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संकट में संपूर्ण महाराष्ट्र!

गायब हैं ‘एक फुल, दो हाफ’

– घाती सरकार पर जमकर बरसे उद्धव ठाकरे

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में चुनाव आने पर तुम्हारी तिजोरी खुल रही होगी, तब तक महाराष्ट्र की जिम्मेदारी कौन लेगा?’

प्रधानमंत्री को अन्य राज्यों में रेवड़ियां बांटने का समय है, फिर मेरे महाराष्ट्र में किसानों की पीठ पर हाथ रखने के लिए तुम कब आओगे?’

विदर्भ, मराठवाड़ा समेत महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से शुरू बेमौसम की बरसात और ओलावृष्टि के कारण किसानों के मुंह का निवाला छिन गया है। उत्तर महाराष्ट्र में अंगूर और प्याज की फसल हाथ से फिसलती जा रही है। ऐसी विकट परिस्थिति के कारण किसान हताश हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के नियोजन शून्य कामकाज से मुंबई में प्रदूषण का कहर है। संपूर्ण महाराष्ट्र संकट में है, जबकि राज्य के असंवैधानिक मुख्यमंत्री दूसरे राज्यों में दूसरे दलों का प्रचार करने के लिए जा रहे हैं। राज्य रामभरोसे चल रहा है। प्रदेश में सरकार दिख ही नहीं रही। ‘एक फुल, दो हाफ’ सरकार में उपमुख्यमंत्री भी नहीं दिख रहे हैं। इसलिए महाराष्ट्र को संकट में डालकर अन्य राज्यों में प्रचार के लिए जानेवाले राज्य का कामकाज करने के लिए नालायक हैं और ऐसे व्यक्तियों को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। घाती सरकार यानी ‘आपदा का तेरहवां महीना’ है, ऐसा जोरदार हमला करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल घाती सरकार के झूठ की अच्छी तरह से खबर ली।
बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुआ भारी नुकसान
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि मुंबई को छोड़कर पूरे राज्य में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा में करीब एक लाख हेक्टेयर खेती को नुकसान पहुंचा है। कई किसानों और जानवरों की जानें चली गई हैं। उत्तर महाराष्ट्र में ओलावृष्टि से अंगूर के बगीचों और प्याज की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस साल प्याज की बुआई देरी से हुई, इसलिए दिसंबर में होनेवाली प्याज बर्बाद हो गई है। पिछले सीजन में केंद्र की बेहूदा और बेकार नीतियों के कारण प्याज के किसान दिवालियापन पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा अब प्याज की फसल हाथ से निकल गई है।
पद पर बने रहने के योग्य नहीं!
महाराष्ट्र में बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से किसान भारी संकट में फंस गए हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में राज्य के मुख्यमंत्री अन्य राज्यों में रेवड़ियां बांटते हुए घूम रहे हैं। वहीं दो हाफ का पता ही नहीं है। इसलिए जनता यह जानती है कि राज्य में असंवैधानिक सरकार का राज है। अब तो ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि राज्य में सरकार है भी या नहीं। राज्य में किसानों की अनदेखी करनेवाले गद्दार मुख्यमंत्री पद पर बने रहने लायक ही नहीं हैं। इस तरह का जोरदार हमला शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने किया है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने मातोश्री स्थित निवासस्थान पर कल एक पत्रकार परिषद बुलाई थी। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से संवाद साधा। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि जनता के हित के लिए हमें अपनी राय प्रदेश की जनता तक पहुंचाना है। इसीलिए हमने मीडिया को यहां बुलाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में असंवैधानिक सरकार है। हालांकि, अब राज्य में सरकार है या नहीं, इस तरह की स्थिति पैदा हो गई है। मुंबई की बिगड़ी आबोहवा की खबर लेते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में इतना प्रदूषण पहले कभी नहीं देखा गया। इसका मुख्य कारण बेतरतीब विकास कार्य हैं। इससे हर तरफ धूल ही धूल हो गई। इसके समाधान के तौर पर सरकार ने मुंबई में सड़कें धोने और कृत्रिम बारिश कराने की घोषणा की। उनके पास सब कुछ कृत्रिम है, लेकिन वे बारिश नहीं करा सके। हालांकि, सौभाग्य से मुंबई में बारिश हुई है और प्रदूषण कुछ हद तक कम हुआ है।
