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साढ़े तीन साल में हुआ रु. ५७,००० करोड़ का जीएसटी झोल! … ६,००० फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट मामलों में ५०० लोग धराए

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश की केंद्र सरकार आम जनता से उसके खून-पसीने की कमाई को जीएसटी के रूप में वसूलती है। साथ ही केंद्र सरकार आए दिन जीएसटी वसूलने को लेकर अपनी पीठ थपथपाती है। दूसरी ओर जीएसटी चोरी के मामले भी सामने आते हैं। अब सवाल यहां ये बनता है कि सरकार जब जीएसटी सिस्टम लाई तो कोई झोल न हो सके, इसके लिए तैयारी क्यों नहीं की। बता दें कि सरकार के गैर जिम्मेदार अधिकारियों की वजह से पिछले साढ़े तीन सालों में ५७ हजार करोड़ रुपए का झोल हुआ है।

गौरतलब है कि जीएसटी चोरी का पता लगाने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस बड़ा अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत विभाग ने बड़े पैमाने पर फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के मामलों का पता लगाया है। डीजीजीआई ने बीते साढ़े तीन वर्षों में ५७,००० करोड़ रुपए जीएसटी चोरी का पता लगाया है और इस मामले में ५०० लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस जीएसटी चोरी को रोकने के लिए बीते तीन वर्षों से स्पेशल ड्राइव चला रही और अप्रैल २०२० से सितंबर २०२३ तक चलाए गए। इस विशेष अभियान में ६,००० फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों का पता लगा है, जिसमें ५७,००० करोड़ रुपए की जीएसटी की चोरी पकड़ी गई है। मौजूदा वित्त वर्ष २०२३-२४ में १४,००० करोड़ रुपए के कुल १,०४० फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों का पता लगा है, जिसमें अब तक ९१ लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जून २०२३ में डीजीजीआई ने देशभर में मास्टरमाइंडों सिंडीकेट्स की पहचान कर उन्हें पकड़ने पर जोर दिया था। एडवांस टेक्निकल टूल्स के जरिए डेटा एनालटिक्स का उपयोग कर जीएसटी चोरी करने वालों की गिरफ्तारी की गई है। ये टैक्स सिंडिकेट अक्सर भोले-भाले व्यक्तियों का उपयोग करते हैं और उन्हें नौकरी, कमीशन, बैंक लोन का लालच देकर उनसे उनका केवाईसी डॉक्यूमेंट ले लेते हैं, जिसके जरिए बिना उनकी जानकारी और सहमति के बगैर फर्जी, शेल फर्म या कंपनियां खोल लिया जाता है। जीएसटी की चोरी को रोकने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ इंटेलीजेंस ने देशभर में अपने खुफिया नेटवर्क को विकसित करती है। इसके बाद जीएसटी चोरी को रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से नए क्षेत्रों में खुफिया जानकारी जुटाती है।

जीएसटी के नाम पर ठगी
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवाकर लागू होने के बाद लोगों को कई तरह के टैक्स से मुक्ति मिलेगी और सामान सस्ते होंगे। सच तो ये है कि जीएसटी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गया। सालों बीत जाने के बाद भी उपभोक्ताओं को जीएसटी अभी तक समझ में नहीं आया है और बाजार में उसके साथ जमकर ठगी होती है। शॉपिंग मॉल हो या फिर किराने की दुकान हर जगह बिलों में हर सामान के लिए अलग-अलग जीएसटी देखकर लोग चकरा जाते हैं। आलम यह है कि कुछ लोग जब महीने के शुरू में पूरे माह का घरेलू सामान लेने पहुंचे तो उन्हें कई-कई मीटर का बिल थमा दिया जाता है। काफी परीक्षण के बाद भी ज्यादेतर लोगों को जीएसटी का फंडा समझ में नहीं आता और ठगा सा मुंह लेकर घर पहुंचते हैं।

जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य
कारोबार आधार वित्तीय वर्ष में आपके कारोबार की सीमा २० लाख रुपए (कुछ मामलों में रु. ४० लाख) से अधिक होने पर जीएसटी एकत्र करना और भुगतान करना होता है। कुछ विशेष श्रेणी राज्यों के लिए सीमा १० लाख है। यह सीमा जीएसटी के भुगतान के लिए लागू होती है। ‘कुल कारोबार’ का मतलब सभी कर योग्य आपूर्ति, मुक्ति की आपूर्ति, वस्तुओं के निर्यात या सेवाओं और एक समान पैन वाले व्यक्ति की अंतर-राज्य की आपूर्ति को सभी भारत के आधार पर गणना करने और करों को शामिल करने के लिए (यदि कोई हो) सीजीएसटी अधिनियम, एसजीएसटी अधिनियम और आईजीएसटी अधिनियम के तहत देय होता है।

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