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अनुसंधान में सामने आई जानकारी… नौनिहालों के लिए मुसीबत बनी बीमारी

-बच्चों में तेजी से फैल रहा तपेदिक…फेल होता दिख रहा मोदी का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल २०२५ तक देश को तपेदिक रोग से मुक्त कराने की बात कह रहे हैं। इसके लिए कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं, लेकिन देश में यह बीमारी कुछ अलग ही स्थिति बयां कर रही है। बड़े-बूढ़ों के साथ तपेदिक अब बच्चों में भी तेजी से पैâल रहा है, जो नौनिहालों के लिए मुसीबत बन रहा है। यह जानकारी हाल ही में एक अध्ययन में सामने आई है। ऐसे में मोदी का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम पूरी तरह से फेल होता दिखाई दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बच्चों में टीबी संक्रमण को लेकर २०२१ से २०२२ में कर्नाटक के दो जिलों में एक अध्ययन किया गया था। यह अध्ययन बंगलुरु के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, राजाजीनगर के साथ ही उडुपी जिलों में स्टेट ट्यूबरकुलोसिस डिविजन के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। अध्ययन में बच्चों में टीबी के संक्रमण की भारी दर पाई जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि अध्ययन में ६८६ बच्चे शामिल किए गए थे, जिनकी आयु १५ वर्ष से कम थी। इनमें से ५० फीसदी बच्चे संक्रमित पाए गए, जबकि तीन फीसदी में संक्रमण बीमारी में तब्दील हो गया था। इनमें से लगभग ८० फीसदी मामले छह से १५ वर्ष आयु वर्ग के थे। यह हाल ही में ओपन एक्सेस जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन का शीर्षक ‘भारत में बाल चिकित्सा घरेलू संपर्कों के लिए टीबी की जांच, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नई रणनीतियों को अपनाने का समय’ हैं। डॉक्टरों के मुताबिक महिलाओं में बीमारी होने का अधिक खतरा है। इसीप्रकार वर्ष २०२१ में टीबी से १६ लाख मौतें हुई थी और अब नवजात शिशु में टीबी के लक्षण पाए जा रहे है।

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