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समृद्धि पर हादसों में वृद्धि ९ महीनों में ७२९ हादसे, १०१ ने गवाया जान, बस-ट्रक की टक्कर में १२ की मौत, मृतकों में ५ साल की बच्ची भी शामिल

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का महत्वाकांक्षी समृद्धि महामार्ग हादसों का हाईवे कहने को तो बनकर तैयार हो चुका है। इस पर वाहनों का आवागमन भी शुरू है। लेकिन दोषपूर्ण निर्माण के कारण समृद्धि हाईवे पर आए दिन होनेवाले हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह महामार्ग ‘काल के जाल’ के रूप में कुख्यात होता जा रहा है। ऐसा कल एक बार फिर सिद्ध हुआ, जब समृद्धि पर देव-दर्शन करके लौट रहे श्रद्धालुओं की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उक्त हादसे में १२ लोगों की मौत हो गई। इस तरह से इस महामार्ग पर पिछले ९ महीनों में ७२९ भीषण हादसे हो चुके हैं, जिनमें १०१ लोग की मौत हुई थी।
मिली जानकारी के अनुसार, छत्रपति संभाजी नगर में वैजापुर के अगरसाईगांव इलाके में जांबरगांव टोल रोड के पास समृद्धि एक्सप्रेसवे पर शनिवार रात करीब १२.३० बजे हुआ। एक तेज रफ्तार मिनी बस एक कंटेनर ट्रक से टकरा गई। इस हादसे में नासिक के (इंद्रनगर) में रहनेवाले १२ लोगों की मौत, जबकि २३ अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में एक ५ साल की बच्ची भी शामिल है।
ओवर लोड थी मिनी बस
बताया जा रहा है कि निजी बस में करीब ३५ यात्री सवार थे। यह सभी लोग बुलढाणा जिले में सैलानी बाबा दरगाह के दर्शन करके नासिक लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि जंबारगांव टोल प्लाजा के पास बस चालक को अचानक बस से नियंत्रण छूट गया और बस वहां से गुजर रहे कंटेनर ट्रक से टकरा गई। संबंधित वैजापुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि मिनी बस ओवरलोड थी। इसकी क्षमता १७ लोगों को ले जाने की थी, लेकिन इसमें लगभग ३५ यात्री यात्रा कर रहे थे। मृतकों में पांच पुरुष, छह महिलाएं और एक प वर्षीय बच्ची शामिल है। बस चालक ने दावा किया कि ट्रक अचानक वाहन के सामने आ गया। पुलिस ने ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया गया है।

रुकने का नाम नहीं ले रही है दुर्घटनाएं
गौरतलब हो कि समृद्धि महामार्ग पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। बीते साल से घटनाओं को संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इन घटनाओं में काफी लोगों ने अपने घर परिवार के लोगों को खोया है। दिसंबर २०२२ और अगस्त २०२३ तक समृद्धि महामार्ग पर कुल ७२९ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें से ४६ घातक थीं और १०१ लोगों की मौत हो गई। सरकार अपनी आंख कान बंद कर बस मौत को देख रही है।

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