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विघ्नहर्ता की विदाई में ‘जेली’ का विघ्न समुद्री जेली के ‘डंक’ से भक्तों में भय

सामना संवाददाता / मुंबई
मंगलवार से गणेशोत्सव शुरू हो गया है। लोग बड़े धूमधाम से गणेशोत्सव मना रहे हैं। इस बीच गणपति बाप्पा की विदाई भी शुरू हो गई है। उनके भक्त बढ़-चढ़कर उनकी विदाई में शामिल हो रहे हैं। बाप्पा के मूर्ति के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों के अलावा समुद्र में भी भक्त जा रहे हैं, लेकिन यहां समुद्र में गणपति मूर्तियों के विसर्जन के दौरान जेली फिश का डंक भक्तों को सता रहा है। जुहू वर्सोवा जैसे समुद्र तट पर कई भक्तों को जेली और स्टिंग फिश के डंक का अनुभव रहा है, ऐसे में जेली फिश ने मनपा की भी चिंता बढ़ा दी है। समुद्री किनारों पर मनपा ने स्वास्थ्य विभाग की एक टीम तैनात की है। साथ ही लोगों से अपील की है कि समुद्र में जाने से बचें, जरूरी न हो तो न जाएं।
मनपा की टीम तैनात
जेली और स्टिंग फिश के डंक से कुछ लोग बेहोश तक हो जाते हैं तो कुछ तेज जलन से छटपटाते हैं। कइयों को तो भारी इलाज की आवश्यकता पड़ती है, जिसे देखते हुए मनपा ने स्वास्थ्य टीम तैनात की है। एंबुलेंस, डॉक्टर, नर्स और दवाई आदि उपलब्ध है। समय -समय पर अनाउंस भी किया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि गणेश उत्सव के दौरान मूर्ति विसर्जन के लिए कई लोग समुद्र की ओर जा रहे हैं। ऐसे में मनपा से ब्लू बटन जेली फिश और स्टिंग से सावधान रहने की अपील की गई है।

जहरीली हैं ये मछलियां
ब्लू बटन, जेली फिश और स्टिंग फिश समुद्री जीव हैं, जो अरब सागर और हिंद महासागर में पाए जाते हैं। उनके शरीर की सतह पर चुभनेवाले कांटे होते हैं। साथ ही वे डंक भी मारते हैं, जो मानव शरीर में जलन पैदा करते हैं। उसी तरह स्टिंग बड़े जबड़े वाली मछली है, जिसमें कांटेदार रीढ़ की हड्डी और ब्लेड की तरह पूंछ होती है। जब समुद्र में भक्त या पर्यटक गलती से स्टिंग पर कदम रखते हैं तो यह अपने बचाव में पूंछ से उन पर हमला करती है, जिससे गहरा घाव हो जाता है और जलन होती है।

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