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हाइपरटेंशन का हॉटस्पॉट बना हिंदुस्थान! …दिल-दिमाग और गुर्दे को कर सकता है फेल

आंखों पर भी पड़ सकता है असर
१० में से चार मरीज नहीं कराते जांच
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
हिंदुस्थानियों में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सबसे चौंकानेवाली बात तो यह है कि हाइपरटेंशन से जूझ रहे हर १० में से चार लोग नियमित रूप से अपने रक्तचाप की जांच नहीं कराते हैं। ऐसे लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक के साथ ही किडनी फेल होने का खतरा अधिक होता है। इसके साथ ही या आंखों पर भी अपना असर छोड़ता है। चिकित्सकों के मुताबिक, १८-५५ आयु वर्ग के ४० फीसदी लोग इस बात से अनजान हैं कि आखिरकार वे कब हाइपरटेंशन के शिकार हो गए। चिकित्सकों का कहना है कि जिस रफ्तार से हिंदुस्थान में रोग बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अपना देश धीरे-धीरे हाइपरटेंशन का हॉटस्पॉट बनते जा रहा है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित नेशनल सेंटर ऑफ डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के एक अध्ययन के अनुसार, हिंदुस्थान में १८-५४ आयु वर्ग के १० में से ३ लोग हाइपरटेंशन की जांच नहीं कराते हैं, जबकि ३० फीसदी ने कभी अपने रक्तचाप की जांच नहीं कराई है। लीलावती अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. सीसी नायर ने कहा कि सामान्य स्तर से अधिक होने पर हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर बन जाता है। यह एक खतरनाक स्थिति है, क्योंकि यदि किसी व्यक्ति का बीपी लगातार अधिक रहता है, तो व्यक्ति को सिरदर्द, घबराहट या नाक से खून आना जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है। उच्च रक्तचाप के कारणों में उच्च सोडियम युक्त आहार, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, उम्र, शराब का सेवन, साथ ही कुछ दवाएं और स्लीप एपनिया, मोटापा और धूम्रपान शामिल हैं।
अधिक मिल रहे हाई ब्लड प्रेशर के मामले
मुंबई अपोलो डायग्नोस्टिक्स के राष्ट्रीय तकनीकी प्रमुख और मुख्य रोगविज्ञानी डॉ. राजेश बेंद्रे ने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बड़ी संख्या में लोगों में देखी जा रही है। रक्तचाप रीडिंग किसी व्यक्ति के दिल की धड़कन द्वारा रक्त वाहिकाओं में दबाव को मापती है। सामान्य स्तर से अधिक दबाव को सिस्टोलिक दबाव कहा जाता है और कम दबाव को डायस्टोलिक दबाव कहा जाता है। ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग मशीन व्यक्ति को उसके ब्लड प्रेशर के स्तर को समझने और समय पर उसका इलाज करने में मदद करती है। सिस्टोलिक रक्तचाप ११० से १४० और डायस्टोलिक रक्तचाप ९० से कम होना चाहिए। यदि सिस्टोलिक रक्तचाप १४० से ऊपर है या डायस्टोलिक रक्तचाप ९० से ऊपर है, तो ऐसे व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप माना जाता है।

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