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इनसाइड स्टोरी: यूपी के अफसर उड़ा रहे योगी के `सीएम पोर्टल’ का मखौल! बगैर `वर्कआउट’ टेबलों से ही भेजी जा रही निस्तारण रिपोर्ट

हरेक जिले में निस्तारित शिकायतों से असंतुष्टों की तादाद हजारों में
सीएम पोर्टल की शिकायतों को बोझ समझ अफसर मातहतों की रिपोर्ट पर आंखें बंद करके कर रहे निस्तारण
असंतुष्ट जनता को नहीं दिख रही राह
विक्रम सिंह
यूपी के `योगी राज’ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता की समस्याओं के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए `सीएम पोर्टल’ एप का जमकर ढिंढोरा पीटा और इसका श्रीगणेश करते हुए ये दावा किया कि अब आम जनमानस की तकलीफें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से देखी, सुनी, समझी और निस्तारित की जाएंगी। लेकिन कुछेक महीनों के भीतर ही आम जनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव गायब हो चुके हैं। अधिकारी इस पोर्टल को ही बोझ समझने लगे हैं। शिकायतें तो खूब आ रही हैं, लेकिन इनका निस्तारण सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गया है। लिहाजा, हरेक जिले के सीएम पोर्टल पर लंबित शिकायतों का अंबार है। पीड़ित आदमी `असंतुष्ट’ की बटन क्लिक करके महीनों से यही प्रतीक्षा कर रहा है कि योगी जी के इस पोर्टल से हो सकता है कभी `न्याय’ का भी बटन दबेगा।
पूर्वी जिलों में सीएम पोर्टल पर पुलिस-राजस्व की शिकायतों का अंबार
यूं तो यूपी के सीएम पोर्टल पर सभी विभागों से संबंधित शिकायतें बड़ी संख्या में आती रहती हैं, लेकिन सर्वाधिक संख्या रहती है पुलिस-राजस्व विभाग संबंधी। पूर्वांचल के अयोध्या, आजमगढ़, वाराणसी, प्रयागराज व गोंडा-देवीपाटन मंडलों में जमीन विवाद और पुलिस संबंधी मामले ज्यादा घटित होते हैं। जिनके फौरी निस्तारण को लेकर प्रायः विलंब होता है या फिर संबंधित अधिकारियों व कर्मियों पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगता रहता है, ऐसे में पीड़ित के पास सीएम पोर्टल के जरिये अपनी बात रखने का एकमात्र विकल्प शेष रह जाता है। यही वजह है कि सीएम पोर्टल इन शिकायतों से अक्सर `ओवरलोड’ रहता है। जानकारी के अनुसार, इसके बावजूद जिलों के संबंधित अकर्मण्य अफसर व कर्मी आनन-फानन त्रुटिपूर्ण निस्तारण कर रिपोर्ट प्रेषित कर दे रहे हैं। सुल्तानपुर के आरटीआई एक्टिविस्ट अधिवक्ता आरपी सिंह बताते हैं कि पोर्टल पर की गई उन्हीं की कई शिकायतों को तथ्यहीन व आधारहीन ढंग से कर दिया गया, मात्र शिकायत निस्तारण में अव्वल दिखने के लिये ऐसा किया जा रहा है। अधिकारियों व कर्मियों की गैर पारदर्शिता पूर्ण कार्यशैली भ्रष्ट आचरण भी इसकी वजह हो सकती है।
सिर्फ गिनती गिनते हैं अफसर, नहीं होती गुणवत्ता की समीक्षा
सीएम पोर्टल का उद्देश्य है शिकायतकर्ता की समस्या का पूर्ण समाधान। लेकिन यूपी के अफसरों की कार्यशैली नहीं बदली। जनता के प्रति जवाबदेही से बचने वाले अफसर सीएम पोर्टल को भी बोझ समझने लगे हैं। नतीजतन पोर्टल पर आई जनशिकायतें मखौल बनकर रह गई हैं। यूं तो प्रत्येक पखवारे जिलों में आईजीआरएस की समीक्षा होती है, लेकिन सिर्फ निस्तारण गिना जाता है, गुणवत्तापूर्ण समाधान पर कोई जोर नहीं है।
जवाबदेह अधिकारियों का प्रशासन में अभाव
युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव व संप्रति भाजपा नेता अशोक सिंह हिटलर कहते हैं कि मुख्यमंत्री संवेदनशील हैं, लेकिन अफसरशाही शाही अंदाज में है। उसे जनसमस्याओं से कोई लेना-देना नहीं। वो सिर्फ कागज पर सफलता के आंकड़े गिनाने में जुटी है। उसकी इसी प्रवृत्ति पर मुख्यमंत्री जी अंकुश लगाएं।

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