मुख्यपृष्ठअपराधइनसाइड स्टोरी: आईएसआई का एडीजी बना दाऊद इब्राहिम!

इनसाइड स्टोरी: आईएसआई का एडीजी बना दाऊद इब्राहिम!

एसपी यादव

भारत विरोधी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान ने किया सरगना का सम्मान
दाऊद के लिए ड्रग तस्करी को आसान बनाने का आईएसआई का पैंतरा
अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम कास्कर (६८) को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान ने इनाम दिया है।

खबर है कि दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस) का मानद अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) बनाया गया है। पिछले कई दशकों से दाऊद इब्राहिम आईएसआई की सेवा कर रहा है। अपने ड्रग के काले धंधे से होनेवाली कमाई से हमेशा आईएसआई को कमीशन देता रहा है। दाऊद इब्राहिम ८० के दशक में मुंबई से दुबई भाग गया था, जहां आईएसआई ने उसे आश्रय दिया और उसे अपना मोहरा बना लिया। १२ मार्च १९९३ को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को अंजाम देने में दाऊद ने मदद की थी। मीडिया में बार-बार खबरें सामने आईं कि दाऊद इब्राहिम कराची के क्लिफ्टन इलाके में समुद्र किनारे बने एक आलीशान बंगले में रहता है, लेकिन हर बार पाकिस्तान की सरकार और आईएसआई ने इसे मानने से इंकार कर दिया। पहली बार ऐसा हुआ है कि आईएसआई ने खुले तौर पर दाऊद को अपना मानद एडीजी बनाया है। ऐसे में यह संभावना प्रबल हो जाती है कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन दाऊद इब्राहिम अब पाकिस्तान की राजनीति और सरकार में दखल देगा।
ग्लोबल टेररिस्ट को सम्मान क्यों?
दाऊद इब्राहिम को संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी राजकोष विभाग ने ग्लोबल टेररिस्ट (वैश्विक आतंकवादी) घोषित कर रखा है। अपने नशे के धंधे को पैâलाने और पाकिस्तान की भारत विरोधी गतिविधियों में मदद करने के लिए दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संगठन अल कायदा, ओसामा बिन लादेन और तालिबान से जुड़ा पाया गया, जिसके बाद उसे ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया गया। अब यह सवाल उठ रहा है कि आर्थिक बदहली का शिकार पाकिस्तान किसी ग्लोबल टेररिस्ट को अपनी खुफिया एजेंसी में मानद एडीजी बनाने का खतरा क्यों मोल ले रहा है? इससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परेशानी हो सकती है।
कनाडा सिंडिकेट प्रभावित हुआ
सूत्रों का कहना है कि ड्रग के धंधे में दुनिया के सबसे खूंखार लोग जुड़े होते हैं। चूंकि कनाडा और भारत के बीच तनातनी से कनाडा में पैâला दाऊद का सिंडिकेट प्रभावित हुआ है, तो उसने एक बार फिर अफगानिस्तान को अपने ड्रग के धंधे का मुख्य अड्डा बनाया है और ड्रग तस्करी के लिए शंघाई माफिया की भी मदद ले रहा है। इसलिए उसकी सुरक्षा को और सख्त करने और अपना नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए आईएसआई ने उसे अपना मानद एडीजी बनाया है।
२० हजार करोड़ का काला धंधा
२००४-०५ में दाऊद का ड्रग कारोबार सालाना पांच हजार करोड़ रुपए का था, जो अब २० हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो चला है। दाऊद ने ‘डी कंपनी’ बनाकर अपने कारोबार को अपने भाई अनीस इब्राहिम और अपने सिपहसालार छोटा शकील के बीच बांट दिया है। अनीस खाड़ी व मिडिल ईस्ट देशों का ओवरसीज बिजनेस संभाल रहा है, जबकि छोटा शकील रियल इस्टेट और फिल्मों में फाइनेंस का धंधा संभाल रहा है। दाऊद खुद नशे के धंधे की कमान संभाल रहा है। तालिबान से पुराना कनेक्शन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अफगानिस्तान में जब से तालिबान ने सत्ता संभाली है, तब से दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में कुछ ज्यादा एक्टिव हो गया है। ९० के दशक में दाऊद इब्राहिम ने तालिबान के संरक्षण में अफगानिस्तान की यात्रा की थी। तब अफगानिस्तान की अफीम से तरह-तरह के ड्रग्स बनाने के लिए बलूचिस्तान में एक पैâक्ट्री भी स्थापित की गई थी। दाऊद इब्राहिम ने दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अप्रâीका के अपने ड्रग तस्करी के रूट का इस्तेमाल ओसामा बिन लादेन के आतंकवादियों को भी करने दिया था। इसी कारण से अमेरिका बौखला गया था। अब जबकि तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में है, तो दाऊद इब्राहिम ने अपना ड्रग तस्करी का धंधा और तेज कर दिया है।

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