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राजनीति में मस्त है ‘घाती’ सरकार… सूबे में नहीं रुक रहे  बाल विवाह!

– तीन किशोरियों ने दिया बच्चों को जन्म…  कागजों पर धूल फांक रहा है कानून

सामना संवाददाता / मुंबई

नासिक जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें जिला अस्पताल में तीन किशोरियों ने बच्चों को जन्म दिया है। डिलिवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराई गर्इं ये तीनों लड़कियां आदिवासी इलाके की हैं। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि यह बालविवाह है अथवा उनके साथ बलात्कार हुआ है। दूसरी तरफ आरोप लग रहे हैं कि घाती सरकार केवल राजनीति में मस्त है, जबकि प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों में धड़ल्ले से बाल विवाह हो रहे हैं। इस प्रथा को रोकने के लिए बनाया गया बाल विवाह कानून कागजों में धूल फांक रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, पिछले पांच दिनों में नासिक जिला सरकारी अस्पताल में तीन नाबालिग ‘माताओं’ की डिलिवरी कराई गई है। बताया जा रहा है कि १९ नवंबर को महज १३ साल ११ महीने और १७ दिन की किशोरी ने एक बच्ची को जन्म दिया। यह नाबालिग किशोरी निफाड तालुका की रहने वाली है। जबकि, दूसरे मामले में पेठ तालुका की रहने वाली १७ साल ११ महीने ९ दिन की नाबालिग गर्भवती किशोरी ने १६ नवंबर को एक बच्चे को जन्म दिया है। वहीं चांदवड तालुका की रहने वाली तीसरी किशोरी ने १३ नवंबर को १६ साल ५ महीने और २० दिन की उम्र में एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय किशोरी का वजन कम होने के कारण उसे चांदवड उप जिला अस्पताल से आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कानून का नहीं हो रहा पालन
एल्गार कष्टकरी संगठन के अध्यक्ष भगवान मधे के मुताबिक, नासिक जिला अस्पताल में तीन नाबालिग लड़कियों ने बच्चों को जन्म दिया है। हालांकि, आदिवासी इलाकों में अभी भी सैकड़ों नाबालिग लड़कियों का बाल विवाह हो रहा है। मैंने खुद पिछले कुछ महीनों में आठ बाल विवाह रोके हैं। लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने में विफल हो रहा है।
बाल विवाह रोकने में सरकार विफल
इन तीन घटनाओं से साफ है कि कानून को सख्ती से लागू नहीं करने के कारण लड़कियों को कम उम्र में मां बनने से रोकने में सरकार नाकाम रही है। पुलिस ने बताया है कि तीनों मामलों में पुलिस ने कानूनी शिकायत दर्ज करने के बाद जन्म देने वाली लड़कियों और उनके माता-पिता के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है।

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