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ज्ञानवापी प्रकरण में हिंदू पक्ष को मिला तीस साल बाद व्यासजी तहखाने में पूजा का अधिकार

उमेश गुप्ता / वाराणसी

ज्ञानवापी केस में व्यासजी के तहखाने में पूजा-पाठ करने की जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने इजाजत दे दी है। जिला जज ने अपने आदेश में रिसीवर को निर्देश दिया है कि वह सेटलमेंट प्लाट नंबर 9130 थाना चौक में स्थित भवन के दक्षिण की तरफ बने तहखाना जो कि वाद ग्रस्ते संपत्ति है, वादी तथा काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के द्वारा निर्दिष्ट पुजारी से तहखाने में स्थित मूर्तियों का पूजा व राग भोग कराएं। साथ ही इस उद्देश्य के लिए सात दिन के भीतर लोहे की बाड आदि का उचित प्रबंध करें। बीते मंगलवार को जिला जज ने मामले के दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात अपने फैसले को सुरक्षित रखा था। गौरतलब है कि साल 1993 की तत्कालीन सरकार द्वारा व्यासजी तहखाने में पूजा–अर्चना पर रोक लगा दी गई थी।
सोमनाथ व्यासजी के नाती शैलेंद्र पाठक व्यास ने जिला अदालत में दायर याचिका के जरिए मांग की थी कि साल 1993 से व्यास तहखाने में पूजा–पाठ पर लगी रोक को हटाकर पूजा-पाठ का अधिकार दिया जाए। इसके साथ ही याचिका में दूसरी मांग यह थी कि व्यास तहखाने के आगे लगाई गई बैरिकेडिंग को भी हटा दिया जाए, जिससे की लोग पूजा–पाठ के लिए वहां पहुंच सकें, क्योंकि व्यास परिवार 1993 तक लगातार इस तहखाने में पूजा-अर्चना करता रहा है। इस मांग को लेकर शैलेंद्र पाठक की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी ने उनका पक्ष अदालत के समक्ष रखा था। आपकों बता दें कि बीते 17 जनवरी को जिला अदालत के जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने जिलाधिकारी वाराणसी को ज्ञानवापी में व्यासजी के तहखाने (विवादित संपत्ति) का रिसीवर बनाया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डीएम को निर्देश दिया कि वह तहखाने को अपनी सुरक्षा में लेकर सुरक्षित रखें, उसकी स्थिति को बदलने नहीं दें।

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