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केंद्र सरकार की कमजोरी से उद्योग-धंधे हुए ध्वस्त! ….एक महीने में ११ फीसदी बढ़े ईंधन के दाम

रामदिनेश यादव / मुंबई । कोरोना काल में महामारी और लॉकडाउन से लोग परेशान थे। उससे उबरने का प्रयास कर रहे लोगों को अब केंद्र सरकार की कमजोर नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई मारने लगी है। इन दिनों मौसमी गर्मी से परेशान लोगों का असल में महंगाई से पसीना छूटने लगा है। महंगाई से आंसुओं का आंखों से छलकना भर बाकी रह गया है। महंगाई ने जो दर्द दिया है, वह सहनशीलता की हदों के परे है। पेट्रालियम पदार्थों की कीमतों में एक महीने में लगभग ११ प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि इतनी वृद्धि एक वर्ष में भी नहीं होती। इसके चलते देश के करोड़ों मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों की जिंदगी इन दिनों दिक्कतों में फंस गई है।
रोजमर्रा की जरूरतों, खाने की वस्तुओं से लेकर उपभोक्ता सामान, कपड़े-लत्ते, जूते-चप्पल, प्रसाधन सामग्री, रसोई गैस से पेट्रोल-डीजल तक की कीमतें आसमान छू रही हैं।
उद्योग धंधे ध्वस्त होने को मजबूर
बीते लगभग ढाई वर्षों से कोरोना की मार से कराह रहे लोगों पर महंगाई भी कहर बनकर टूटी है। आश्चर्य और मुसीबत दोनों यह है कि आमदनी और रोजगार के अवसर जस के तस ही हैं। पहले खस्ताहाली में जी रहे लोगों की हालत अब दर्दनाक होने लगी है। कोरोना ने तो लोगों के दो ही वर्ष लिए थे, लेकिन इस महंगाई ने एक दशक पीछे धकेल दिया है। महंगाई घरेलू अर्थव्यवस्था का बजट बिगाड़ कर उद्योग-धंधों को फिर से ध्वस्त करने पर आमादा नजर आ रही है।
रोजमर्रा की चीजें पहुंच से दूर
घर चलाने के लिए लगने वाली रोजमर्रा की वस्तुएं अब पहुंच से दूर होने लगी हैं। सालभर पहले जिस बजट में महीनेभर घर चलता था, अब उस रकम में सिर्फ दो तिहाई खरीदारी ही हो पा रही है। घर में साग-सब्जी, राशन, तेल-पानी, किराया, बच्चों के स्कूल फीस पर ही पूरी आमदनी खर्च हो रही है। महिलाएं अब घूम-फिरने और बाहर खाने के शौक को मार रही हैं। अब लक्जरी लाइफ जीनेवाले लोग अपने मन को दबाने लगे हैं, अपनी इच्छाओं पर लगाम लगाने लगे हैं, ऐसे में अब पारिवारिक और मानसिक तनाव भी बढ़ने लगा है।
नीति-निर्माता भी मूकदर्शक
महंगाई पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार भी हाथ बांधे खड़ी है। केंद्र सरकार के नीति-निर्माता मौन हैं तो रिजर्व बैंक भी इस महंगाई के मामले में मूकदर्शक बनी हुई है। सभी नीति-निर्माता देश की अर्थव्यवस्था से लेकर घर के बिगड़े बजट तक को संभालने में लाचार नजर आ रहे हैं। रेपो दर हो या रिजर्व बैंक की अन्य दरों में उतार-चढ़ाव करने की बजाए आरबीआई के गवर्नर भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
केंद्र के कानों में नहीं रेंगती जूं
उधर महंगाई के लिए जिम्मेदार मानी जा रही केंद्र सरकार की गलत नीतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पर कांग्रेस लगातार हमले कर रही है। लेकिन ढीठ हो चुकी केंद्र की मोदी सरकार के कान में महंगाई को लेकर जूं तक नहीं रेंग रही है। महंगाई वृद्धि में दो अंकों के आंकड़े पार करने वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान और श्रीलंका बदहाली से बदतर स्थिति में पहुंच गए हैं। लेकिन मोदी सरकार इससे भी सबक नहीं ले रही है।
घर तो घर उद्योग-धंधे भी चौपट
पिछले २ सालों में लघु और मध्यम उद्योग के लिए लगने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में लगे पंख से उत्पादन महंगा हो गया है। कॉटन के कच्चे में १०० फीसदी तो लोहे के कच्चेमाल २०० फीसदी महंगे हो गए हैं। भवन निर्माण वस्तुओं में तो अलग ही रिकॉर्ड बनाया है। सरकार एक्सपोर्ट के आंकड़े जाहिर कर खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। जबकि माल ढुलाई के खर्च को वहन करना कंपनियों को भारी पड़ रहा है। डाबर हो या एमएसएमई से जुड़ी कंपनियां सभी की हालात बदतर होती जा रही है।
ऐसे रुकेगी महंगाई की रफ्तार
जानकारों की मानें तो नीति-निर्माताओं को अब फौरन हरकत में आना जरूरी है, रेपो दर हो या रिजर्व बैंक द्वारा कर्ज की दरों में उतार-चढ़ाव, जल्द निर्णय लेने की जरूरत है। केंद्र सरकार की ओर से तमाम तरह के करों में राहत देने की जरूरत है। पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन कर और अन्य कच्चे मालों के ढुलाई पर कर को कम कर उड़ाती महंगाई के पर कतरे जा सकते हैं। अगर अभी नीति-निर्माताओं ने कुछ कदम नहीं उठाए तो महंगाई और तेज होगी।

महंगाई अपने रिकॉर्ड स्तर पर
यूक्रेन और रूस की लड़ाई को महंगाई में तेजी से वृद्धि के लिए एक वजह मानी जा सकती है, तो दूसरी वजह केंद्र की गलत नीतियां भी हैं। जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बिगड़ी अर्थव्यवस्था ने हमारे घर और बाजार की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है। महंगाई दर पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए ७ प्रतिशत के आंकड़े पार हो गई है।

पिछले वर्ष की तुलना में महंगाई
                          अप्रैल २०२१     से            अप्रैल २०२२
रसोई गैस सिलिंडर       ८०० रुपए                    ९५० रुपए
खाद्य तेल (लीटर)        ८० -१२०                     २०० -२२०
सब्जियां (किलो)         ६० से ८०                     १०० से १२०
ब्रांडेड दूध (लीटर)       ५५                            ६०
ब्रेड (४०० ग्राम)          ३०                             ३४
पेट्रोल (लीटर)            ९०                             १२०

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