मुख्यपृष्ठस्तंभइनसाइड स्टोरी : चैपल सिंड्रोम ने बढ़ाई चिंता

इनसाइड स्टोरी : चैपल सिंड्रोम ने बढ़ाई चिंता

-मुंबई सहित पूरे भारत में बढ़ रहे हैं दुर्लभ बीमारियों के मरीज

एसपी यादव

दुनियाभर में अब तक स्वास्थ्य विज्ञानियों ने लगभग ८ हजार दुर्लभ बीमारियों की पहचान की है, जिनमें से केवल ३५० दुर्लभ बीमारियों से ८० प्रतिशत मरीज पीड़ित हैं। भारत की बात करें तो यहां अब तक विभिन्न क्षेत्रीय अस्पतालों द्वारा केवल ४५० दुर्लभ बीमारियों की पहचान की गई है, जिनमें हेमोफीलिया, थैलेसीमिया, सिकलसेल एनीमिया, पांप विकार, सिस्टिक फाइब्रोसिस आदि प्रमुख हैं। लेकिन हाल ही में मुंबई में तेलंगाना मूल का एक बच्चा चैपल सिंड्रोम से पीड़ित पाया गया है। हाजीअली के एसआरसीसी अस्पताल की बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना खान का कहना है कि साल २०२२ में जब हमने पहली बार चैपल सिंड्रोम का निदान किया था, तब दुनिया में इस बीमारी के केवल १५ ज्ञात मामले थे। चूंकि अब आनुवंशिक परीक्षण के मामले में मॉडर्न मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की कर ली है, तो दुनियाभर में चैपल सिंड्रोम से पीड़ित १०० मरीजों की पहचान हो चुकी है।
अमेरिकी बायोटेक कंपनी ने भेजी दवा
मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में मुंबई में तेलंगाना मूल के एक ११ साल के बच्चे को चैपल सिंड्रोम से पीड़ित पाया गया है। इस बच्चे की पलकों में सूजन, चेहरे पर सूजन के साथ-साथ असहनीय पेट दर्द की समस्या होती थी। उसे कई साल तक इस समस्या को झेलना पड़ा, क्योंकि २०१७ में पहली बार चिकित्सा क्षेत्र में चैपल सिंड्रोम की ठीक-ठाक पहचान की गई। आठ महीने पहले एक अमेरिकी बायोटेक कंपनी ने अनुकंपा आधार पर एक प्रायोगिक दवा भारत भेजी, जिससे इस बच्चे का इलाज किया गया और अब वह काफी राहत महसूस कर रहा है।
दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं ७० लाख से अधिक भारतीय
देखने में आया है कि दुनियाभर में अब तक जिन ८ हजार दुर्लभ बीमारियों की पहचान की गई है, उनमें से अधिकांश का संबंध आनुवंशिक गड़बड़ी या फिर इम्यून सिस्टम की कमजोरी से है। दुर्लभ बीमारी का सरल मतलब यह निकाला जाता है कि गिने-चुने लोग किसी बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन सभी दुर्लभ बीमारियों के पीड़ितों का आंकड़ा जोड़ दिया जाए तो पता चलता है कि लाखों लोग दुर्लभ बीमारियों की चपेट में हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि ७० लाख से अधिक भारतीय, जिनमें ज्यादातर बच्चे किसी न किसी दुर्लभ बीमारी की चपेट में हैं। फिलहाल, चैपल सिंड्रोम सबसे नई दुर्लभ बीमारी के रूप में सामने है।
दो साल पहले मुंबई में सामने आया चैपल सिंड्रोम
मुंबई में सबसे पहले २०२२ में एक चार साल की बच्ची चैपल सिंड्रोम से पीड़ित पाई गई। हाजीअली स्थित एसआरसीसी अस्पताल में उसके इलाज के दौरान पाया गया कि वह गंभीर रूप से एनीमिया से पीड़ित थी, उसके खून में प्रोटीन का स्तर बेहद कम था, उसे डायरिया की शिकायत थी और उसकी रक्त वाहिकाओं में कई थक्के थे। तब बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजू खूबचंदानी और उनकी टीम की सदस्य डॉ. अर्चना खान ने विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों से इस मामले में सहयोग लिया। इस दौरान चैपल सिंड्रोम पर सबका ध्यान गया।
चैपल सिंड्रोम ने बढ़ाई चिंता
इसके बाद अस्पताल ने तुर्की के एक डॉक्टर के साथ वीडियो परामर्श की व्यवस्था की। तुर्की के इस डॉक्टर ने चैपल सिंड्रोम पर काफी काम किया था। तुर्की के इस डॉक्टर ने न्यूयार्क की बायोटेक कंपनी रेजेनरॉन का नाम सुझाया। छह महीने तक लगभग ४८ ईमेल करने के बाद कंपनी सप्ताह में एक बार इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मान गई। बच्ची की तबीयत में अब काफी सुधार आ चुका है। इसी बीच अब ११ साल के एक बच्चे में चैपल सिंड्रोम पाया गया है। तेलंगाना मूल के इस बच्चे का जब दिल्ली-एम्स में परीक्षण किया गया, तब उसे चैपल सिंड्रोम से पीड़ित पाया गया। अब हाजीअली स्थित एसआरसीसी अस्पताल में उसका उपचार हो रहा है।
२९ फरवरी को विश्व दुर्लभ रोग दिवस
फिलहाल, २९ फरवरी को विश्व दुर्लभ रोग दिवस के मौके पर ऑर्गनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज इंडिया की ओर से एक जागरूकता दौड़ आयोजित की जा रही है। संगठन की संगीता बर्डे का कहना है कि दुर्लभ बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना समय की मांग है।

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