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पैनिक बटन पर महंगाई का ब्रेक! ‘काली-पीली’ वालों ने किया लगाने से इंकार

  • महिला सुरक्षा की सरकारी घोषणा ठंडे बस्ते में

रामदिनेश यादव / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में चलनेवाली टैक्सियों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हर बार सवाल उठते रहे हैं। जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा मामले में खुद को सबसे बड़ा शुभचिंतक घोषित करते हुए बिना सोचे-समझे सभी टैक्सियों में पैनिक बटन लगाने का ऑर्डर जारी कर दिया। वर्ष २०१९ में यह निर्णय लिए गया, लेकिन इस पर लगनेवाले संसाधनों व अन्य जरूरी चीजों पर आज तक कोई विचार नहीं हुआ। केंद्र सरकार की इस योजना का आदेश यहां राज्य सरकार ने भी कागजी तौर पर जारी रखा है। ऐसी तमाम योजनाएं हैं, जो सिर्फ वाहवाही बटोरने के लिए घोषित कर दी गर्इं लेकिन उसे लागू करने और उसमें आने वाली समस्याओं को देखने के बाद उसे बिना बताए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्हीं में से एक यह टैक्सी में पैनिक बटन की योजना भी है। हालांकि, टैक्सी यूनियनों ने काली-पीली टैक्सी के अंदर पैनिक बटन लगाने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह एक महंगा डिवाइस है, जिसे लगाने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी। हमारी तो महीने भर की कमाई भी उतनी नहीं है, फिर यह डिवाइस कैसे लगवाएं?
यूनियन ने कहा, सरकार फंड दे
मुंबई टैक्सीमेंस यूनियन के महासचिव एएल क्वाड्रोस ने कहा कि इस महंगी सुविधा को टैक्सी में लगाने के लिए टैक्सी चालक और मालक के पास फंड नहीं है। वे बेचारे आरटीओ के विभिन्न फाइन से ही परेशान रहते हैं। पैनिक बटन लगाने के लिए सरकार टैक्सीचालकों को निर्भया फंड से पैसा क्यों नहीं देती? ड्राइवर पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
क्या कहते हैं आरटीओ अधिकारी?
काली-पीली टैक्सी के अंदर पैनिक बटन लगाने पर ही उनकी फिटनेस को मंजूरी देने का नियम है। वर्ष २०१८ के पहले की सभी टैक्सियों में अनिवार्य है। ऐसा इसलिए है क्योंकि केंद्र सरकार ने महिला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया है।
टैक्सीमेंस यूनियन ने लिखा पत्र
मुंबई टैक्सीमैन यूनियन द्वारा इसी वर्ष ६ मार्च को परिवहन विभाग को लिखे गए दो पन्नों के पत्र में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार टैक्सियों में पैनिक बटन लगाना चाहती है तो उसे सबसे पहले काल सेंटर की व्यवस्था करनी होगी, वहीं टैक्सी चालकों को पैनिक बटन लगाने के लिए फंड की व्यवस्था करनी होगी। क्योंकि पैनिक बटन के लिए १०,००० से १२,००० रुपए खर्च करने प़ड़ेंगे और यह रकम उनके लिए मामूली नहीं है।
अब तक ६ टैक्सी में बटन, पर मेंटेन नहीं
क्वाड्रोस ने कहा कि उसके मेंटेनेंस पर भी खर्च है। चूंकि यह महिला सुरक्षा से जुड़ा मामला है इसीलिए सरकार को चाहिए कि वह टैक्सी चालकों पर खर्च का बोझ डालने के बजाय बेकार पड़े निर्भया फंड को इनके लिए जारी करे। वर्ष २०१९ के बाद से कोरोना की मार झेल चुके टैक्सीवालों ने भी इससे तौबा किया। यही वजह है कि लगभग ६ टैक्सियों में अब तक पैनिक बटन है। इनमें से शायद ही एक भी गाड़ी में पैनिक बटन मेंटेन हो। दरअसल इसके मेंटेनेंस में भी खर्च है।
काली-पीली टैक्सी वालों के लिए कॉल सेंटर नहीं
काली-पीली टैक्सियों के अलावा अन्य ऐप आधारित टैक्सी यूनियन का दावा है कि उनके टैक्सी में लगे पैनिक बटन काम नहीं करते हैं। उसे दबाने पर वह कई बार कॉल सेंटर से कनेक्ट नहीं हो पाता है। ऐसे में इसका कोई फायदा भी नहीं है।
क्या है पैनिक बटन?
पैनिक बटन लाल रंग का एक बटन (स्विच) होता है, जो चालक की सीट के पीछे लगा होता है। आपात स्थिति में महिला इसे दबाकर खुद की सुरक्षा के लिए अलर्ट करती है। यह बटन एक डिवाइस से कनेक्ट होता है। दबने पर यह सीधे पुलिस कंट्रोल रूम अथवा अन्य कॉल सेंटर को कांटेक्ट होता है। ऑटोमैटिक इस गाड़ी का लोकेशन पुलिस को ट्रांसफर हो जाता है। जिसके बाद चंद मिनट में स्थानीय पुलिस इसे घेर लेती है, जैसी संकट में फंसी महिला को बचाया जा सकता है।

क्या कहती हैं महिलाएं?
मुंबई में खासकर काली-पीली टैक्सी में अब तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई। अन्य राज्यों के शहरों की तुलना में मुंबई के टैक्सीवाले सभ्य हैं। वैसे भी काली पीली टैक्सी की खिड़की खुली होती है। ऐसे में यहां महिलाओं के साथ असुरक्षा का मामला नहीं होता है। हां, अगर पैनिक बटन लगाई जाती है तो अच्छा ही है। – प्रेरणा नायर
जब मोबाइल में पैनिक बटन होता है, तमाम ऐप हैं, जो महिला सुरक्षा के लिए मोबाइल में पैनिक ऐप रखते हैं इसलिए इसकी जरूरत कम है। यदि महिलाओं को कोई खतरा महसूस होता है तो वे मोबाइल में ऐप ऑन करके रख सकती हैं। – सुनीता पासी
इस योजना के लिए सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए, महिलाओं की सुरक्षा की बात करते हैं तो पैनिक बटन के लिए सरकार ही कदम उठाए। वैसे भी मुंबई में टैक्सीवाले महिलाओं का सम्मान करते हैं। छेड़छाड़ की घटना न के बराबर है।
– नसीर अहमद, टैक्सी चालक
मुंबई में टैक्सीवाले काफी सभ्य हैं। महिलाओं के प्रति वे हमेशा सजग रहते हैं। शायद ही किसी महिला के साथ काली-पीली टैक्सी में किसी ने दुर्व्यवहार किया हो और इस बटन की जरूरत हुई हो।
-नंदलाल पांडे, एंटॉपहिल टैक्सी चालक-मालक यूनियन

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