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इनसाइड स्टोरी : इलेक्शन में बढ़ेगा डीपफेक का टेंशन?

-चार साल में ५५० प्रतिशत बढ़े डीपफेक के मामले… सरकार सख्त, लेकिन नुकसान भरपाई असंभव

एसपी यादव

हाल ही में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना और कैटरीना कैफ के डीपफेक वीडियो ने सूचना-तंत्र के गलियारे में तूफान खड़ा कर दिया। जानकारों का कहना है कि आगामी आम चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के खुराफाती तत्व नेताओं के डीपफेक को वायरल कर सकते हैं। भले ही सरकार फौरन कार्रवाई करते हुए ऐसे वीडियो हटवा देती हो, लेकिन इससे होनवाले नुकसान की भरपाई कर पाना असंभव होगा। चुनावों में डीपफेक का इस्तेमाल काफी हद तक जनमानस को प्रभावित कर सकता है और निष्पक्ष चुनाव की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है।
डीपफेक ने अपना घातक रंग हाल ही में तब दिखाया जब एनआरआई जारा पटेल के चेहरे पर रश्मिका मंदाना का चेहरा लगाकर एक डीपफेक वीडियो बनाया गया। इस पर महानायक अमिताभ बच्चन ने भी रोष प्रकट किया। इसके बाद केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इंटरनेट यूजर्स की सुरक्षा और भरोसा सुनिश्चित करने को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर सोशल मीडिया मंचों को इस तरह की सामग्री हटाने के लिए २४ घंटे का अल्टीमेटम दिया। लेकिन यह सरकारी सख्ती बेअसर नजर आई क्योंकि एडवाइजरी जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर अभिनेत्री कैटरीना कैफ का एक डीपफेक वीडियो सामने आ गया। इस डीपफेक वीडियो में कैटरीना की आने वाली फिल्‍म टाइगर-३ के ट्रेलर की एक क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई। रश्मिका मंदाना के वीडियो में चेहरा बदला गया था, इसमें कैटरीना की ड्रेस बदल दी गई।
ओबामा और जुकरबर्ग भी हो चुके हैं शिकार
अधिकांश डीपफेक वीडियो अश्लील प्रकृति के होते हैं। साथ ही इसका उपयोग लोगों को झूठा बताने और राजनेताओं की डिजिटल रूप से परिवर्तित क्लिप भी वायरल की जाती है। कुछ साल पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को व्यापक रूप से प्रसारित एक डीपफेक वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को पूरी तरह से मूर्ख कहते हुए देखा गया था। इसी तरह मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को ऐसे ही एक अन्य वीडियो में ‘अरबों लोगों के चुराए गए डेटा पर पूर्ण नियंत्रण’ होने का दावा करते देखा गया था। अमेरिकी स्पीकर नैंसी पोलेसी, एलन मस्क, टॉम हैंक्‍स, क्रिस्‍टीना बेल्‍स, प्रियंका चोपड़ा, अनुष्‍का शर्मा, कियारा आडवाणी, तमन्‍ना भाटिया, पूजा हेगड़े जैसी हस्तियां डीपफेक का शिकार बन चुकी हैं।
आखिर डीपफेक क्या बला है?
डीपफेक शब्‍द डीप लर्निंग और फेक को मिलाकर बना है। डीप लर्निंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक प्रकार है, जो डेटा से सीखने के लिए आर्टिफि‍शियल न्‍यूरल नेटवर्कों का इस्‍तेमाल करती है। इस शब्‍द को सबसे पहले साल २०१७ में एक रेडिट यूजर ने इस्‍तेमाल किया था, जिसने इसी नाम से अपना अकाउंट बनाया हुआ था। डीपफेक में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से किसी भी तस्वीर, वीडियो और ऑडियो  को छेड़छाड़ कर बिल्कुल अलग बनाया जा सकता है।
नुकसान भरपाई असंभव
एक ऐसी दुनिया, जहां सेकेंडों में कोई कंटेंट लाखों-करोड़ों लोगों द्वारा शेयर और री-पोस्‍ट कर दिया जाता है, २४ घंटों में संबंधित पक्ष को इतनी ज्‍यादा क्षति पहुंचा चुका होता है कि फिर उस कंटेंट के ऑनलाइन रहने या न रहने से कोई बहुत फर्क नहीं पड़ेगा।
डीपफेक के शिकार ले सकते हैं कानून की मदद
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, २००० के तहत किसी व्यक्ति की गोपनीयता के लिए सुरक्षा के कुछ नियम बनाए गए हैं, जिसमें डेटा गोपनीयता का अधिकार भी शामिल है। यदि किसी व्यक्ति का डीपफेक वीडियो बनाया जाता है, तो वह इस कानून के तहत शिकायत कर सकता है। इस अधिनियम की धारा ६६ डी कंप्यूटर संसाधन का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने की सजा से संबंधित है। दोषी पाए गए व्यक्ति को तीन साल तक की वैâद हो सकती है और उस पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। आईटी नियम ३(१) (बी)(सात) सोशल मीडिया मध्यस्थों को गोपनीयता सुनिश्चित करने को कहता है, वहीं नियम ३(२) (बी) शिकायत मिलने पर २४ घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश देता है। इसी तरह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा ४९९ और ५०० के तहत डीपफेक का शिकार व्यक्ति मानहानि का मुकदमा भी दायर कर सकता है।
डराते-चौंकाते आंकड़े
२०१९ की तुलना में २०२३ में डीपफेक के मामले ५५० प्रतिशत बढ़ गए हैं।
२०१९ में किए गए सेंसिटी एआई के एक रिसर्च के मुताबिक ९६ प्रतिशत डीपफेक छवियांं पॉर्न होती हैं, जिनमें ९९ प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
यूरोपोल (यूरोपियन इंटरनेशनल पुलिस) ने चेतावनी दी है कि २०२६ तक ९० प्रतिशत कंटेंट सिंथेटिक यानी डीपफेक होेंगे।
भारत में सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर उपलब्ध २ प्रतिशत वीडियो डीपफेक हैं। इस मामले में दक्षिण कोरिया में ५३ प्रतिशत, अमेरिका में २० प्रतिशत, जापान में १० प्रतिशत, इंग्लैंड में ६ प्रतिशत, चीन में ३ प्रतिशत वीडियो डीपफेक हैं।
एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि डीपफेक वीडियो के लिए सबसे ज्यादा (५३ प्रतिशत) गायिकाओं के चेहरे का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद अभिनेत्रियों के चेहरे का ३३ प्रतिशत, सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोगों के चेहरे का ३ प्रतिशत, मॉडल के चेहरोें का २ प्रतिशत, एथलीट-खिलाड़ियों के चेहरे का २ प्रतिशत और अन्य प्रभावशाली लोगों के चेहरे का २ प्रतिशत इस्तेमाल किया गया है।

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