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आजादी के ठीक पहले मुंबई तट पर…डूब गया था भारतीय ‘टाइटैनिक’! ६९९ लोग डूब गए थे

  • गटारी अमावस्या का दिन था

सामना संवाददाता / मुुंबई
बड़े हादसे गहरा घाव दे जाते हैं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है। ऐसा ही एक हादसा मुंबई में देश को आजादी मिलने से ठीक एक महीने पहले हुआ था। इस हादसे में भारतीय `टाइटैनिक’ डूब गया था। इस घटना में लगभग ६९९ लोग डूब गए थे। १५ अगस्त १९४७ को जब देश स्वतंत्र हुआ तो पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा था। वहीं मुंबई, रेवास, अलीबाग, नंदगांव, मानगांव और आसपास के इलाकों के लोगों के आंखों के आंसू नहीं सूख रहे थे। वे लोग समंदर के किनारों इस उम्मीद में जा रहे थे कि उनके परिजनों के कम से कम शव ही मिल जाएं। आज जब देश आजादी का ७५ वां साल मना रहा है तो उस हादसे को भी ७५ साल पूरे हो रहे हैं। यह देश के समुद्री इतिहास का सबसे बड़ा हादसा था। तारीख थी १७ जुलाई १९४७। गटारी अमावस्या का दिन था। सुबह के ८ बजे थे। एसएस रामदास जहाज मुंबई के लोकप्रिय भाउ चा धक्का से रेवास जाने के लिए तैयार था।
शनिवार के दिन जहाज के रवाना होने से पहले किनारे पर माहौल पूरी तरह से गहमागहमी वाला था। छुट्टी का दिन होने की वजह से भीड़ सामान्य से अधिक थी। सावन से पहले कई लोग गटारी पर अपने घर जाकर चिकन और ताड़ी पीना चाह रहे थे। वहीं कई लोग अलीबाग से रेवास जाने वाले भी थे। जहाज पर मछुआरे और व्यापारी भी सवार हो रहे थे।
जब लाइफ जैकेट पर टूट पड़े
जहाज मुंबई से करीब ७.५ किलोमीटर आगे पहुंचा ही था कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। यात्रियों को बचाने के लिए जहाज पर तिरपाल रखे हुए थे। जैसे ही जहाज आगे बढ़ा तो वह समुद्र में लहरों के ऊफान में फंस गया। तेज हवा के कारण लहर के झोंके से जहाज थोड़ा तिरछा हो गया। धीरे-धीरे जहाज में पानी भरने लगा। इसे देख कर यात्रियों में अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए लाइफ जैकेट लेने में जुट गए। चूंकि जहाज पर सीमित संख्या में ही लाइफ जैकेट थे, ऐसे में वो लोग जो थोड़ी देर पहले एक दूसरे से हंसकर बातचीत कर रहे थे, अब जान बचाने के लिए एक दूसरे से लड़ने लगे। सब अपनी-अपनी जान को बचाना चाहते थे।
तेज लहरों ने लपेटा
उस समय रामदास जहाज गल्स द्वीप के करीब पहुंचा था। तभी एक तेज लहर आई और जहाज को संभलने का मौका नहीं मिला। रामदास जहाज लहर के इस तेज झोंके से पूरी तरह से पलट गया। कई लोग जहाज के तिरपाल में ही फंस गए। ऐसे में जिन लोगों को तैरना आता था वह जान बचाने के लिए पानी में कूद गए। वहीं अधिकतर लोग जहाज के साथ ही पानी में डूब गए। यह हादसा सुबह करीब ९ बजे हुआ। हादसे के समय जहाज पर चार अधिकारी, ४९ खलासी, होटल स्टाफ समेत करीब ६९९ यात्री सवार थे। बताया जाता है कि जहाज के रवाना होते समय करीब ३५ लोग बिना टिकट के भी सवार हो गए थे।

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