दूसरों का घर संभाल रहे मुख्यमंत्री
राज्य की परिस्थिति इतनी खराब होने के बावजूद मौजूदा अवैध मुख्यमंत्री अपना घर छोड़कर दूसरे लोगों के घर संभाल रहे हैं। आज मुख्यमंत्री कहां हैं? अब वे तेलंगाना चले गए हैं। उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि सवाल यह है कि वे वहां किस भाषा में और क्या प्रचार करेंगे? क्या वे सूरत, गुवाहाटी, गोवा की अपनी चोरकट यात्रा में वहां की जनता से क्या कहेंगे? खुद का घर न संभाल पानेवाले ये भुरटे राज्य को न्याय नहीं दे सकते। ‘एक फुल, दो हाफ’ होते हुए भी राज्य की अनदेखी हो रही है। एक फुल दूसरे राज्यों में घूम रहा है। दोनों हाफ कहां हैं, उनका कोई पता ही नहीं? बीते दिनों एक हाफ मध्य प्रदेश, राजस्थान में प्रचार करने गए थे। वे वहां रेवड़ियां बांट रहे थे। दूसरे को डेंगू होने के बाद वे कहां गए, इसकी जानकारी ही नहीं है।
सरकार का उड़ाया उपहास
कुछ दिनों पहले मौसम विभाग ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई थी। उस पर कैबिनेट ने क्या किया? कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने घोषणा की थी कि अगर किसानों के खाते में फसल बीमा योजना की अग्रिम राशि जमा नहीं की गई तो दिवाली नहीं मनाई जाएगी, लेकिन वे दिवाली में दिखे ही नहीं। वे कहां पटाखे फोड़ रहे थे, इसकी जानकारी नहीं है। किसानों को फसल बीमा की अग्रिम राशि मिली है क्या, यह सवाल है। कुछ लोगों का सरकार ने उपहास किया है। कुछ को सिर्फ २० रुपए का चेक मिला है। यही सरकार का कामकाज है क्या, इस तरह का नाराजगी भरा सवाल भी उन्होंने पूछा।
चुनावी रेवड़ी बांट रहे भाजपा नेता
अपनी कुर्सी बचाने के लिए वे दिल्ली दौड़ते हैं और इस बारे में बात करने पर गला फाड़ते हुए गद्दार मुख्यमंत्री खुद को गरीब किसान का बेटा बताते हैं। वे किसानों का सम्मान करते हैं, लेकिन वे फाइवस्टार खेती करनेवाले किसान के खेत में हेलिकॉप्टर से जाते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसी खेती और वैभव प्रदेश के छोटे किसानों को भी मिले। गरीब किसान कीचड़ भरी मिट्टी में चलकर खेतों में जाते हैं। रात में खेतों में सिंचाई करने जाते हैं, बिजली नहीं होने के कारण उन्हें बिच्छू डंक मारते हैं। ऐसा पांच सितारा खेती में नहीं होता है। किसान के बेटे को किसानों की चिंता क्यों नहीं होनी चाहिए?
दूसरे राज्यों में चुनाव हैं, इसलिए भाजपा वाले वहां रेवड़ी बांट रहे हैं। इस बारे में चुनाव आयोग से पूछा गया है। उन राज्यों में वे दर्शन देते हुए घूम रहे हैं। मगर उनका दर्शन यहां के किसानों को कब होगा? महाराष्ट्र में चुनाव आने पर वे तिजोरी खोल देंगे, लेकिन तब तक किसानों और आम लोगों की हालत खराब हो जाएगी, उसकी जिम्मेदारी वे लेंगे या नहीं, ऐसा सवाल उद्धव ठाकरे ने पूछा।
सवालों की लगाई बौछार
उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पास दूसरे राज्यों में प्रचार करने, रेवड़ी बांटने का समय है, लेकिन प्रदेश के किसानों की पीठ पर हाथ रखने के लिए वे कब आएंगे? दूसरों के घरों में वे जा रहे हैं, लेकिन वे अपने घर की ओर कब ध्यान देंगे? वे किसके राज्य में जा रहे हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन राज्यों में मुख्यमंत्री नहीं हैं? प्रधानमंत्री विश्वगुरु के होते हुए आप वहां कौन- सी रोशनी जलाएंगे? राज्य के किसानों की आप मदद कब करेंगे? इस तरह के सवालों की उद्धव ठाकरे ने बौछार लगा दी।
जनता दिखाएगी जगह
हमारी सरकार के दौरान किसानों की मदद की गई थी। अब क्या परिस्थिति है? अब उनके जाने का समय आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनका कोई पता-ठिकाना भी नहीं रहेगा। हालांकि, अब किसानों को मदद की जरूरत है। उन्होंने सरकार को इस पर ध्यान देने की चेतावनी दी। कई किसानों की जानें जा चुकी हैं। बड़ी संख्या में जानवरों की जानें गई हैं, लेकिन सरकार चुप है। राज्य के मुद्दों को छोड़कर जो व्यक्ति दूसरे राज्यों में प्रचार करने जाता है, वह सत्ता संभालने के लायक नहीं है। ऐसे असंवैधानिक मुख्यमंत्री और ढिंढोरा पीटनेवाले भाजपावाले सत्ता में रहने के लायक नहीं हैं।

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