहा, ऐसे में अब ग्रामीणों ने खुद क्षेत्र के विकास का जिम्मा संभाला है।
मिली जानकारी के अनुसार, सलोन विधानसभा के डीह ब्लॉक की गोपालपुर ग्राम पंचायत का पुरे लक्ष्मी नारायण, पुरे लोहारन और पुरे अहिरन जैसे गांव दो दिशाओं से नदी और नाले से घिरे हुए हैं। इन गांवों में सड़कें नहीं होने की वजह से लड़के-लड़कियों की शादी में परेशानी होती है। रिश्तेदार गांव में आने से हिचकते हैं। यहां तक कि अगर गांव में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उसे बाहर ले जाने के लिए मुश्किलों से जूझना पड़ता है। कोई सुनवाई नहीं होने पर अब ग्रामीण खुद दशरथ मांझी बनकर सड़कों का निर्माण करने में जुट गए हैं।

भाजपाई सांसद-विधायक के राज में विकास ठप्प है!
यह है अमेठी की असलियत

भाजपा हमेशा विकास की बात कहती है, पर अमेठी की हालत ऐसी है कि वहां के कई गांवों में सड़कें नहीं हैं। खास बात यह है कि वहां पर सांसद और विधायक दोनों ही भाजपा के हैं, उसके बावजूद यह हाल है। यहां के कई गांवों में अब तक एक किलोमीटर सड़क का भी निर्माण संभव नहीं हो पाया है, जबकि अमेठी से स्मृति ईरानी भाजपा की सांसद हैं और सलोन विधानसभा से भाजपा नेता अशोक कोरी विधायक हैं। इस क्षेत्र के विनोद यादव, हरिश्चंद्र यादव, लवकुश गौड़, सुमेरे गौड़ आदि निवासियों का कहना है कि ‘गोपालपुर-पुरे लक्ष्मी नारायण-गंगापुर मार्ग’ को बनाने के लिए ग्रामीण केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ शासन-प्रशासन के पास एक अदद सड़क की फरियाद और गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद जब सड़क नहीं बनी तो थक हारकर ग्रामीण हाथ में कुदाल और फावड़ा लेकर अपने दम पर श्रम दान से गांव जाने के लिए सड़क बनाने के लिए निकल पड़े हैं।
तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया, जिसमें गांव के ग्रामीण तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं। गांव तक पहुंचने वाली उबड़-खाबड़ पगडंडी पर मिट्टी डालकर चौड़ी सड़क बना रहे हैं, जिससे जानलेवा सफर से मुक्ति मिल सके।
शादी-ब्याह के लिए रिश्ते नहीं आते
ग्रामीणों की मानें तो पुरे लक्ष्मी नारायण सहित तीन गांवों में आवागमन की सुविधा नहीं रहने से दूसरे इलाके के लोग इस गांव में रिश्तेदारी करना नहीं चाहते। इस कारण गांव के कई युवक-युवतियों का समय पर शादी-विवाह भी नहीं हो पा रहा है। गांव के युवा कहते हैं कि विकास का दंभ भरने वाली सरकार व प्रशासन का कई बार-इस ओर ध्यान आकृष्ट कराने के बाद भी अब तक सड़क व पुल निर्माण कराने को लेकर किसी भी स्तर पर जब कोई दिलचस्पी नहीं दिखी तो हार कर ग्रामीणों ने श्रमदान से सड़क बनाने की पहल की है।

 केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित भाजपा विधायक अशोक कोरी से भी सड़क के निर्माण के लिए कई बार निवेदन किया गया है, लेकिन फंड नहीं मिल सका। ग्रामपंचायत के पास निधि न होने के कारण सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
-राजकुमार सिंह, ग्राम प्रधान गोपालपुर

एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती गांव
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क नहीं बन पाने से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। ग्रामीण कहते हैं कि गांव की गर्भवती महिलाएं और रोगियों को इलाज के लिए काफी मुश्किल से अस्पताल पहुंचा पाते हैं। सबसे अधिक परेशानी तो बरसात के दिनों में होती है, जब नदी और नाले में पानी बढ़ जाता है और गांव से बाहर निकलने के लिए नाले पर बना मिट्टी का बांध कट कर काफी खतरनाक हो जाता है, जिससे गांव का अन्य गांवों से संपर्क टूट जाता है। लोग कहते हैं कि जन प्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों के पास नाले पर पुलिया और गांव तक पहुंचने के लिए सड़क बनाने की मांग करते-करते थक चुके हैं। अंतत: अब ग्रामीण श्रमदान से ही सड़क बनाने के लिए कृत संकल्प हैं।

 

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