मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात : पायलट की चुप्पी

अंदर की बात : पायलट की चुप्पी

रमेश सर्राफ धमोरा।  राजस्थान कांग्रेस में चल रहे घटनाक्रम में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने पार्टी आलाकमान के पर्यवेक्षकों के सामने एक बड़ा खेला कर दिया था। उसके चलते कांग्रेसी विधायकों की मीटिंग ही नहीं हो पाई थी और मुख्यमंत्री बनाए जाने की प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में चली गई थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए। गहलोत अभी मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाले हुए हैं। दिल्ली में सोनिया गांधी से माफी मांगने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत जयपुर आकर पायलट पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। वो लगातार प्रदेश में दौरे कर रहे हैं और पायलट को निशाना बना रहे हैं, वहीं सचिन पायलट ने पूरे घटनाक्रम के दौरान जो चुप्पी साधी थी वह कायम है। सचिन पायलट इतने बड़े घटनाक्रम होने के बाद भी कुछ नहीं बोल रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनके गुट के विधायकों द्वारा पायलट व उनके समर्थक विधायकों को पार्टी से गद्दारी करने वाले कहने पर भी पायलट मौन साध जाते हैं। चर्चा है कि पायलट की रहस्यमयी चुप्पी आने वाली किसी बड़ी घटना की सूचना दे रही है।

भाजपा की टांग फंसाई
राजस्थान कांग्रेस में चल रही आपसी खींचातानी में भाजपा को कुछ हासिल होनेवाला नहीं है। राजस्थान सरकार के पास १२७ विधायकों का समर्थन है, वहीं भाजपा के पास मात्र ७० विधायक हैं। भाजपा कांग्रेस से संख्या बल में बहुत पीछे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर वसुंधरा समर्थक एक दर्जन विधायक भी अशोक गहलोत के साथ खड़े हो सकते हैं। राज्यसभा चुनाव में भी वसुंधरा समर्थक धौलपुर की विधायक शोभारानी कुशवाहा ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाला था और अब वह खुलकर अशोक गहलोत के पाले में खड़ी नजर आ रही हैं। इसी तरह वसुंधरा समर्थक कई और विधायक जरूरत पड़ने पर गहलोत को समर्थन दे सकते हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि भाजपा को तो दूर से ही कांग्रेस के झगड़े का तमाशा देखना चाहिए, मगर भाजपा के कुछ नेताओं की आदत दूसरे के झगड़े में टांग फसाने की पड़ गई है। वे बयानबाजी करने से बाज नहीं आ सकते। इसी प्रकरण में भाजपा नेता सतीश पूनिया, गुलाबचंद कटारिया, वासुदेव देवनानी प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं। भाजपा नेताओं की मांग पर कुछ होनेवाला तो है नहीं, मगर उनकी जग हंसाई जरूर हो रही है।

सरकार के खिलाफ चौधरी
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और बायतू से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने जयपुर में अपनी ही सरकार के खिलाफ ओबीसी आरक्षण को लेकर धरना दिया। अब सरकार ने ओबीसी आरक्षण में २०१८ में जारी हुए एक नोटिफिकेशन के चलते हुई गड़बड़ी को दूर करने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया है लेकिन चौधरी का कहना है कि अभी केवल प्रशासनिक आदेश जारी हुआ है। नियम नहीं बने हैं। २०१८ से अब तक जितने पदों का नुकसान हुआ है। उनका आकलन करवाने की मांग की जाएगी। उन पदों की गणना करने के बाद उन पर इसी वर्ग के पात्र युवाओं को भर्ती किया जाए। २०१८ में एक्स सर्विस मैन को लेकर जारी एक नोटिफिकेशन के कारण गत दिनों हुई भर्तियों में ओबीसी उम्मीदवारों का रोस्टर गड़बड़ा गया। इससे इस वर्ग के युवाओं का आरपीएस में मात्र एक पद पर ही चयन हुआ है इसलिए यह आंदोलन और धरना जरूरी था। मुख्यमंत्री के स्तर पर एक प्रशासनिक आदेश जारी हो गया है। हमें कहा गया है कि जल्द ही इसका हल हो जाएगा। महिला आरक्षण के आधार पर इस आरक्षण में भी सुधार किया जाएगा। अगर इसमें जल्द सुधार न हुआ तो रीट परीक्षा के लाखों युवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा।

निशाने पर माकन
राजस्थान में मुख्यमंत्री को लेकर चल रही उठापटक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राजस्थान के प्रभारी अजय माकन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समर्थकों के निशाने पर हैं। गहलोत समर्थकों का कहना है कि जब से अजय माकन राजस्थान के प्रभारी बने हैं। उनका प्रयास है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए। हाल ही में हुए घटनाक्रम में गहलोत समर्थक पूरा दोष माकन पर डाल रहे हैं। गहलोत समर्थक मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी, प्रताप सिंह खाचरियावास व पर्यटन निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने तो बाकायदा प्रेस कॉन्प्रâेंस कर अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माकन पर आरोपों की झड़ी लगा दी। गहलोत समर्थक नेताओं का कहना है कि माकन यदि उस समय धैर्य से काम लेते और विधायकों से एक बार समूह में मिलकर उनके मन की बात सुन लेते तो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को टाला जा सकता था, मगर माकन तो कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। यहां तक कि घटना के अगले दिन जब गहलोत समर्थक तीन मंत्री माकन से मिलने होटल जाकर उनसे बात करने को कहा तो उन्होंने साफ शब्दों में इंकार कर दिया। माकन की लिखित रिपोर्ट के बाद ही गहलोत समर्थक तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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