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सेल्फ मेड न्यूक्लियर पॉवर है भारत: आर. चिदंबरम

– HSNC विश्वविद्यालय में यूथ एंड नेशन बिल्डिंग कॉन्क्लेव का आयोजन

सामना संवाददाता / मुंबई

आज पूरी दुनिया में अधिकारिक रूप से 8 परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। इनमें सिर्फ भारत ही एक मात्र ऐसा देश है, जो अपने बलबूते इस रुतबे को प्राप्त किया है। अन्य देशों को जहां एक-दूसरे से किसी न किसी रूप में सहयोग मिला, वहीं उन सबने मिलकर भारत को रोकने का प्रयास भी किया। उक्त उद्गार प्रसिद्ध वैज्ञानिक, देश के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार एवं भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक पद्म विभूषण डॉ. आर. चिदम्बरम ने एचएसएनसी विश्वविद्यालय एवं यूथ 4 नेशन फाउंडेशन के तत्वावधान में 4 अक्टूबर, 2023 को के.सी. कॉलेज में आयोजित यूथ एंड नेशन बिल्डिंग कॉन्क्लेव में व्यक्त किए। पोखरण परीक्षण को सफल बनाने वाले वैज्ञानिकों में से एक प्रमुख नाम डॉ. चिदम्बरम ने विद्यार्थियों से डॉ. होमी जहांगीर भाभा, श्रीनिवास रामानुजम, एस एन बोस और सीवी रमन जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों का उल्लेख करते हुए देश के प्रति समर्पण एवं विशिष्ट कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. होमी जहांगीर भाभा के योगदानों के प्रयासों एवं उनकी दूरगामी सोच की तारीफ करते हुए कहा कि डॉ. भाभा ने देश को न केवल परमाणु शक्ति संपन्न बनाया, बल्कि परमाणविक योजनाओं का एक ऐसा व्यवस्थित एवं संगठित प्रारूप तैयार किया कि उसके बलबूते आज हमारा देश उनके जाने के बाद भी नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय के प्रोवोष्ट डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए राष्ट्र निर्माण का आह्वान किया। डॉ. हीरानंदानी पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी को उल्लेखित करते हुए कहा कि उनका कहना था कि जीवन में हम कभी असफल नहीं होते हैं, क्योंकि फेल का वास्तविक अर्थ है “सीखने का प्रथम प्रयास”। अत: सभी युवा साथियों से मेरा यही कहना है कि असफलता से निराश न हों, असफलता सीखने की पहली सीढ़ी है। पुन: प्रयास करें और सफल होकर स्वयं को साबित करें।
इससे पूर्व विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. हेमलता बागला ने कॉन्क्लेव के प्रारूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एचएसएनसी यूनिवर्सिटी, मुंबई और यूथ 4 नेशन फाउंडेशन युवाओं को क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण विचारों और परियोजनाओं में शामिल करने के लिए एक साथ आए हैं। यह कॉन्क्लेव युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण एवं उनके माध्यम से राष्ट्र निर्माण का आयोजन है। इसके केंद्र में ‘युवा और मिशन भारत @2047’, ‘सांस्कृतिक संप्रभुता और गौरव’, ‘राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य शिक्षा’, एवं ‘डिजिटल युग का नेतृत्व’ जैसी भावनाएं अंतर्निहित हैं।  हम तकनीक-सक्षम दुनिया में नेतृत्व की उभरती अवधारणा का पता लगाएंगे। इसके साथ ही पर्यावरण सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक एवं सजग करने का प्रयास किया जाएगा।
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के चेयरमैन एवं युथ 4 नेशन वाईस चेयरमैन ले. जनरल वीके चतुर्वेदी (रिटा.) ने कहा कि राष्ट्र भक्ति से बढ़ कर कोई भक्ति नहीं। अत: सभी युवा साथियों से मेरा अनुराध है कि वे अपने जीवन में राष्ट्र को सर्वोपरि रखें, क्योंकि राष्ट्रभक्ति से बढ़कर कोई भक्ति नहीं है। राष्ट्रप्रेम सबसे बड़ा प्रेम एवं राष्ट्र सेवा सबसे बड़ी सेवा है। अत: हे मेरे युवा साथियों जब बात राष्ट्र की आए तो राष्ट्र के अलावा सबको और सब कुछ भूल जाओ। आज हम जो कुछ भी हैं वो स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों के योगदानों की बदौलत हैं। इस दो दिवसीय कॉन्क्लेव में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
दो दिवसीय कॉन्क्लेव में राष्ट्र उत्थान की कामना
इस दो दिवसीय कॉन्क्लेव के आयोजन का मूल उद्देश्य राष्ट्र उत्थान की कामना थी, जिसको उपस्थित विद्वानों ने मूर्त रूप दिया। कॉन्क्लेव के पहले दिन आयोजित पैनल डिस्कशन में पूर्व सैन्य अधिकारी कमांडर वी.के. जेटली, कंसलटेंट एवं बैंकर सुदर्शन अल, वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. विजयम रवि ने तथा दूसरे दिन क्रॉसलिंक के सीईओ डॉ. नितीन परब, नीति आयोग के पूर्व सदस्य श्रीराम सिंह एवं ले. कर्नल मनोज सिंहा (रिटा.) ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। इससे पूर्व कोटक महिंद्रा म्युचल फंड के मैनेजिंग एडिटर नीलेश शाह, कै. बीवीजेके शर्मा एवं रिटायर आईएएस आर. एन. प्रासेर ने प्रस्ताविकी प्रस्तुत की, वहीं पैनलिस्ट के रूप में शामिल विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 27 विद्वानों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

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