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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उठाया सवाल

-क्या डॉक्टर की हत्या के बाद जागेगी ‘घाती’ सरकार?

-स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को भेजा गया पत्र

सामना संवाददाता / मुंबई

डॉक्टरों की पिटाई और अस्पतालों में तोड़फोड़ का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। १० मई को केरल के एक अस्पताल में डॉ. वंदना दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके बाद केरल सरकार ने तुरंत १७ मई को एक अध्यादेश पारित किया और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून में सख्त प्रावधान किए। हालांकि, घाती सरकार महाराष्ट्र के डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टरों ने सवाल उठाया है कि क्या महाराष्ट्र में किसी डॉक्टर की हत्या के बाद ही ‘घाती’ सरकार जागेगी और नया कानून बनाएगी। उन्होंने यह भी मांग की है कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए तुरंत सख्त कानून बनाया जाए। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भी भेजा है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की पुणे शाखा ने इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने महाराष्ट्र सरकार को यह कहते हुए फटकार लगाई कि पिटाई के डर से डॉक्टर कांपते हाथों से सर्जरी नहीं कर सकते। उसके बाद, हम पुराने कानून में संशोधन करने के बजाय नया कानून बनाना चाहते हैं। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार को समय दें। इस तरह का आग्रह महाधिवक्ता ने १३ जुलाई २०२१ को मुंबई हाई कोर्ट में किया था। हालांकि इसे लेकर दो साल का समय गुजर चुका है। इसके बाद भी घाती सरकार ने कानून में कोई बदलाव नहीं किए हैं। एसोसिएशन की तरफ से कहा गया है कि इस प्रकार पांच वर्षों में १,३१८ हमलावरों में से केवल पांच लोगों को ही सजा हुई है।
न होें ठाणे और नांदेड़ जैसी घटनाएं
ठाणे के चिकित्सा अधीक्षक को पत्रकारों के सामने जवाब मांगने वाले अथवा नांदेड़ में डीन से शौचालय साफ कराने वाले राजनीतिक नेताओं को सरकारी अस्पतालों में गंभीर स्थित में लाए जानेवाले मरीजों की संख्या क्यों बढ़ रही है पहले उसके कारणों का पता लगाना चाहिए। जिस समय निजी अस्पतालों में मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच जाते हैं, उसके बाद मारपीट के डर से उन्हें सरकारी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे समय में तत्काल इलाज मिलने पर उसके बचने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बावजूद डॉक्टरों को पिटाई से बचाना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि ठाणे और नांदेड़ जैसी घटनाएं बार-बार हो सकती हैं। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

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