मुख्यपृष्ठनए समाचार६ एमआईडीसी और मात्र १२ अधिकारी! ...कैसे होगी ३,००० कंपनियों की निगरानी?

६ एमआईडीसी और मात्र १२ अधिकारी! …कैसे होगी ३,००० कंपनियों की निगरानी?

सामना संवाददाता / ठाणे
हाल ही में डोंबिवली की एक केमिकल फैक्ट्री के बॉयलर में हुए विस्फोट ने सरकार के तंत्र की पोल खोल दी है। इन फैक्ट्रियों की सुरक्षा की जांच करनेवाले अधिकारियों की संख्या काफी कम है। हालत यह है कि ८ एमआईडीसी से जु़ड़ी ३,००० फैक्ट्रियों के लिए मात्र १२ फैक्ट्री इंस्पेक्टर हैं। ऐसे में इस सवाल का उठना स्वाभाविक है कि इतने कम अधिकारियों के साथ इतनी ज्यादा कंपनियों की निगरानी कैसे की जा सकती है? यही वजह है कि अक्सर इन फैक्ट्रियों में इस तरह की दुर्घटनाएं सामने आती रहती हैं।

जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं सरकारी अधिकारी!
मांग के बावजूद सरकार नहीं बढ़ा रही कर्मचारियों की संख्या

फैक्ट्रियों की जांच करनेवाले अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। अगर वे इमानदारी से काम करते तो डोंबिवली की केमिकल फैक्ट्री में बॉयलर फटने जैसा हादसा नहीं होता। इस बॉयलर ब्लास्ट में अब तक १३ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि ६० से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। जांच अधिकारियों की संख्या काफी कम है जबकि उक्त क्षेत्र में फैक्ट्रियों की संख्या काफी ज्यादा है। बार-बार मांग के बावजूद सरकार कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ा रही है, जिससे इन फैक्ट्रियों की सेफ्टी जांच पर असर पड़ रहा है।
वर्तमान में महाराष्ट्र में सत्ता सुख भोग रही ईडी सरकार ने महाविकास आघाड़ी सरकार के आदेश को नहीं बदला होता तो यह हादसा नहीं होता और इतने मासूमों को अपनी जानें नहीं गंवानी पड़ती। इसी कड़ी में एक और चौकानेवाली जानकारी सामने आई आई है कि डोंबिवली क्षेत्र में कुल ३,००० से अधिक ऐसी कंपनियां हैं जिनकी हेल्थ एंड सेफ्टी की जांच करने के लिए केवल १२ अधिकारी (इंस्पेक्टर) हैं। जबकि वहां काफी ज्यादा अधिकारियों की जरूरत है। यदि सरकार ने पर्याप्त अधिकारियों को तैनात किया होता तो यह हादसा नहीं होता और मासूमों की जान नहीं जाती। ऐसे में डोंबिवली दुर्घटना की जिम्मेदार सरकार है, ऐसी बातें लोग कहते नजर आ रहे हैं।
बता दें कि गत गुरुवार के दिन डोंबिवली एमआईडीसी फेज २ में एक फैक्ट्री के रिएक्टर में विस्फोट के कारण हुई १३ मौतें औद्योगिक सुरक्षा के प्रति सरकार की लापरवाही को उजागर करती हैं। दरअसल डोंबिवली, भिवंडी, शाहपुर, मुरबाड, अंबरनाथ के छह महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) क्षेत्रों में ३,००० से अधिक औद्योगिक कंपनियों की सुरक्षा जांच और ऑडिट करने के लिए केवल १२ फैक्ट्री निरीक्षक हैं। डोंबिवली एमआईडीसी में ५०० से अधिक औद्योगिक कंपनियां हैं। इनमें १५६ केमिकल फैक्ट्रियां हैं। फैक्ट्री निरीक्षकों का पद औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित है, जिसे विशेष रूप से एमआईडीसी ब्लॉकों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए स्थापित किया गया था।

एक इंस्पेक्टर को करना है ५०० कंपनियों की जांच
इन निरीक्षकों को औद्योगिक सुरक्षा मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में दो बार प्रत्येक औद्योगिक कंपनी की जांच करने का आदेश दिया गया है, लेकिन डोंबिवली-बदलापुर भाग में केवल १२ इंस्पेक्टरोेंं के साथ यह संभव नहीं हैं। प्रत्येक इंस्पेक्टर को प्रति वर्ष ५०० कंपनियों की जांच करनी होती है। वहां पर कई फैक्ट्री आकार में बड़ी हैं, इसलिए उनकी जांच प्रक्रिया में दो से तीन दिन लगते हैं। कल्याण डिवीजन में तैनात एक इंस्पेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभाग में अधिक कर्मचारियों की मांग की गई, पर इस सरकार ने उसे अनसुना कर दिया है। हम राज्य सरकार से अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस बारे में लोगों का आरोप है कि निरीक्षकों ने गलती करने वाली कंपनियों के खिलाफ शायद ही कभी कोई कार्रवाई की। कल्याण निवासी राजू नलावडे, ने कहा, ‘कर्मचारियों की कमी क्षेत्र में आग, रासायनिक रिसाव और विस्फोटों की संख्या में वृद्धि का एक कारण है क्योंकि निरीक्षक शायद ही कभी कारखानों की जांच करते हैं।’ उन्होंने आगे आरोप लगाया कि निरीक्षकों ने उचित सुरक्षा ऑडिट किए बिना मंजूरी देने के लिए रिश्वत ली। डोंबिवली एमआईडीसी, ठाणे जिले के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक, दो भागों में विभाजित है, और आवासीय भवनों के करीब स्थित है। पिछले कुछ वर्षों में, क्षेत्र में आग, रासायनिक और गैस रिसाव और विस्फोट की कई घटनाएं हुई हैं।

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