मुख्यपृष्ठविश्वएक-एक सांस के लिए जूझ रहे मासूम... `कोख' से बेघर नवजात!

एक-एक सांस के लिए जूझ रहे मासूम… `कोख’ से बेघर नवजात!

• किसी का वजन कम, तो कोई बना शरणार्थी
• रूसी सेना की जंग के बीच सायरन बढ़ा रहे दर्द
एजेंसी / कीव । यूक्रेन में रूसी हमले को अब एक महीने से ज्यादा हो चुके हैं। वहां के लोग तमाम तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यूक्रेन के कई प्रसव अस्पताल में प्रीमैच्योर बर्थ में अचानक से बढ़ोतरी हुई है। खारकीव और लीव के पेरेंटल क्लिनिक ने इस बात की पुष्टि की है। इन क्लिनिक वालों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में ये दर दोगुनी-तिगुनी हुई है। उनका मानना है महिलाओं की इस मेडिकल कंडीशन की वजह युद्ध के दौरान होने वाला तनाव है।
समय से पहले पैदा हो रहे बच्चे
खबर के अनुसार खारकीव के एक प्रसव अस्पताल में ६३० ग्राम की पॉलिना का जन्म हुआ, वहीं लीव के अस्पताल में ८०० ग्राम की विक्टोरिया ने जन्म लिया है। विक्टोरिया मार्च की शुरुआत में लीव के प्रसव अस्पताल में अपनी जुड़वां बहन वेरोनिका के साथ पैदा हुई। इन दोनों बहनों में से एक रिफ्यूजी के तौर पर रह रही, वहीं दूसरी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही है। मेडिकल डायरेक्टर इरीना कोंडराटोवा पॉलिना की देखरेख कर रही हैं। एयर स्ट्राइक वर्निंग और सायरन के बीच भी अस्पताल के स्टाफ ने हॉस्पिटल में ही रुकने का पैâसला किया है। डॉक्टर कोंडराटोवा कहती हैं कि विक्टोरिया और पॉलिना जैसी बच्चियां, जिनका वजन ६०० ग्राम है, उन्हें बेसमेंट में नहीं रखा जा सकता है। इरिना कहती हैं कि ये पूरी सिचुएशन मेरे दिल को दो टुकड़े में बांटने जैसा है। जहां मेरी एक बेटी मेरे साथ है, जबकि दूसरी डॉक्टर के पास। मैं हमेशा सोचते रहती हूं कि इस हालात में हमें मजबूत होना पड़ा है।
महिलाओं के लिए बना खतरा
महिलाएं ज्यादा से ज्यादा समय क्राउडेड बेसमेंट में बिता रही हैं। ऐसी जगहों पर इंफेक्शन पैâलने का खतरा काफी होता है।साथ ही प्रेग्नेंट महिलाओं को न तो अच्छा खाना मिल रहा है और न ही मेडिकल हेल्प। यही वजह है कि प्रीमैच्योर बर्थ की संख्या बढ़ी गई है। डॉक्टर कोंडराटोवा कहती हैं उनके क्लिनिक में समय से पहले जन्म का प्रतिशत बढ़ गया है। हालांकि पेशेंट की कुल संख्या कम हो गई है। क्योंकि महिलाएं खारकीव में लड़ाई में भाग लेने जा रही हैं।
अंधेरे में ६०० नवजात का भविष्य
यूक्रेन की सबसे बड़ी सरोगेट प्रोवाइडर ने बताया कि उनसे ६०० महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाओं की डिलिवरी हो चुकी है। उन्हें यूक्रेनियन नैनी की देखभाल में रखा हुआ है। इस मुश्किल की घड़ी में सुरक्षा के लिए सेफ्टी बंकर बनाए गए हैं। रूसी हमले के चलते राजधानी कीव में सैकड़ों विदेशी सरोगेट बच्चे फंस गए हैं। ऐसे बच्चों के माता-पिता दूसरे देशों से यहां नहीं आ पा रहे हैं। इनको जन्म देने वाली मांएं परेशान हैं कि अगर उनके माता-पिता नहीं आ पाए तो इन बच्चों का क्या होगा। पहले ये बच्चे कोरोना और लॉकडाउन के चलते फंसे थे और अब युद्ध के चलते अपने पेरेंट्स तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

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