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कर्ज में डूबा हिंदुस्थान! …केंद्र सरकार रु. १६१.१ लाख करोड़, राज्य सरकारें रु. ५०.१८ लाख करोड़ का कर्ज…इंडियाबॉन्ड्स का खुलासा

आरबीआई, सीसीआई और सेबी के आंकड़ों से निकाला निष्कर्ष
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश में विकास के तमाम दावे कर रही है, पर हकीकत में विकास कितना हो रहा है यह तो पता नहीं, मगर देश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। कल आई एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यह खुलासा किया है ‘इंडियाबॉन्ड्स’ ने। इसके अनुसार, हिंदुस्थान इस वक्त करीब २१० लाख करोड़ रुपए के बोझ तले दबा हुआ है।
गौरतलब है कि साल २०२१ में शुरू हुई ‘इंडियाबॉन्ड्स डॉट कॉम’ शेयर बाजार नियामक सेबी में पंजीकृत एक ऑनलाइन बॉन्ड मंच है। उसने यह रिपोर्ट आरबीआई, भारतीय समाशोधन निगम (सीसीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों का संग्रह कर तैयार की है। इसने बताया कि देश का कुल कर्ज चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर २०५ लाख करोड़ रुपए हो गया। बीते वित्त वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही में कुल कर्ज २०० लाख करोड़ रुपए था। इंडियाबॉन्ड्स के सह-संस्थापक विशाल गोयनका ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, ‘केंद्र सरकार का कर्ज सितंबर तिमाही में १.३४ लाख करोड़ डॉलर यानी १६१.१ लाख करोड़ रुपए रहा, जो मार्च तिमाही में १.०६ लाख करोड़ डॉलर यानी १५०.४ लाख करोड़ रुपए था।’ रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार पर १६१.१ लाख करोड़ रुपए यानी कुल कर्ज का सर्वाधिक ५० प्रतिशत से ज्यादा है। इसके बाद राज्य सरकारों की कर्ज में हिस्सेदारी लगभग ५०.१८ लाख करोड़ रुपए है। इसमें कहा गया है कि राजकोषीय व्यय १११ अरब डॉलर यानी ९.२५ लाख करोड़ रुपए है, जो कुल कर्ज का ४.५१ प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कुल कर्ज में कॉरपोरेट बॉन्ड की हिस्सेदारी २१.५२ प्रतिशत थी, जो ५३१ अरब डॉलर (४४.१६ लाख करोड़ रुपए) है।

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