मुख्यपृष्ठसमाचारचुनावी साल में तेल के ताल में मशगूल है केंद्र!

चुनावी साल में तेल के ताल में मशगूल है केंद्र!

– कभी मुनाफे का ढिंढोरा तो कभी घाटे का रोना

– बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में १० रुपए प्रति लीटर तक कटौती कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया था कि तेल कंपनियों को चालू वित्त वर्ष की ३ तिमाहियों में करीब २८ हजार करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है।
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान के लिए २०२४ चुनावी साल है। केंद्र की भाजपा सरकार चुनाव जीतने के लिए सारे तिकड़म आजमा रही है। इसके लिए गरीबी दूर करने से लेकर तमाम तरह के आंकड़ों को पेश करके देश की हालत काफी अच्छी बताई जा रही है। मगर इन सबके बीच ऐसा लगता है कि चुनावी साल में केंद्र सरकार तेल का खेल करना चाहती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि तेल कंपनियों के हवाले से जो खबरें बाहर आ रही हैं, उनमें कभी मुनाफा तो कभी घाटे का जिक्र किया जा रहा है। ऐसे में आशंका है कि ग्लोबल मार्वेâट में कच्चे तेल की महंगी कीमत और घाटे का बहाना बनाकर सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती है।
अभी हाल ही में खबर आई थी कि देश की तेल कंपनियों को शानदार मुनाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के रिजल्ट बता रहे हैं कि तीनों प्रमुख तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम को अच्छा-खासा मुनाफा हुआ है। इसमें एचपी को ७४३ करोड़, आईओसी को ९,२२४.८५ करोड़ रुपए और बीपी को ३,१८१ करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। इस तरह की खबरें आने के बाद से इन सबकी बाजार साख काफी मजबूत हो गई। इसके तुरंत बाद खबर आती है कि डीजल में तो घाटा हो रहा है। अब सवाल है कि सरकार ने तो कहा था कि पेट्रोल-डीजल के भाव रोजाना के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और कंपनियों के घाटे-मुनाफे को ध्यान में रखकर कम-ज्यादा किया जाएगा। पर यदि आप नजर डालें तो सरकार ने पिछले कई महीने से पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई कमी या बढ़ोतरी नहीं की है। बल्कि एक खबर तो ऐसी भी आई थी कि चुनावी साल में सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों में १० रुपए तक की कमी कर सकती है। ऐसे में अब आम जनता तो कन्फ्यूजन में है कि आखिर सरकार करना क्या चाहती है?
बहरहाल, पेट्रोलियम सेक्‍टर के बड़े अधिकारियों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘पेट्रोल पर मुनाफे में कमी आने और डीजल पर घाटा होने से पेट्रोलियम विपणन कंपनियां खुदरा कीमतों में कटौती करने से परहेज कर रही हैं। दूसरी ओर, अप्रैल २०२२ से ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है।’ देश के ९० फीसदी तेल बाजार पर सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का कब्‍जा है। हिंदुस्थान अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए ८५ प्रतिशत आयात पर निर्भर है। जाहिर है कि ग्‍लोबल मार्वेâट में क्रूड महंगा होने का असर भारतीय बाजार पर भी होता है। पिछले साल के अंत में कच्चा तेल नरम हो गया था, लेकिन जनवरी के दूसरे पखवाड़े में यह फिर से चढ़ गया। तेल उद्योग के एक अधिकारी के अनुसार, ‘डीजल पर घाटा हो रहा है, जो अब लगभग ३ रुपए प्रति लीटर पहुंच चुका है। इसके अलावा पेट्रोल पर मुनाफा मार्जिन भी कम होकर तीन-चार रुपए प्रति लीटर रह गया है, जो कुछ समय पहले तक ८ से १० रुपए प्रति लीटर था।’
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बाजार में अस्थिरता है
बाजार विश्‍लेषकों का कहना है कि तेल के दाम आगे बढ़ने की आशंका है। इससे पहले पेट्रोलियम कीमतों में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकार कीमतें तय नहीं करती है और तेल कंपनियां सभी आर्थिक पहलुओं पर विचार करके अपना निर्णय लेती हैं। कंपनियां कह रही हैं कि अभी भी बाजार में अस्थिरता है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में तेल की कीमतों में कुछ उछाल आ सकता है। इससे पहले दिसंबर, २०२३ में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में १० रुपए प्रति लीटर तक कटौती कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया था कि तेल कंपनियों को चालू वित्त वर्ष की ३ तिमाहियों में करीब २८ हजार करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। इसका फायदा आम लोगों को पहुंचाने के लिए कीमतों में कटौती की जा सकती है।

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