मुख्यपृष्ठनए समाचारएक महीने में हिंदुस्थान को हुआ २०.६ अरब डॉलर का व्यापार घाटा!

एक महीने में हिंदुस्थान को हुआ २०.६ अरब डॉलर का व्यापार घाटा!

इस साल अप्रैल से ही हिंदुस्थान का निर्यात ३३ से ३४ अरब डॉलर के दायरे में रहा है। यह पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच हिंदुस्थान के निर्यात के मुकाबले काफी कम है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर की अवधि में निर्यात ७ फीसदी घटकर २७८.८ अरब डॉलर रह गया।’

हाल ही में केंद्र सरकार ने हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था के ४ ट्रिलियन डॉलर पार होने की घोषणा की थी। इसके बाद आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सरकार के ५ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि २०२५ तक इस लक्ष्य की प्राप्ति आसान नहीं है। इसके लिए उनहोंने १४ फीसदी के जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य बताया था। राजन की बात में दम भी है क्योंकि शेयर मार्केट के ऊपर-नीचे होते सेंसेक्स से देश की अर्थव्यवस्था को आंकना उचित नहीं है। अब केंद्र सरकार के नए आंकड़े बता रहे हैं कि गत महीने देश से होनेवाले निर्यात में कमी आई है। इस कारण एक महीने में देश को २०.६ अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है।

बता दें कि अक्टूबर में ११ महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ने के बाद नवंबर में हिंदुस्थान के वस्तु निर्यात की वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ गई। इससे वैश्विक मांग में अस्थिरता का संकेत मिलता है। वाणिज्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में निर्यात २.८ फीसदी घटकर ३३.९ अरब डॉलर रह गया। इससे व्यापार घाटा २०.६ अरब डॉलर दर्ज किया गया। त्योहारी मांग के कारण सोने और चांदी के आयात में जबरदस्त वृद्धि के कारण अक्टूबर में व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड ३१.५ अरब डॉलर हो गया था। इस बारे में वाणिज्य सचिव सुनील बड़थवाल ने जोर देकर कहा कि निर्यात में वृद्धि के संकेत अब थम गए हैं और नवंबर में निर्यात का समग्र रुझान सकारात्मक रहा। उन्होंने कहा, ‘वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है, लेकिन हम अभी भी अपनी पकड़ बनाए रखने में समर्थ हैं। व्यापार केवल एकतरफा नहीं होता। उसे वैश्विक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।’ मूल्य के लिहाज से अगस्त को छोड़ दिया जाए तो इस साल अप्रैल से ही हिंदुस्थान से निर्यात ३३ से ३४ अरब डॉलर के दायरे में रहा है। यह पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच हिंदुस्थान के निर्यात के मुकाबले काफी कम है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर की अवधि में निर्यात ७ फीसदी घटकर २७८.८ अरब डॉलर रह गया। हिंदुस्थानी निर्यातकों के संगठन ‘फियो’ के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा कि निर्यात में गिरावट से बढ़ती अनिश्चितता का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक आर्थिक सुधार में सुस्ती की भी झलक मिलती है। उन्होंने कहा, ‘जिंस की कीमतों में साल २०२२ के उच्च स्तर के मुकाबले नरमी ने भी गिरावट में योगदान किया। कई देशों के निर्यात में दो अंकों की गिरावट आई है। पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी दुनियाभर के कारोबारियों और बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है।’ व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की रिपोर्ट के अनुसार, २०२३ में वस्तुओं एवं सेवाओं के वैश्विक निर्यात में ४.५ फीसदी संकुचन दिखने के आसार हैं।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि नवंबर में हिंदुस्थान का वस्तु व्यापार घाटा अप्रत्याशित रूप से कम हो गया। मगर निर्यात का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहने के कारण व्यापार घाटा करीब २० अरब डॉलर रहा। उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि चालू वित्त वर्ष के शेष भाग में मासिक व्यापार घाटा २० से २५ अरब डॉलर के दायरे में रहेगा। इससे वित्त वर्ष २०२४ की तीसरी तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी के करीब २.५ फीसदी पर और चौथी तिमाही में जीडीपी के १.७ फीसदी पर होगा। कुल मिलाकर वित्त वर्ष २०२४ के लिए चालू खाते का घाटा जीडीपी के १.७ से १.८ फीसदी के दायरे में रहने की उम्मीद है।’ नबंबर में पेट्रोलियम एवं रत्न एवं आभूषण को छोड़कर अन्य वस्तुओं का निर्यात २.८ फीसदी संकुचन के साथ २४.३ अरब डॉलर रहा। महीने के दौरान ३० में से १५ क्षेत्रों में हिंदुस्थान की वस्तुओं के निर्यात में संकुचन दिखा।

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