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अंदर की बात : बैरवा ने की पायलट की पैरवी

  • रमेश सर्राफ धमोरा ,झुंझुनू

बैरवा ने की पायलट की पैरवी
राजस्थान में एक बार फिर अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट की राजनीति गरमाने लगी है। राजस्थान एससी आयोग के अध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक खिलाड़ीलाल बैरवा ने सचिन पायलट को सीएम बनाने की मांग करते हुए अशोक गहलोत को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने जाने की पैरवी की है। बैरवा ने कहा जब सचिन पायलट मानेसर चले गए थे, तब उनसे वादे करके उन्हें वापस लाया गया था। उस समय जो समस्याएं थी, वे भी खत्म हो गई हैं। ऐसे में अब जो राजस्थान की स्थिति है, उसमें सचिन पायलट को अगर मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो इसमें दिक्कत क्या है? आलाकमान पर उनके पैâसले को लेकर दबाव नहीं बनाना चाहिए। बैरवा ने कहा कि अशोक गहलोत हमारे वरिष्ठ नेता हैं। वे पिछले ४० बरसों से राजनीति कर रहे हैं। २० सालों से तो वे मुख्यमंत्री सहित बड़े पदों पर रहे हैं। उन्हें अध्यक्ष बनाया जा रहा है तो यह उनके लिए सम्मान की बात है। अब वक्त बदल गया है। पार्टी को कोई भी व्यक्ति अकेले सत्ता लाने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में मेरी राय है कि विभिन्न जातियों के एक-एक नेता को आगे लाकर फ्रंट लाइन में तैयार करनी चाहिए।
जलपरी का कमाल
उदयपुर की अंतरराष्ट्रीय ओपन वाटर स्वीमर झरना कुमावत ने अपनी पांच सदस्यीय रिले टीम के साथ इंग्लिश चैनल पार कर विश्व में उदयपुर का नाम रोशन किया है। झरना ने हाई टाइड और खराब मौसम के बावजूद खतरनाक समुद्री रास्ते को पार कर अपने जज्बे और जुनून से ये सफलता पाई है। झरना ने बताया कि इंग्लैंड के डोवर बीच से फ्रांस तक का ३३ किमी का समुद्री रास्ता बेहद जोखिम भरा था। उनकी रिले टीम ने १४ घंटे ४० मिनट में डोवर से प्रâांस तक की दूरी सफलतापूर्वक पार की। इस रिले में ब्राजील, मोजाम्बिक, केन्या, पेरू और इंडोनेशिया के तैराक उनके साथ थे। तैराकी के क्रम में झरना को दो बार तैराकी करनी पड़ी। इसमें पहली बार शाम को ७ बजे व दूसरी बार अगले दिन २ बजे का टाइम स्लॉट मिला। झरना टाइप वन डायबिटिक पेशेंट हैं। उन्हें दिन में कई बार चिकित्सा व जांच की जरूरत पड़ती है। इंग्लिश चैनल स्वीमिंग के दौरान भी उन्हें लगातार इंजेक्शन लेने पड़े। उनकी बॉडी में ग्लूकोज मॉनिटर फिक्स है। झरना बताती है कि हर बार खुद के सामने बड़ा लक्ष्य चुनौती के रूप में पेश करती हूं और हौसले व कड़ी मेहनत के दम पर जीत हासिल करती हूं।
रंगकर्मी रणवीर सिंह का निधन
देशभर में अपनी अलग पहचान रखनेवाले रंगकर्मी रणवीर सिंह डूंडलोद का ९३ वर्ष की उम्र में जयपुर में निधन हो गया। वे झुंझुनू जिले के डूंडलोद ठिकाने के पूर्व जागीरदार परिवार से थे। वे भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जीवनभर रंगकर्म की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और कई नाटक मंचित किए। झुंझुनू में डूंडलोद ठिकाने के प्रमुख जागीरदार परिवार में ७ जुलाई १९२९ को जन्मे रणवीर सिंह में जागीरदारोंवाली कोई सामंती ठसक नहीं थी बल्कि एक शाही सौम्यता थी। वो इतिहास की सच्चाई के साथ खिलवाड़ पसंद नहीं करते थे। उन्होंने पहले मेयो कॉलेज (अजमेर) और बाद में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने थिएटर पर व्याख्यान देने तथा अध्ययन करने के लिए जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस और रूस सहित ४२ देशों की यात्राएं कीं। मॉरीशस सरकार ने उन्हें अपने ड्रामा एडवाइजर के रूप में आमंत्रित किया था। उन्होंने १९७४ से १९८४ तक मॉरीशस में रहकर वहां ड्रामा डिपार्टमेंट स्थापित किया और थिएटर के रूप को प्रशिक्षित किया।
शहीदों के आश्रितों को मिली राहत
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने सरकारी नौकरियों में शहीदों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति में बड़ी राहत दी है। अभी तक शहीदों के आश्रितों को १५ अगस्त १९४७ से ३१ दिसंबर १९७० की अवधि के शहीदों के एक आश्रित को राजकीय सेवा में नियोजित करने का प्रावधान है। अब इसकी अवधि बढ़ाकर ३१ दिसंबर १९७१ तक कर दी गई है। इससे १९७१ के युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिजनों को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिल सकेगा, वहीं अब कुटुंब के सदस्य के रूप में शहीद की पत्नी, पुत्र-पुत्री, दत्तक पुत्र-पुत्री, पौत्र-पौत्री, दत्तक पौत्र-पौत्री के साथ-साथ नवासा, दत्तक नवासा-नवासी और शहीद के अविवाहित होने पर उसके भाई या बहन, भाई के पुत्र-पुत्री, बहन के पुत्र-पुत्री को भी आश्रित श्रेणी में शामिल किया गया है। सरकार ने शहीद रक्षा कार्मिकों के आश्रितों की नियुक्ति नियमों में अहम संशोधन कर राहत प्रदान की है। इसके लिए राजस्थान शहीद रक्षा कार्मिकों के आश्रितों के नियुक्ति नियम-२०१८ को निरस्त कर नए नियम राजस्थान शहीद रक्षा कार्मिकों के आश्रितों की नियुक्ति नियम- २०२२ को स्वीकृति दी गई है। इससे शहीद परिवारों को काफी राहत मिलेगी। अभी तक बहुत से शहीदों के परिजन अनुकंपा नियुक्ति से वंचित थे।
(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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